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Ranchi : JSSC यानी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की सीजीएल परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में CID को बड़ी कामयाबी मिली है। मामले की जांच में जुटी CID की टीम ने शुक्रवार को एक अहम आरोपित को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपित की पहचान मिथिलेश कुमार पांडेय के रूप में की गई है, जो बोकारो जिले के हरला इलाके का रहने वाला है। सीआईडी की टीम अब उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ करने में जुटी है, जिससे इस सिंडिकेट से जुड़े कई और राज सामने आने की उम्मीद है।
प्रिंटिंग प्रेस संचालक का निकला बेहद करीबी
CID के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पकड़ा गया मिथिलेश पांडेय सीधे तौर पर उस प्रिंटिंग प्रेस से जुड़ा था, जहां परीक्षा के प्रश्नपत्र छपे थे। वह प्रश्नपत्र छापने वाली एजेंसी के संचालक मिथिलेश सिंह का बेहद करीबी माना जाता है। जांच एजेंसियों को लंबे समय से इस बात का शक था कि प्रश्नपत्र प्रिंटिंग प्रेस के स्तर से ही लीक हुआ था। ऐसे में मिथिलेश पांडेय की गिरफ्तारी को जांच टीम के लिए एक मजबूत कड़ी माना जा रहा है, जो सीधे मुख्य सूत्रधार तक रास्ता खोल सकती है।
अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर बांटे थे जवाब
शुरुआती जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि मिथिलेश पांडेय परीक्षा से पहले कई अभ्यर्थियों के संपर्क में था। उसने अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली और बदले में उन्हें परीक्षा से पहले ही प्रश्नों के उत्तर मुहैया कराए। जांच टीम अब उन सभी अभ्यर्थियों और बिचौलियों की लिस्ट तैयार कर रही है, जिनके संपर्क में वह परीक्षा के दौरान था। सीआईडी के अधिकारी उसके बैंक खातों और मोबाइल कॉल डिटेल्स को खंगाल रहे हैं, ताकि पैसों के लेन-देन का पूरा नेटवर्क सामने आ सके।
पूछताछ में खुल सकते हैं सिंडिकेट के कई बड़े राज
गिरफ्तारी के बाद सीआईडी की टीम मिथिलेश पांडेय से गुप्त ठिकाने पर कड़ी पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि उसके साथ इस पूरे खेल में और कौन-कौन से लोग शामिल थे और अब तक कितने उम्मीदवारों तक हल किए गए प्रश्नपत्र पहुंचाए गए थे। अधिकारियों का मानना है कि उससे मिलने वाली जानकारी के आधार पर आने वाले दिनों में बोकारो और राज्य के अन्य जिलों से कुछ और सफेदपोशों और दलालों की गिरफ्तारी हो सकती है।
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