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Patna : हल्की गुलाबी ठंड, सुबह का कोहरा और चारों तरफ गूंजते ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’ के शांत सुर। कुछ ऐसा ही नजारा इस साल दिसंबर में वैशाली की धरती पर दिखने वाला है। वही वैशाली जहां भगवान बुद्ध ने अपने कदम रखे थे, आम्रपाली की भक्ति स्वीकार की थी और महापरिनिर्वाण से पहले अपना अंतिम वर्षावास बिताया था। उसी पावन मिट्टी पर अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक जमावड़ा लगने जा रहा है। 11 से 13 दिसंबर तक बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय परिसर में तीन दिनों का अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन होगा। यह आयोजन महज एक सरकारी कार्यक्रम भर नहीं है, बल्कि बिहार की उस पुरानी साख को फिर से जिंदा करने की कोशिश है जब पूरी दुनिया ज्ञान और शांति की तलाश में यहां आया करती थी।
कड़ाके की ठंड में मेहमाननवाजी का इम्तिहान, खेतों के बीच खड़ी होगी तंबुओं की नगरी
दिसंबर के महीने में बिहार के देहाती इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़ती है। ऐसे मौसम में जब जापान, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, लाओस और म्यांमार जैसे देशों से सैकड़ों लामा, भिक्षु और विद्वान वैशाली पहुंचेंगे, तो उनके आराम और गरिमा का पूरा ख्याल रखना बड़ी चुनौती होगी। इसी को देखते हुए प्रशासन ने संग्रहालय के पास ही एक बेहद खूबसूरत और आधुनिक टेंट सिटी बसाने का फैसला लिया है। इन तंबुओं में होटल जैसी तमाम सुविधाएं होंगी ताकि दूर देशों से आए मेहमानों को अपनी ही धरती जैसा सुकून मिले। पटना में मुख्य सचिव और विकास आयुक्त ने सभी बड़े अफसरों को साफ समझा दिया है कि मेहमानों के स्वागत में कोई कसर नहीं रहनी चाहिए। पटना एयरपोर्ट और पटना रेलवे स्टेशन पर चौबीसों घंटे काम करने वाले हेल्प डेस्क बनेंगे, ताकि जो भी अतिथि उतरे, उसे वैशाली पहुंचने तक कहीं भटकना न पड़े।
गड्ढों से मुक्त होंगी सड़कें, रोशन गलियों में सुरक्षा और सेहत का पूरा पहरा
अक्सर बड़े आयोजनों में जो सबसे बड़ी फजीहत होती है, वह है सफर की परेशानी। इसी को भांपते हुए सरकार ने सबसे पहले पटना से वैशाली को जोड़ने वाले रास्तों और आसपास की ग्रामीण सड़कों को चमकाने का फरमान सुना दिया है। तय किया गया है कि आयोजन से काफी पहले ही सड़क मरम्मत का काम पूरा हो जाएगा ताकि सफर बिना किसी हिचकोले के कटे। इसके साथ ही पूरे वैशाली में चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति का इंतजाम किया जा रहा है ताकि शाम ढलते ही पूरा इलाका रोशनी से जगमगा उठे। मौसम की नजाकत को देखते हुए मौके पर ही डॉक्टरों की पूरी टीम और आधुनिक मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे ताकि किसी भी भिक्षु या श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने पर फौरन इलाज मिल सके।
धूप की खुशबू के बीच श्लोक और शाम ढले हेरिटेज वॉक का सुकून
इन तीन दिनों में वैशाली की सुबहें आम दिनों जैसी नहीं होंगी। सुबह के सन्नाटे में जब पवित्र त्रिपिटक का सस्वर पाठ शुरू होगा, तो वातावरण में एक अलग ही शांति घुल जाएगी। दिन के वक्त देश-विदेश के 14 बड़े विद्वान बौद्ध दर्शन की आज की प्रासंगिकता पर बात करेंगे। दोपहर ढलते ही लोग इतिहास को करीब से महसूस करने के लिए हेरिटेज वॉक पर निकलेंगे, जहां स्तूपों और पुराने अवशेषों के बीच सदियों पुराना दौर आंखों के सामने तैरने लगेगा। रात में देशी-विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियां समां बांधेंगी। इसी परिसर में बिहार के हुनरमंद कारीगरों के लिए हस्तशिल्प बाजार भी सजेगा। मिथिला पेंटिंग से लेकर सुजनी और काष्ठ कला की कारीगरी देखकर विदेशी मेहमान बिहार की समृद्ध मिट्टी का हुनर अपने साथ लेकर लौटेंगे।
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