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Bhubaneswar/Romania : जब इरादे नेक हों और काम जमीन से जुड़ा हो, तो उसकी गूंज सात समंदर पार भी सुनाई देती है। ओडिशा की धरती से शुरू हुआ शिक्षा और समाज सेवा का एक मिशन आज पूरी दुनिया में मिसाल बन चुका है। कीट (KIIT), कीस (KISS) और कीम्स (KIMS) जैसी संस्थाओं की नींव रखकर हजारों गरीब और आदिवासी बच्चों की जिंदगी संवारने वाले डॉ. अच्युत सामंत को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक साथ कई बड़े सम्मानों से नवाजा गया है। यूरोप के खूबसूरत देश रोमानिया के मिलिशाउत्सी नगर ने उन्हें अपनी मानद नागरिकता देकर अपना बना लिया है, वहीं बर्लाद शहर ने अपने नगर की चाबी सौंपकर उनके काम को सलाम किया है।
यूरोप की सदियों पुरानी परंपरा और नगर की चाबी का मान
रोमानिया में मानद नागरिकता पाना किसी भी शहर की तरफ से दिया जाने वाला सबसे बड़ा आदर माना जाता है। लेकिन बर्लाद नगर पालिका ने जो सम्मान दिया, वह भावनात्मक रूप से और भी गहरा है। यूरोपीय इतिहास में ‘की टू द सिटी’ यानी शहर की चाबी सौंपने की परंपरा सदियों पुरानी है। पुराने दौर में शहर चारों तरफ से दीवारों और मजबूत दरवाजों से घिरे होते थे। ऐसे में किसी बाहरी व्यक्ति को शहर की चाबी सौंपने का सीधा मतलब यह होता था कि पूरे शहर के लोग उस इंसान पर अपनी आंखें मूंदकर भरोसा करते हैं। बर्लाद ने ठीक यही भरोसा डॉ. सामंत पर जताया। रोमानिया में भारत के राजदूत डॉ. मनोज कुमार मोहापात्रा के साथ जब डॉ. सामंत वहां पहुंचे, तो स्थानीय लोगों ने पलक-पावड़े बिछा दिए। डॉ. सामंत ने बेहद भावुक होकर कहा कि रोमानिया के इन दोनों शहरों से जो आत्मीयता और प्यार मिला है, वह ताउम्र उनके दिल में महकता रहेगा।
लीडरशिप की मिसाल और शतरंज की बिसात पर नई चाल
रोमानिया के नागरिक सम्मान के साथ-साथ डॉ. सामंत की नेतृत्व क्षमता को वैश्विक मैनेजमेंट बिरादरी ने भी सराहा। स्लोवेनिया की जानी-मानी अंतरराष्ट्रीय संस्था सीमैन (CEEMAN) ने अपनी 34वीं सालाना कॉन्फ्रेंस में उन्हें ‘लीडर ऑफ द ईयर’ चुना। दुनिया के 50 देशों के करीब 180 संस्थान इस मंच से जुड़े हैं, जहां एक भारतीय शिक्षक और समाज सुधारक के काम का लोहा माना गया।
बात सिर्फ क्लासरूम या किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि खेल के मैदान तक पहुंची। उज्बेकिस्तान में हुए 46वें शतरंज ओलंपियाड के दौरान विश्व शतरंज महासंघ (FIDE) ने डॉ. सामंत को ‘एजुकेशन फिलैंथ्रोपिक अवॉर्ड’ से नवाजा। 120 देशों के प्रतिनिधियों के सामने भारत के दिग्गज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने यह सम्मान मंच से दिया। इस मौके पर एक और बड़ा कदम उठाया गया, जहां फिडे और कीट-कीस के बीच हाथ मिलाया गया ताकि पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ शतरंज की समझ को भी जमीनी स्तर पर हर बच्चे तक पहुंचाया जा सके।
कोसोवो में मदर टेरेसा अवॉर्ड और चार नए मुकाम
यूरोप के सफर में सम्मान की यह कड़ी कोसोवो गणराज्य की राजधानी प्रिस्टिना तक जा पहुंची। यहां आयोजित 45वें वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ पोएट्स के मंच पर डॉ. अच्युत सामंत के नाम का डंका बजा। उन्हें मानवता की सेवा के लिए प्रतिष्ठित ‘मदर टेरेसा अवॉर्ड’ दिया गया। इसके अलावा वहां के एएबी यूनिवर्सिटी कॉलेज ने उन्हें ‘प्रोफेसर ऑनोरिस कॉसा’ की उपाधि दी, पेजा शहर ने विशेष सम्मान सौंपा और वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ पोएट्स के अध्यक्ष ने अपना पदक पहनाकर उनकी सेवाओं का आदर किया। एक ही दौरे में इतने सारे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित होकर डॉ. सामंत ने साबित कर दिया कि निस्वार्थ सेवा की कोई सीमा नहीं होती।
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