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Ranchi (Rudra Ranjeet) : शनिवार की दोपहर थी और अनगड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हलचल का माहौल था। गांव के लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों के साथ स्वास्थ्य मेले में पहुंचे, जहां स्वास्थ्य विभाग और द हंस फाउंडेशन की टीम ने टीबी जांच, टीकाकरण, एएनसी-पॉस्ट-नेटल सेवाएं और कुपोषण उपचार केंद्र (MTC) की सेवाएं उपलब्ध कराई थीं।
टीबी जांच और जागरूकता का महत्व
सुरभि कुमारी, जो अपने तीन साल के बेटे के साथ आई थीं, कहती हैं, “ऐसे मेले हमें यह समझने का मौका देते हैं कि छोटी-छोटी बीमारियां भी समय पर पकड़ में आ सकती हैं। टीबी जांच और बच्चों का टीकाकरण बहुत जरूरी है।” उनके चेहरे पर संतोष की झलक थी, जब उन्होंने अपने बच्चे का टीकाकरण कराते देखा।

कुपोषण रोकने की पहल
अनगड़ा क्षेत्र में कुपोषण की समस्या लंबे समय से गंभीर रही है। इस पहल का नेतृत्व कर रहे द हंस फाउंडेशन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि MTC स्टॉल पर आने वाले बच्चों का वजन, विकास और पोषण स्तर जांचा जाता है। एक अधिकारी ने बताया “हमारा उद्देश्य केवल इलाज नहीं, बल्कि माता-पिता को जागरूक करना भी है ताकि बच्चे स्वस्थ बढ़ें।”
स्थानीय लोगों की भागीदारी ने बढ़ाया उत्साह
मेला स्थल पर बच्चे खेलते, बूढ़े बातें करते और युवा स्वास्थ्य स्टॉल्स के पास अपने सवाल पूछते नजर आए। स्थानीय महिला, निर्मला देवी कहती हैं, “पहली बार मुझे लगा कि हमारे क्षेत्र में भी हमारे स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जा रहा है। हमें अपने बच्चों के पोषण और टीकाकरण के बारे में पता चला।”

स्वास्थ्य के प्रति नई जागरूकता
स्वास्थ्य मेले ने न केवल लोगों को सेवाएं दीं, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी किया। सरकारी अधिकारी और द हंस फाउंडेशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने स्टॉल का निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी जरूरतों को समझा। मेले की सबसे बड़ी सफलता यही रही कि स्थानीय लोगों ने इसे अपना माना। जहां पहले स्वास्थ्य सेवाएं दूर और मुश्किल लगती थीं, वहीं अब उन्हें अपने क्षेत्र में ही विशेषज्ञ और जांच की सुविधा मिल रही है।

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