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News Samvad : देहरादून में 1000 करोड़ के कथित काले साम्राज्य के ‘बेताज बादशाह’ कहे जाने वाले गैंगस्टर विक्रम शर्मा को गोलियों से भूनने वाले दो शूटर आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गए। दिनदहाड़े हुई इस सनसनीखेज वारदात ने राजधानी में हड़कंप मचा दिया था। अब पुलिस गिरफ्तारी के बाद इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है।
बाहर से कारोबारी, अंदर से कुख्यात गैंगस्टर
राजधानी देहरादून में विक्रम शर्मा को लोग एक रसूखदार स्टोन क्रशर कारोबारी के तौर पर जानते थे। राजपुर रोड स्थित सिल्वर सिटी मॉल के महंगे जिम में वर्कआउट, शाम को प्रॉपर्टी डीलरों संग बैठकी और अफसर-नेताओं में अपनी पकड़ की बातें – यही उसकी पहचान थी। लेकिन शुक्रवार को गोलियों की तड़तड़ाहट ने उसका असली चेहरा सबके सामने ला दिया। जिसे लोग बिजनेसमैन समझकर सलाम करते थे, वह असल में झारखंड का कुख्यात गैंगस्टर निकला।
जिम से निकला और बरस गई गोलियां
शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे विक्रम जिम से बाहर निकला ही था कि पहले से घात लगाए हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। तीन राउंड फायर हुए, जिनमें दो गोलियां सीधे उसके सिर में लगीं। अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। CCTV फुटेज में दो शूटर साफ दिखाई दिए। तीसरा साथी बाइक पर बाहर इंतजार कर रहा था। काम तमाम कर तीनों फरार हो गए।
1000 करोड़ का बेनामी साम्राज्य
विक्रम शर्मा, पुत्र अमृत लाल, मूल रूप से झारखंड के जमशेदपुर का रहने वाला था। पुलिस के मुताबिक झारखंड में उसका करीब 1000 करोड़ रुपये का बेनामी साम्राज्य फैला हुआ था। कहा जा रहा है कि इसी काले धन को सफेद करने के लिए उसने उत्तराखंड की शांत वादियों का रुख किया। देहरादून के सहस्त्रधारा रोड स्थित ग्रीन व्यू रेजीडेंसी में वह किराए के आलीशान फ्लैट में रह रहा था।
पहचान छुपाने का खेल
पुलिस जांच में सामने आया कि विक्रम बेहद शातिर दिमाग का था। खुद की प्रॉपर्टी खरीदने से बचता था और किराए के लग्जरी फ्लैट में रहता था। कभी राजपुर रोड, कभी जाखन – जगह बदलता रहता था ताकि पक्का ठिकाना न बने। उसके फ्लैट के अंदर का नजारा किसी फाइव स्टार सुइट से कम नहीं था। महंगे मॉडर्न गैजेट्स, आलीशान फर्नीचर और ऐशो-आराम का पूरा इंतजाम।
कॉर्पोरेट स्टाइल में चलता था अपराध
विक्रम पुराने जमाने का गैंगस्टर नहीं था। अपराध को उसने कॉर्पोरेट अंदाज में चलाया। झारखंड में उसका सिंडिकेट रंगदारी और ठेकेदारी से जुड़ा था। हमेशा ब्रांडेड कपड़े, स्पोर्ट्स शूज, गले में मोटी सोने की चेन और कलाई में लाखों की घड़ी – यही उसका स्टाइल था। झारखंड जाता तो लग्जरी गाड़ियों का काफिला साथ चलता।
फर्जी दस्तावेजों से कई राज्यों में संपत्तियां
जमशेदपुर में छापेमारी के दौरान पुलिस को कई चौंकाने वाले दस्तावेज मिले। अलग-अलग नामों से बनाए गए 17 पैन कार्ड, तीन आधार कार्ड, 11 वोटर आईडी और सात ड्राइविंग लाइसेंस बरामद हुए। इन्हीं फर्जी पहचान के जरिए मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में जमीन, फ्लैट और व्यावसायिक संपत्तियां खरीदी गई थीं।
ईडी की बड़ी कार्रवाई
जमशेदपुर के बिरसानगर थाने में दर्ज केस के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। मई 2017 में जांच शुरू हुई और फरवरी 2018 में करीब 670 करोड़ रुपये की संपत्तियां फ्रीज कर दी गईं। कोलकाता, नोएडा, दिल्ली, जबलपुर, सूरत, गुरुग्राम और जयपुर समेत कई शहरों में बैंक खाते और प्रॉपर्टी जब्त की गई थीं।
अखिलेश सिंह का भरोसेमंद
पुलिस के मुताबिक विक्रम, दुमका जेल में बंद कुख्यात अपराधी अखिलेश सिंह का खास आदमी था। जेल में रहते हुए भी अखिलेश अपने नेटवर्क को ऑपरेट करता था और विक्रम आर्थिक लेन-देन और निवेश फैसलों की कमान संभालता था। यानी सलाखों के पीछे से भी खेल जारी था, और विक्रम मैदान में उसका मैनेजर बना हुआ था।
ग्रीन व्यू रेजीडेंसी में सन्नाटा
वारदात के बाद सहस्त्रधारा रोड स्थित ग्रीन व्यू रेजीडेंसी में सन्नाटा पसरा रहा। सुरक्षा गार्ड हर आने-जाने वाले से पूछताछ कर रहे थे। सोसाइटी के सचिव सुभाष भाटी ने बताया कि उन्हें विक्रम के असली बैकग्राउंड की कोई जानकारी नहीं थी। “हाय-हैलो तक ही बात होती थी। यहां 78 फ्लैट हैं, हर किसी के बारे में सब जानना संभव नहीं,” उन्होंने कहा। बताया जा रहा है कि विक्रम यहां अपनी पत्नी और बेटी के साथ किराए के फ्लैट में रह रहा था। घटना के बाद कॉलोनी के लोग भी सकते में हैं।
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