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Pakur (Jaydev Kumar) : संतोष हांसदा के चेहरे पर गहरी झुर्रियां हैं, लेकिन आज उनमें सबसे गहरी रेखा चिंता की है। कुछ ही दिन पहले तक उनके खेतों में धान की सुनहरी बालियां लहरा रही थीं। वह रोज शाम को खेत जाते और गर्व से कहते कि इस साल की फसल अच्छी होगी, बेटी की शादी की तैयारी कर लेंगे। लेकिन सोमवार की सुबह जब उन्होंने खेत देखा, तो सब कुछ खत्म हो चुका था। धान की बालियां जमीन पर बिछ गई थीं, पानी से लबालब खेत किसी जख्म की तरह दिख रहे थे।
मेहनत की कमाई एक रात में बह गई
सिर्फ संतोष नहीं, पाकुड़ जिले के सैंकड़ों किसानों की कहानी अब एक जैसी हो गई है। चक्रवात मोंथा से हुई तेज बारिश और आंधी ने छह प्रखंडों की फसलों को तहस-नहस कर दिया है। जिन खेतों में कुछ दिन पहले तक हरियाली थी, वहां अब कीचड़ और टूटी हुई बालियां पड़ी हैं। किसान किसी तरह गिरी हुई फसल को समेटने की कोशिश कर रहे हैं ताकि कुछ दाने घर तक पहुंच सकें। लेकिन कई जगह धान पूरी तरह सड़ गया है। किसान रवि मरांडी कहते हैं, “हमारे लिए धान सिर्फ फसल नहीं, जीवन का सहारा है। अब सब खत्म हो गया।”
बारिश के बाद खेतों में मायूसी, घरों में सन्नाटा
गांवों में इन दिनों अजीब सा सन्नाटा है। खेतों से लौटते किसान बिना कुछ बोले अपने आंगन में बैठ जाते हैं। महिलाएं भी चुप हैं। वे जानती हैं कि अब आने वाले दिनों में घर का चूल्हा जलाना मुश्किल होगा। जिन परिवारों ने फसल पर कर्ज लिया था, वे अब सबसे ज्यादा परेशान हैं। “बैंक का पैसा कैसे लौटाएं, बच्चों की पढ़ाई कैसे चलेगी, कुछ समझ नहीं आ रहा,” किसान मंगल टुडू की आंखें भर आती हैं।
प्रशासन सक्रिय, पर किसानों में संदेह
जिले के डीसी मनीष कुमार ने कृषि विभाग को नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि फसल बीमा और मुआवजे की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। लेकिन किसान अब भरोसा करने से डरते हैं। “हर बार नुकसान होता है, सर्वे होता है, पर मुआवजा कब मिलता है, पता नहीं,” एक वृद्ध किसान कहते हैं।
“धान ही जीने का आधार है”
झारखंड के अधिकांश किसान बारिश पर निर्भर हैं। उनके लिए धान सिर्फ अनाज नहीं, पूरे साल की उम्मीद है। मोंथा के कहर ने उस उम्मीद को गहरा घाव दिया है। फिर भी किसान टूटे नहीं हैं। संतोष हांसदा कहते हैं, “अभी सब खत्म लग रहा है, पर खेती छोड़ेंगे नहीं। खेत तो हमारे साथ जन्म से जुड़ा है।”
आसमान साफ होने की आस, पर मन में बादल बाकी हैं
पाकुड़ का आसमान अब धीरे-धीरे साफ हो रहा है, लेकिन किसानों के मन में बादल अब भी घिरे हैं। उन्हें उम्मीद है कि सरकार जल्दी मदद करेगी और उनके खेतों में फिर से हरियाली लौटेगी।
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