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Hazaribagh (Badkagaon) : सुबह की हल्की धुंध, कच्ची सड़क और हाथ में किताब। यही रोज का दृश्य था गोंदुलपारा और आसपास के गांवों के उन युवाओं का, जो सपने तो बड़े देखते थे लेकिन साधन सीमित थे। कई बार हालात ऐसे बने कि लगा अब पढ़ाई छूट जाएगी, नौकरी का सपना अधूरा रह जाएगा। लेकिन उसी गांव में शुरू हुई अदाणी फाउंडेशन की कोचिंग ने इन युवाओं को एक नई दिशा दे दी।
मेहनत, अनुशासन और भरोसे की पढ़ाई
गोंदुलपारा खनन परियोजना क्षेत्र में चल रहे इस कोचिंग सेंटर में पढ़ने वाले 17 छात्रों ने यह साबित कर दिया कि अगर सही मार्गदर्शन मिले तो हालात रास्ता नहीं रोक पाते। JSSC यानी झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन की कांस्टेबल भर्ती के फिजिकल टेस्ट में 13 छात्रों का सफल होना सिर्फ एक परीक्षा पास करना नहीं है, बल्कि सालों की मेहनत और टूटते हौसलों को फिर से जोड़ने की कहानी है।
किसी ने दौड़ में जीती जिंदगी, किसी ने पाया आत्मविश्वास
सुबह जल्दी उठकर दौड़ लगाना, शाम को पढ़ाई और बीच में घर के काम। अनीश कुमार, सागर कुमार, सूरज जायसवाल, निशांत कुमार पांडेय, संजय कुमार यादव और सुशांत कुमार जैसे युवाओं के लिये यह दिनचर्या आसान नहीं थी। कई छात्रों ने बताया कि पहले परिवार में ही सवाल उठते थे कि पढ़कर क्या होगा। लेकिन जब नाम सफलता की सूची में आया, तो वही घर सबसे पहले मिठाई लेकर आया। एक छात्र का टेरिटोरियल आर्मी की परीक्षा पास करना पूरे गांव के लिए मिसाल बन गया।
बेटियों ने तोड़ी झिझक, बनी गांव की शान
इस कहानी का सबसे खूबसूरत पहलू बेटियों की भागीदारी है। पम्मी कुमारी, पल्लवी सिन्हा, पूजा कुमारी और अंजुम प्रवीण जैसी छात्राओं ने न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि गांव की उन लड़कियों के लिए रास्ता खोला जो घर से बाहर निकलने में भी हिचकती थीं। अब वही बेटियां दूसरों को कहती हैं कि कोशिश किए बिना हार मत मानो।

सुविधाएं नहीं, भरोसा सबसे बड़ी ताकत
अदाणी फाउंडेशन की इस कोचिंग में छात्रों को किताबें, यूनिफॉर्म और पौष्टिक नाश्ता तो मिला ही, उससे ज्यादा मिला भरोसा। शिक्षकों ने उन्हें सिर्फ परीक्षा की तैयारी नहीं कराई, बल्कि यह यकीन भी दिलाया कि वे कर सकते हैं। यही भरोसा उनकी सबसे बड़ी पूंजी बन गया।
सफलता से बदला माहौल
इस साल की शुरुआत में भी इसी कोचिंग से तीन छात्र भारतीय सेना के लिए चयनित हुए थे। अब नई सफलता ने पूरे इलाके का माहौल बदल दिया है। जिन घरों में कभी नौकरी की बात पर चुप्पी छा जाती थी, वहां अब भविष्य की योजनाओं पर चर्चा होती है।
उम्मीद का नाम बनती पहल
बड़कागांव क्षेत्र में अदाणी फाउंडेशन की शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी पहल अब सिर्फ योजनाएं नहीं रहीं। ये उन चेहरों में दिखती हैं, जिनकी आंखों में आत्मविश्वास है और कदमों में मजबूती। गांव की गलियों से निकलकर वर्दी तक पहुंचने की यह कहानी बताती है कि अगर मौका मिले, तो सपने गांवों में भी पूरे होते हैं।

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