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Khunti : राजधानी रांची और खूंटी को गुमला, सिमडेगा के अलावा छत्तीसगढ़ और ओड़िशा को जोड़ने वाले केटीके रोड (खूंटी-तोरपा-कोंलेबिरा रोड) पर पेलौल गांव के पास ध्वस्त हुए बनइ नदी पुल से न सिर्फ आम लोग प्रभावित हुए हैं, बल्कि बच्चों की शिक्षा भी इससे प्रभावित हो रही है। बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर रोज स्कूल जा रहे हैं। पेलौल के पास कैथरीन स्कूल के अलावा बिचना स्थित संत अंथोनी स्कूल में तोरपा, डोड़मा, बाला, सुनगी, रोड़ो, अंगराबारी, बिचना जैसे गांवों से सैकड़ों बच्चें ग्रामीणों की ओर से बास की बनाई गई लगभग 20 फीट ऊंची खतरनाक जुगाड़ वाली सीढ़ी के सहारे पुल पर चढ़कर और फिर उसी सीढ़ी से वापस उतर कर स्कूल और घर आना-जाना करते हैं।
ध्वस्त पुल के कारण स्कूल बस सेवा लगभग बंद है। वैकल्पिक मार्ग से पहुंचने में घंटों लगते हैं, जिससे अभिभावकों को मजबूरन अपने निजी वाहनों से बच्चों को ध्वस्त पुल तक लाना पड़ रहा है। हर दिन यही नजारा दिखता है।
छोटे-छोटे बच्चों को अभिभावक कभी पीठ पर, तो कभी हाथ पकड़कर सीढ़ियों से उतारते-चढ़ते हैं और फिर टूटी पुलिया के गैप को पार कराकर स्कूल छोड़ते हैं। स्कूल छुट्टी के बाद भी यही दृश्य दोहराया जाता है। सीढ़ी पर चढ़ते-उतरते नन्हे बच्चों को देखना दिल दहलाने वाला होता है।
यहां याद दिला दें कि पुल बीते 19 जून को भारी बारिश के कारण ध्वस्त हो गया था। पंद्रह दिनों के बाद भी न तो डायवर्सन का काम शुरू किया गया और न ही वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था को दुरुसत करने करने कोई कवायद की गई। पुल घ्वस्त होने के बाद गत 24 जून को सांसद कालीचरण मुंडा ने राज्य की गामीण विकास मंत्री दीपिका सिंह पांडेय से मुलाकात कर क्षतिग्रस्त पुल और डायवसन निर्माण का आग्रह किया था। सांसद ने बाद में कहा कि डायवसन का निर्माण जल्द शुरू होगा, पर इस दिशा में काेई पहल प्रशासन या सरकार की ओर से नहीं की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की उदासीनता से यह स्थिति उत्पन्न हई है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल टूटने के लिए दोषी ठेकेदार और अभियंता पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

