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Ranchi : कभी जिज्ञासा, कभी दोस्तों का दबाव, तो कभी गलत संगत… यही वे रास्ते हैं जहां से कई युवा अनजाने में नशे की दुनिया में कदम रख देते हैं। लेकिन रांची में आयोजित एक कार्यक्रम ने सैकड़ों छात्रों को यह समझाया कि जिंदगी की असली ताकत “ना” कहने में है। झारखंड रक्षा शक्ति यूनिवर्सिटी, गोस्सनर कॉलेज और संत जेवियर स्कूल में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में जब छात्र-छात्राएं बैठे थे, तो कई चेहरों पर उत्सुकता थी, कुछ पर झिझक, और कुछ ऐसे भी थे जो शायद भीतर ही भीतर किसी सवाल से जूझ रहे थे। यह पहल राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की ‘डॉन’ योजना के तहत की गई, लेकिन यह सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था—यह जिंदगी को समझने का एक आईना बन गया।
“नशा सिर्फ आदत नहीं, एक धीरे-धीरे खत्म होती जिंदगी है”
कार्यक्रम में जब एलएडीसीएस चीफ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने बोलना शुरू किया, तो माहौल गंभीर हो गया। उन्होंने सरल शब्दों में समझाया कि संविधान भी चाहता है कि लोग नशे से दूर रहें। उन्होंने बताया कि अफीम और पोस्ता जैसी चीजें सिर्फ कानूनन अपराध ही नहीं, बल्कि जीवन को बर्बाद करने वाली जड़ हैं। एनडीपीएस अधिनियम 1985 के तहत सख्त सजा का जिक्र करते हुए उन्होंने छात्रों को चेताया… “एक गलती, और जिंदगी पटरी से उतर सकती है।”

वो खामोशी, जो बहुत कुछ कह गई
कार्यक्रम के दौरान एक पल ऐसा भी आया जब छात्रों से पूछा गया… “क्या आपने कभी किसी को नशे में बर्बाद होते देखा है?” हाल में कुछ हाथ उठे, लेकिन ज्यादातर छात्र चुप रहे। उस खामोशी में कई कहानियां छिपी थीं… किसी का पड़ोसी, किसी का दोस्त, तो किसी का अपना।
“नशा तन-मन-धन सब छीन लेता है”
कविता खाती ने जब यह कहा, तो कई छात्र सिर हिलाते नजर आए। उन्होंने बताया कि नशा धीरे-धीरे इंसान से उसकी पहचान छीन लेता है। पढ़ाई छूट जाती है, परिवार टूट जाता है और अंत में व्यक्ति अकेला रह जाता है।
इलाज है, उम्मीद भी है
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि अगर कोई नशे की गिरफ्त में आ चुका है, तो उसके लिए रास्ते बंद नहीं होते। रांची के कांके स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री और रिनपास जैसे संस्थानों में इलाज की सुविधा है। यहां जिला विधिक सेवा प्राधिकार की मदद से मुफ्त कानूनी और चिकित्सा सहायता भी मिलती है। यह संदेश खास था… “गिरना अंत नहीं, संभलना जरूरी है।”
नशे का जाल और युवाओं पर खतरा
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया कि ड्रग्स तस्कर सबसे ज्यादा युवाओं को निशाना बनाते हैं। वे लालच देते हैं, दोस्ती का दिखावा करते हैं और धीरे-धीरे उन्हें इस धंधे में धकेल देते हैं। सीआईडी अधिकारियों ने यह भी बताया कि आजकल सामान्य खांसी की सिरप जैसी दवाओं का भी गलत इस्तेमाल हो रहा है… जो खतरे की घंटी है।
एक नंबर, जो बदल सकता है जिंदगी
कार्यक्रम में छात्रों को बताया गया कि अगर उन्हें कहीं भी नशे से जुड़ी कोई समस्या दिखे या खुद मदद की जरूरत हो, तो वे नालसा के टोल फ्री नंबर 15100 या मानस हेल्पलाइन 1933 पर संपर्क कर सकते हैं।
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