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Ranchi : क्रिकेट सिर्फ बड़े मैदानों और बड़े खिलाड़ियों का खेल नहीं है… रांची में खेले गए अंडर-12 आरएसए किड्स प्रीमियर लीग के फाइनल ने यह बात एक बार फिर साबित कर दी। छोटे-छोटे बच्चों ने जिस आत्मविश्वास, अनुशासन और जोश के साथ मैदान पर प्रदर्शन किया, उसने हर किसी को प्रभावित कर दिया। मैदान में चौकों-छक्कों की गूंज थी, विकेट गिरने पर उत्साह था और हर रन के साथ खिलाड़ियों के चेहरे पर जीत का सपना साफ नजर आ रहा था। फाइनल मुकाबले में आरएसए येलो ने शानदार खेल दिखाते हुए आरएसए ग्रीन को 68 रन से हराकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली। लेकिन यह मुकाबला सिर्फ जीत और हार तक सीमित नहीं रहा। यह उन बच्चों के सपनों, मेहनत और क्रिकेट के प्रति जुनून की कहानी बन गया, जो आने वाले समय में बड़े मंचों पर दिखाई दे सकते हैं।
शुरुआत से ही आक्रामक दिखी येलो टीम
टॉस हारने के बाद जब आरएसए येलो बल्लेबाजी के लिए मैदान पर उतरी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि टीम इतना बड़ा स्कोर खड़ा कर देगी। लेकिन बच्चों ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। हर खिलाड़ी खुलकर शॉट खेलता नजर आया। मैदान के चारों ओर रन बटोरने की कोशिश साफ दिखाई दे रही थी। खास तौर पर नमिश रंजन ने अपनी बल्लेबाजी से सभी का ध्यान खींच लिया। उन्होंने बेहतरीन टाइमिंग और आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी करते हुए 52 रन बनाए। उनकी पारी में कई आकर्षक शॉट देखने को मिले। दर्शक दीर्घा में बैठे अभिभावक हर चौके पर तालियां बजाते नजर आए। वहीं आरिज ने 21 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। 15 ओवर में 177 रन का स्कोर खड़ा होते ही येलो टीम के खिलाड़ियों के चेहरे पर आत्मविश्वास साफ दिखाई देने लगा।
कप्तान स्नेह सृजन ने अकेले संभाला मोर्चा
जब आरएसए ग्रीन लक्ष्य का पीछा करने उतरी, तब टीम पर दबाव साफ नजर आ रहा था। बड़े लक्ष्य के सामने शुरुआत संभलकर करनी जरूरी थी, लेकिन शुरुआती विकेटों ने टीम को मुश्किल में डाल दिया। ऐसे समय में कप्तान स्नेह सृजन ने जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने धैर्य और समझदारी के साथ बल्लेबाजी की। मैदान में मौजूद लोग उनकी बल्लेबाजी की तारीफ करते नजर आए। उन्होंने 34 रन बनाकर टीम को मुकाबले में बनाए रखने की पूरी कोशिश की। लेकिन जैसे ही उनका विकेट गिरा, मैच का रुख पूरी तरह बदल गया। इसके बाद विकेटों का सिलसिला शुरू हो गया और टीम संभल नहीं सकी। येलो टीम के गेंदबाजों ने लगातार दबाव बनाए रखा और आखिरकार मुकाबला अपने नाम कर लिया।

मैदान में दिखा खेल भावना का खूबसूरत नजारा
फाइनल मुकाबले के दौरान सिर्फ प्रतिस्पर्धा ही नहीं, खेल भावना भी देखने को मिली। विकेट गिरने पर खिलाड़ी एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते नजर आए। मैच खत्म होने के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाकर खेल भावना का शानदार उदाहरण पेश किया। अभिभावकों और कोचों के चेहरों पर भी गर्व साफ दिखाई दे रहा था। कई अभिभावक अपने बच्चों का वीडियो बनाते और उनकी तस्वीरें लेते नजर आए। बच्चों के लिए यह पल किसी बड़े सपने के सच होने जैसा था।
पुरस्कार मिलने पर खिल उठे बच्चों के चेहरे
फाइनल मुकाबले के बाद आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में माहौल बेहद उत्साहपूर्ण रहा। मुख्य अतिथि आजसू पार्टी के मोसिन खान और विशेष अतिथि सिया शंकर सिंह ने विजेता और उपविजेता टीम को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया। जब आरएसए येलो के खिलाड़ियों ने ट्रॉफी उठाई, तब पूरा मैदान तालियों से गूंज उठा। बच्चों की खुशी देखने लायक थी। पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाले आरएसए ग्रीन के कप्तान स्नेह सृजन को मैन ऑफ द सीरीज और बेस्ट बैट्समैन का पुरस्कार दिया गया। फाइनल में दमदार अर्धशतक लगाने वाले नमिश रंजन को मैन ऑफ द मैच चुना गया। इसके अलावा अर्णव राज को बेस्ट बॉलर और मोहम्मद तल्हा को बेस्ट फील्डर का अवॉर्ड मिला।
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