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Patna : बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। सीएम नीतीश कुमार 30 मार्च को विधान परिषद (एमएलसी) पद से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि वे मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। बताया जा रहा है कि विधानसभा और परिषद में 29 मार्च तक छुट्टी है, इसलिए 30 मार्च को इस्तीफे की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
राज्यसभा चुनाव के बाद देना होगा इस्तीफा
दरअसल, नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं। नियम के अनुसार किसी एक ही समय में दो सदनों की सदस्यता नहीं रखी जा सकती, इसलिए उन्हें विधान परिषद की सदस्यता छोड़नी होगी। जेडीयू नेता संजय झा ने भी इसे सामान्य प्रक्रिया बताया है और कहा है कि 14 दिनों के भीतर इस्तीफा देना जरूरी होता है। स्पष्ट है कि यह इस्तीफा सिर्फ एमएलसी पद से होगा, मुख्यमंत्री पद पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
जेडीयू ऑफिस पहुंचे निशांत, नेताओं से की बैठक
इधर, नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक सक्रियता भी तेजी से बढ़ती दिख रही है। शुक्रवार को वे जेडीयू के प्रदेश कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने राज्यसभा सांसद संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के साथ अहम बैठक की। इस दौरान एमएलसी संजय गांधी भी मौजूद रहे। निशांत ने कहा कि वे संगठन को मजबूत करने और नीतीश कुमार की नीतियों को लोगों तक पहुंचाने पर चर्चा करने पहुंचे थे। निशांत कुमार के पहुंचते ही पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। कार्यकर्ताओं में उत्साह साफ दिखा और उन्हें लेकर सकारात्मक माहौल नजर आया। यह उनकी बढ़ती स्वीकार्यता की ओर भी इशारा करता है।
‘निशांत को सीएम बनाओ’ के लगे नारे
निशांत की एंट्री के साथ ही पार्टी में नई चर्चा भी शुरू हो गई है। हाल ही में जब वे 11 मार्च को पार्टी कार्यालय पहुंचे थे, तब कार्यकर्ताओं ने उनके समर्थन में नारे लगाए थे। ‘बिहार का सीएम कैसा हो, निशांत कुमार जैसा हो’ जैसे नारे लगे थे। महिला कार्यकर्ताओं ने उनकी आरती भी उतारी थी और उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग की थी। निशांत कुमार ने 8 मार्च को ही जेडीयू की सदस्यता ली है और उसके बाद से लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। उनकी बढ़ती मौजूदगी को पार्टी के अंदर बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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