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Patna : “हमारा सीधा मकसद है कि बिहार के युवा रोजगार मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले उद्यमी बनें। राज्य के एक करोड़ परिवारों को उद्यमिता और आर्थिक स्वावलंबन से जोड़ना सरकार की पहली प्राथमिकता है।” पटना के बापू सभागार में जब सीएम सम्राट चौधरी ने ये बातें कहीं, तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। मौका था मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत चयनित लाभार्थियों के एक दिवसीय उन्मुखीकरण और किस्त वितरण समारोह का। दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए सीएम ने सीधे तौर पर यह संदेश दिया कि बिहार अब पलायन का दर्द भूलकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखने को तैयार है।
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के सपने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन को जमीन पर उतारने के लिए सरकार हर मोर्चे पर दिन-रात जुटी है। अगले पांच वर्षों में उद्योग, रोजगार, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और बिजली के क्षेत्र में ऐसे काम होंगे, जिनकी मिसाल पूरे देश में दी जाएगी। केंद्र सरकार ने देश भर में एमएसएमई क्षेत्र के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिसमें से कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा बिहार को मिलने की पूरी संभावना है।

हर जिले में एमएसएमई केंद्र, 45 हजार नए उद्यमी कर रहे शुरुआत
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना केवल सरकारी मदद का जरिया नहीं, बल्कि बिहार के युवाओं के हौसले को नई उड़ान देने का माध्यम बन गई है। इस योजना के जरिए एमएसएमई के माध्यम से 45,000 नए उद्यमी तैयार किए जा रहे हैं। इसमें हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। 14 हजार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, 10 हजार अतिपिछड़ा वर्ग, 9,500 महिलाएं, 9 हजार सामान्य युवा और 2,500 अल्पसंख्यक उद्यमी इसमें शामिल हैं। इसके लिए राज्य सरकार 3,500 करोड़ रुपये की बड़ी राशि खर्च कर रही है।
कार्यक्रम के दौरान सीएम सम्राट चौधरी ने 7 हजार से ज्यादा लाभार्थियों के बैंक खातों में योजना की किस्त सीधे ट्रांसफर की और चयनित उद्यमियों को सांकेतिक चेक सौंपे। सबसे खास बात यह रही कि अब नए कारोबारियों को मदद या मार्गदर्शन के लिए पटना की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। राज्य के सभी 38 जिलों में एमएसएमई केंद्र खोल दिए गए हैं, जिनका मुख्यमंत्री ने विधिवत उद्घाटन किया। साथ ही ‘बिहार एमएसएमई नीति 2026’, कलस्टर विकास योजना और सुविधा परिषद् नियमावली पर आधारित पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया गया।

लोकल फॉर वोकल : सरकारी खरीद में 40% तक हिस्सा बिहार के उत्पादों का
अक्सर छोटे उद्योगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि उत्पाद तैयार होने के बाद उसे खरीदार कहां मिलेगा। मुख्यमंत्री ने इसका भी ठोस समाधान पेश किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिहार में निर्मित उत्पादों को सरकारी खरीद में पूरी प्राथमिकता दी जाएगी।
परचेज प्रेफरेंस एक्ट के तहत सरकारी विभागों में होने वाली खरीद का 25 से 40 प्रतिशत सामान अनिवार्य रूप से बिहार की स्थानीय इकाइयों से ही खरीदा जाएगा। इससे न सिर्फ नए उद्यमियों को पक्का बाजार मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह भी बढ़ेगा। इससे पहले मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर उद्यमियों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का बारीकी से निरीक्षण किया और उत्पादों की गुणवत्ता व बाजार में उनकी मांग को लेकर युवाओं से खुलकर बातचीत की।

5 लाख करोड़ का निवेश, 20 हजार मेगावाट बिजली और गंगा पर रोपवे
बिहार में उद्योगों को बड़े पैमाने पर आकर्षित करने के लिए सरकार ने पीपीपी मोड यानी सार्वजनिक-निजी भागीदारी के जरिए 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाने का बड़ा लक्ष्य तय किया है। उद्योग तभी चल सकते हैं जब चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली मिले, इसलिए अगले पांच वर्षों में उद्योगों के लिए 20,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने पर तेजी से काम चल रहा है। वहीं ग्रामीण और कृषि क्षेत्र को राहत देने के लिए आगामी एक साल में सभी कृषि फीडरों को 100 प्रतिशत सौर ऊर्जा से जोड़ने की तैयारी है।
बुनियादी ढांचे की बात करते हुए सीएम ने कहा कि सड़कों, हाईवे और एक्सप्रेस-वे का नेटवर्क गांव-गांव तक पहुंच चुका है और पटना मेट्रो का सपना भी जमीन पर उतर रहा है। पर्यटन और आधुनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए अगले दो वर्षों में राज्य के 20 अहम स्थलों पर रोपवे बनाए जाएंगे। खास बात यह है कि पटना मरीन ड्राइव से सोनपुर के बीच गंगा के ऊपर रोपवे निर्माण के लिए एक निजी कंपनी ने उत्साह दिखाया है।

700 मॉडल स्कूलों में नीट-जेईई की कोचिंग, रात में भी पढ़ाई कर रहे बच्चे
उद्योग के साथ-साथ शिक्षा की नींव को मजबूत करने पर भी मुख्यमंत्री ने विशेष जोर दिया। राज्य में 700 स्थानों पर सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल खोले गए हैं, जहां छात्रों को नीट और जेईई जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त तैयारी कराई जा रही है।
‘विद्यार्थी साथी’ ऐप का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बच्चों को 24 घंटे ऑनलाइन ट्यूटर की सुविधा मिल रही है। छात्र देर रात तक ऐप के जरिए पढ़ाई में जुटे रहते हैं, जो बताता है कि बिहार की नई पीढ़ी कितनी लगनशील है। उच्च शिक्षा को गांव-कस्बों तक पहुंचाने के लिए 211 नए डिग्री कॉलेज खोले जा चुके हैं और अगले सत्र से इनमें विज्ञान संकाय की पढ़ाई भी शुरू की जाएगी।

समारोह में उद्योग सह खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमां खान, पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद, एससी-एसटी कल्याण मंत्री लखेन्द्र कुमार रौशन सहित उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार और अन्य वरीय अधिकारियों ने भी अपने विचार रखे। अंत में मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे बिहार की इस नई विकास यात्रा में कंधे से कंधा मिलाकर भागीदार बनें।
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