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Home » वैज्ञानिकों का बड़ा दावा : इस पिरामिड के नीचे विशाल प्राचीन भूमिगत शहर
दुनिया

वैज्ञानिकों का बड़ा दावा : इस पिरामिड के नीचे विशाल प्राचीन भूमिगत शहर

July 12, 2025No Comments3 Mins Read
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वैज्ञानिकों
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News Samvad : मिस्र के रहस्यमयी पिरामिडों को लेकर अब एक नई और चौंकाने वाली थ्योरी सामने आई है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि गीज़ा के पिरामिडों के नीचे एक बेहद विशाल और प्राचीन भूमिगत शहर छिपा हुआ है, जो न सिर्फ मिस्र के इतिहास को चुनौती देता है, बल्कि मानव सभ्यता की उत्पत्ति को लेकर भी कई सवाल खड़े करता है।

नई खोजों से मचा हड़कंप

इस साल की शुरुआत में दो प्रमुख वैज्ञानिकों ने खुलासा किया था कि उन्हें खाफ्रे पिरामिड के नीचे बड़े-बड़े कमरे और टावर जैसी संरचनाएं मिली हैं। अब उन्होंने फिनिक्स पिरामिड के नीचे गहरे कमरे और एक लंबा, खड़ा रास्ता खोजने का दावा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन सुरंगों और कमरों की बनावट इस ओर इशारा करती है कि ये किसी प्राचीन भूमिगत शहर का हिस्सा हो सकते हैं।

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सोनार स्कैन से मिले संकेत

उत्तर कैरोलिना में हुए एक कॉस्मिक सम्मेलन में वैज्ञानिकों ने अपने स्कैन के परिणामों को सार्वजनिक करते हुए बताया कि गीज़ा पठार के नीचे एक बड़े भूमिगत परिसर के संकेत मिले हैं। सोनार स्कैन से यह भी पता चला कि स्फिंक्स के नीचे एक सर्पिल सीढ़ी है, जो दो बड़े वर्गाकार कमरों तक जाती है – एक 2000 वर्ग फुट का और दूसरा 4000 वर्ग फुट का। इसके अलावा, पिरामिड के नीचे बेलनाकार आकार की आठ विशाल संरचनाएं भी मिली हैं।

इतिहास बदलने की कगार पर

वैज्ञानिकों का यह भी दावा है कि इन संरचनाओं की निर्माण शैली और तकनीक पिरामिड युग से भी पहले की हो सकती है। मिस्र विशेषज्ञ अर्मांडो मेई का कहना है कि ये निर्माण करीब 36400 ईसा पूर्व के हैं, जो मानव इतिहास की अब तक की जानकारी से कहीं अधिक पुराने हैं।

क्या था पहले का दावा?

मार्च 2025 में इटली और स्कॉटलैंड के वैज्ञानिकों ने कहा था कि उनके अनुसार पिरामिडों के नीचे एक ऐसा शहर मौजूद था, जो पिरामिडों से 10 गुना बड़ा था। उन्होंने 2100 फुट की गहराई में बेलनाकार स्तंभों की खोज की थी और अंदेशा जताया था कि 4000 फुट नीचे और भी अज्ञात संरचनाएं मौजूद हैं।

अगर साबित हुआ तो इतिहास बदल जाएगा

अगर ये दावे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो जाते हैं, तो मिस्र के पिरामिडों की कहानी पूरी तरह बदल जाएगी। माना जा रहा है कि 12 हजार साल पहले एक क्षुद्रग्रह के टकराव से आई भयानक बाढ़ ने इस प्राचीन शहर को दफना दिया था। यह खोज मानव सभ्यता के विकास और प्राचीन तकनीक के बारे में सोचने का नजरिया ही बदल सकती है।

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