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Dumka : रविवार की शाम सफारुद्दीन मियां रोज़ की तरह ई-रिक्शा लेकर निकले थे। उनका कसूर सिर्फ इतना था कि वे रोज़ी-रोटी के लिए सवारी ढोते थे और उसी क्रम में कुछ लोगों को थाना छोड़ने जा रहे थे। लेकिन दो पक्षों के बीच चल रहे पुराने जमीन विवाद ने उनकी जिंदगी छीन ली। न उनका उस झगड़े से कोई लेना-देना था, न कोई पक्षधरता, फिर भी वो हिंसा का शिकार हो गये।
घटना शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र के शिमला ढाका गांव की है। गांव में लंबे समय से जमीन को लेकर दो पक्षों में तनाव था। रविवार को एक पक्ष के कुछ लोग सफारुद्दीन के ई-रिक्शा से थाना जा रहे थे। रास्ते में दूसरे पक्ष के लोगों ने ई-रिक्शा रोक लिया। आरोप है कि उन्होंने चालक पर एक पक्ष का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए पहले गाली-गलौज की, फिर देखते ही देखते लाठी-डंडे और घूंसे चलने लगे।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, सफारुद्दीन बार-बार हाथ जोड़कर खुद को निर्दोष बताते रहे। वे कहते रहे कि उनका विवाद से कोई संबंध नहीं है, वे सिर्फ सवारी पहुंचा रहे हैं। लेकिन भीड़ के गुस्से के आगे उनकी एक न चली। गंभीर पिटाई में वे वहीं सड़क पर गिर पड़े।
दौड़ती रही एंबुलेंस, थम गई सांसें
लहूलुहान हालत में सफारुद्दीन को पहले शिकारीपाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। हालत नाजुक देख डॉक्टरों ने उन्हें दुमका मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। वहां से बेहतर इलाज के लिए वर्धमान भेजा गया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
सोमवार को जब उनका शव गांव पहुंचा, तो माहौल गम और गुस्से से भर उठा। छह बेटियों के पिता की अर्थी देखकर गांव की महिलाएं रो पड़ीं। परिवार के सामने सवाल खड़ा था… अब घर कैसे चलेगा?
सड़क पर उतरा आक्रोश
परिजनों और ग्रामीणों ने शव को शिकारीपाड़ा थाना के पास चौक पर रखकर दुमका-रामपुरहाट मुख्य मार्ग (एनएच-114A) जाम कर दिया। घंटों तक सड़क पर सन्नाटा और नारों की गूंज रही। मांग साफ थी हत्या में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को मुआवजा।
मृतक के रिश्तेदार मोइन अंसारी ने कहा, “सफारुद्दीन गरीब था, मेहनत करके परिवार पालता था। छह बेटियां हैं उसकी। दो लोगों की लड़ाई में नाहक उसे मार दिया गया।”
FIR दर्ज, तलाश जारी
सूचना मिलने पर थानेदार अमित लकड़ा मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि छह नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें से दो को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाकी की तलाश जारी है। प्रशासन की ओर से मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करने का भरोसा भी दिया गया।
श्रद्धालु भी फंसे
जाम के कारण दुमका-रामपुरहाट मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। तारापीठ जा रहे श्रद्धालुओं के वाहन घंटों फंसे रहे। मगर सबसे बड़ा जाम उस घर में था, जहां कमाने वाला चला गया और मासूम बेटियां भविष्य की राह ताकती रह गईं।

