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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : पतरातू के रसदा गांव की सुबहें अब पहले जैसी नहीं रहीं। खेतों की हरियाली की जगह अब लोगों के चेहरों पर चिंता और गुस्सा साफ दिखता है। जिन घरों ने विकास के नाम पर अपनी जमीन छोड़ी, वही लोग आज अपने भविष्य के लिए दर-दर भटक रहे हैं। नौकरी के वादे ने उन्हें उम्मीद दी थी, लेकिन अब वही वादा उनके गुस्से की वजह बन गया है।
जमीन गई, उम्मीद भी जाती दिखी
रसदा के कई परिवारों ने छाई डैम परियोजना के लिए अपनी जमीन दी। उस समय उन्हें बताया गया कि उनके बच्चों को स्थायी नौकरी मिलेगी, ताकि उनका जीवन पटरी पर बना रहे। गांव के विकास मुंडा कहते हैं, “हमने सोचा था कि जमीन गई तो क्या, बच्चों का भविष्य बन जाएगा। लेकिन अब लगता है कि हमसे सिर्फ वादा लिया गया, बदले में कुछ नहीं मिला।”
बैठकें हुईं, कागज बने, लेकिन नौकरी नहीं
10 नवंबर 2025 की बैठक में जब अधिकारियों ने प्रभावित युवाओं की सूची बनाने की बात कही, तो गांव में खुशी की लहर थी। लोगों ने दस्तावेज जमा किए, उम्मीदें बांधीं और इंतजार शुरू किया। लेकिन वक्त बीतता गया और हर बार सिर्फ नई तारीख मिलती रही। कोई स्पष्ट जवाब नहीं, कोई ठोस कदम नहीं।
ठंड की रातों में धरना, फिर भी खाली हाथ
जनवरी की ठंडी रातों में 19 और 20 तारीख को जब ग्रामीण छाई डैम साइट पर धरने पर बैठे, तो यह सिर्फ विरोध नहीं था, बल्कि अपने हक की पुकार थी। उस रात प्रशासन और कंपनी के अधिकारियों के साथ बातचीत हुई। भरोसा दिया गया कि एक महीने के भीतर सभी को नौकरी मिल जाएगी। राम बिलास मुंडा बताते हैं, “हमने उस रात सोचा कि अब बात बन जाएगी। लेकिन दो महीने बीत गए, कोई खबर नहीं आई।”
टूटता भरोसा, बढ़ता गुस्सा
समय सीमा खत्म हो गई, लेकिन न नौकरी मिली और न कोई स्पष्ट जवाब। धीरे-धीरे लोगों का भरोसा टूटता गया। अब गांव में चर्चा सिर्फ एक ही बात की है, कब तक इंतजार करें। निटक मुंडा कहते हैं, “अब हमको भरोसा नहीं, सिर्फ हक चाहिए। जब तक लिखित और ठोस फैसला नहीं होगा, हम पीछे नहीं हटेंगे।”
अब आर या पार की तैयारी
ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि 30 मार्च से बलकुदरा छाई डैम स्थल पर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू होगा। इस बार यह सिर्फ धरना नहीं होगा, बल्कि अपने हक के लिए निर्णायक लड़ाई होगी। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस दौरान कोई अप्रिय स्थिति बनती है, तो उसकी जिम्मेदारी पूरी तरह PVUNL प्रबंधन की होगी।
सरकार से आखिरी उम्मीद
ग्रामीणों ने उपायुक्त को आवेदन देकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। आवेदन की प्रतियां मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, राज्यपाल और पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई हैं। लोगों को उम्मीद है कि अब सरकार उनकी आवाज सुनेगी और उन्हें उनका हक दिलाएगी।
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