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News Samvad : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सोमवार को वैश्विक कच्चे तेल बाजार को बड़ी राहत मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर प्रस्तावित बड़े सैन्य हमले को फिलहाल टालने और बातचीत का रास्ता अपनाने का फैसला किया। इस फैसले का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखा और ब्रेंट क्रूड तथा डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों में 4 से 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को बाजार खुलते ही ब्रेंट क्रूड 4 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 84 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 5 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर 81 डॉलर प्रति बैरल के नीचे कारोबार करने लगा। निवेशकों ने इसे इस संकेत के रूप में देखा कि पश्चिम एशिया में बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका फिलहाल कम हुई है और वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडरा रहा खतरा भी टल सकता है।
बातचीत की उम्मीद से बाजार में लौटा भरोसा
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब सहित कई सहयोगी देशों ने सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देने की सलाह दी थी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा सामान्य तरीके से खोलने की दिशा में जल्द प्रगति होती है, तो कूटनीतिक प्रयास जारी रहेंगे। इस बयान के बाद बाजार में सकारात्मक माहौल बना। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। जुलाई महीने में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जिससे साफ है कि तेल बाजार अभी भी बेहद संवेदनशील बना हुआ है और किसी भी नई घटना का असर तुरंत कीमतों पर पड़ सकता है।
तनाव पूरी तरह खत्म नहीं, लेकिन राहत के संकेत
तेल की कीमतों में शुरुआती गिरावट के बाद कुछ रिकवरी भी देखने को मिली। इसकी वजह ओमान के तट के पास एक तेल टैंकर में हुए विस्फोट की खबर रही। इस घटना ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सुरक्षा को लेकर चिंता अभी भी बनी हुई है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है। इसी बीच ओपेक के प्रमुख देशों ने उत्पादन बढ़ाने की अपनी योजना को मंजूरी दे दी है, जिससे आने वाले समय में वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ने की संभावना है। वहीं इराक और तुर्की ने अपनी तेल पाइपलाइन से जुड़े समझौते को एक साल के लिए बढ़ा दिया है, जिससे प्रतिदिन करीब 7.5 लाख बैरल तेल का निर्यात जारी रहेगा। उधर, ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े नए शिपिंग रूट पर बातचीत भी अंतिम चरण में है। अगर यह समझौता सफल रहता है तो क्षेत्र में तनाव कम करने और तेल आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने में मदद मिल सकती है। भारत जैसे देशों के लिए यह राहत की खबर मानी जा रही है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।



