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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : कॉलेज के भूगोल विभाग का वो कमरा, जहां मेज पर फैले नक्शे, ग्लोब और रिसर्च के पन्नों के बीच अक्सर एक चेहरा घंटों मशक्कत करता दिखता है। चितरपुर कॉलेज, रामगढ़ में भूगोल की सहायक प्राध्यापक ज्योति कुमारी के लिए यह रोज का काम था, लेकिन उनकी इसी खामोश मेहनत ने अब राष्ट्रीय मंच पर अपनी गूंज सुनाई है। शिक्षा और शोध की दुनिया में उनके लगातार काम को पहचानते हुए उन्हें प्रतिष्ठित ‘शैक्षणिक अनुसंधान पुरस्कार 2026’ से सम्मानित किया गया है। जब यह खबर रामगढ़ पहुंची, तो कॉलेज के गलियारों से लेकर जिले के अकादमिक हलकों तक हर चेहरे पर गर्व की चमक साफ देखी जा सकती थी।
गया के मंच पर गूंजा चितरपुर कॉलेज का नाम
यह सम्मान बिहार के गया स्थित बजौरा के संत ‘मालिक’ मेमोरियल इंस्टीट्यूट (बीएड कॉलेज) में आयोजित बहुविषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी के मंच पर दिया गया। इस आयोजन की खास बात यह रही कि इसमें टर्टल फाउंडेशन फॉर रिसर्च एंड एजुकेशन ट्रस्ट (टीएफआरई) रामगढ़ का भी अहम सहयोग था। सेमिनार का केंद्र था कि आने वाले वक्त में शिक्षकों की पढ़ाई और ट्रेनिंग को कैसे बदला जाए, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नए प्रयोग और सबको साथ लेकर चलने वाली शिक्षा को जोड़ा जा सके। देश भर से जुटे शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं की मौजूदगी में जब ज्योति कुमारी को मंच पर बुलाया गया, तो वह पल चितरपुर कॉलेज की अकादमिक यात्रा के लिए भी एक मील का पत्थर बन गया।
क्लासरूम से लैब तक, शोध को बनाया अपनी ताकत
अक्सर छोटे शहरों या कस्बों के कॉलेजों को लेकर धारणा होती है कि वहां सिर्फ इम्तिहान पास करने की पढ़ाई होती है। ज्योति कुमारी ने इस सोच को अपनी मेहनत से तोड़ा है। उन्होंने भूगोल जैसे विषय को केवल किताबों और चारदीवारी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अपने शोध कार्यों के जरिए छात्रों को नए नजरिए से सोचना सिखाया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके इसी सक्रिय जुड़ाव, निरंतर अध्ययन और लीक से हटकर किए गए रिसर्च ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। कार्यक्रम में मौजूद जानकारों ने भी माना कि जमीनी स्तर पर रहकर इस तरह का अकादमिक काम करना सचमुच प्रेरणा देने वाला है।
सहकर्मियों में उत्साह, बोले- यह हम सबकी साझी जीत
जैसे ही पुरस्कार की तस्वीर और खबर चितरपुर कॉलेज पहुंची, परिसर में खुशी की लहर दौड़ गई। साथी शिक्षकों और कर्मचारियों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया और ज्योति कुमारी को ढेरों बधाइयां दीं। उनके सहकर्मियों का कहना है कि ज्योति हमेशा से अपने काम के प्रति बेहद गंभीर रही हैं और उनका यह सम्मान केवल एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि पूरे संस्थान और रामगढ़ के उन तमाम युवाओं के लिए एक हौसला है जो शोध और उच्च शिक्षा की राह चुनना चाहते हैं। ज्योति कुमारी के लिए यह पुरस्कार एक पड़ाव भर है, क्योंकि उनकी नजर अब आने वाले दिनों में अपने शोध को और व्यापक बनाने पर टिकी है।
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