अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : किसी भी समाज की असली पहचान उसके बच्चों से होती है। जब बचपन किताबों और सपनों की जगह जिम्मेदारियों में उलझ जाए, तो वह सिर्फ एक परिवार की नहीं, पूरे समाज की हार होती है। इसी सोच के साथ बुंडू प्रखंड के पीपीके कॉलेज परिसर में बाल विवाह के खिलाफ एक संवेदनशील और जागरूकता से भरा कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां कानून के साथ मानवीय सरोकार भी केंद्र में रहे।
कानून से आगे इंसानियत की बात
झालसा के निर्देश और अध्यक्ष सह न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यक्रम नालसा द्वारा संचालित आशा अभियान के तहत 100 दिवसीय कार्रवाई का हिस्सा था। तीसरे दिन का यह आयोजन सिर्फ औपचारिक भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों के भविष्य को लेकर गहरी चिंता और संवाद का मंच बना।
“बाल विवाह बच्चों के लिए अभिशाप है”
डिप्टी LADC कविता कुमारी खाती ने बेहद सहज शब्दों में बाल विवाह की सच्चाई सामने रखी। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के का विवाह कानूनन अपराध है, लेकिन इससे भी बड़ा अपराध बच्चों के सपनों को कुचल देना है। कम उम्र में शादी से पढ़ाई छूट जाती है, आत्मनिर्भर बनने का रास्ता बंद हो जाता है और घरेलू हिंसा व शोषण का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि कम उम्र की गर्भावस्था मां और बच्चे दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है, जिसकी भरपाई जीवन भर नहीं हो पाती।

समाधान की ओर बढ़ता कदम
डिप्टी LADC कविता कुमारी खाती ने केवल समस्या नहीं बताई, बल्कि समाधान का रास्ता भी दिखाया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह रोकने के लिए समाज को जागरूक होना होगा, लड़कियों की शिक्षा को प्राथमिकता देनी होगी और कानून का सख्ती से पालन करना होगा। जरूरत पड़ने पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और टॉल फ्री नंबर 15100 पर तुरंत मदद ली जा सकती है।
छात्रों ने उठाए सामाजिक मुद्दे
कार्यक्रम में विधि के छात्र छात्राओं ने डायन प्रथा, बाल श्रम, बाल अपराध और घरेलू हिंसा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अपनी बात रखी। युवाओं की यह पहल बताती है कि बदलाव की शुरुआत अब नई पीढ़ी के हाथों में है।
मदद के दरवाजे खुले हैं
पीएलवी डॉ अनिल कुमार वर्मा ने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार की कई योजनाएं जरूरतमंदों के लिए मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि हर प्रखंड, पंचायत और अस्पताल में पीएलवी तैनात हैं, जहां से नि:शुल्क कानूनी मदद ली जा सकती है।

न्याय और सम्मान की जानकारी
डालसा की पीएलवी सोनामनी देवी ने विधवा पेंशन, वृद्धा पेंशन और प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी दी। रूकमनी देवी और प्रदुमन प्रमाणिक ने लोक अदालत और मध्यस्थता की प्रक्रिया समझाई। सोहेब अंसारी और बिमला कुमारी ने पीड़ित मुआवजा योजना के बारे में बताया, जबकि संध्या कुमारी और दिलखुश महतो ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार रांची की भूमिका से लोगों को अवगत कराया।
एक छोटी पहल, बड़ा संदेश
पीपीके कॉलेज का यह आयोजन याद दिलाता है कि बाल विवाह रोकना सिर्फ कानून की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब सही जानकारी, संवेदना और समय पर मदद मिलती है, तब बचपन बचाया जा सकता है और भविष्य को रोशन किया जा सकता है।
इसे भी पढ़ें : DLSA बना ‘ऑक्सीजन’, दम तोड़ते 51 रिश्तों में फूंक डाला नयी जान

