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Home » महिलाओं की ताकत पर मंत्री दीपिका का भरोसा, बोलीं- अब दुनिया तक पहुंच रहा झारखंड का हुनर
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महिलाओं की ताकत पर मंत्री दीपिका का भरोसा, बोलीं- अब दुनिया तक पहुंच रहा झारखंड का हुनर

June 13, 2026No Comments5 Mins Read
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Ranchi : कभी गांव की महिलाओं की पहचान सिर्फ खेत, घर और परिवार तक सीमित मानी जाती थी। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। झारखंड की महिलाएं न सिर्फ अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं, बल्कि अपने हुनर और मेहनत के दम पर देश-विदेश के बाजारों तक पहुंच बना रही हैं। रांची के मारवाड़ी भवन में आयोजित मारवाड़ी सहायक समिति की परंपरा प्रदर्शनी के प्री-लॉन्च समारोह और “अपनों की उड़ान” कार्यक्रम में कुछ ऐसी ही कहानियां चर्चा का केंद्र रहीं। कार्यक्रम में शामिल हुईं राज्य की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने महिलाओं की बढ़ती ताकत और बदलते झारखंड की तस्वीर को सामने रखते हुए कहा कि आज गांवों की महिलाएं सिर्फ आजीविका नहीं कमा रहीं, बल्कि नया इतिहास लिख रही हैं।

गांव से निकलकर दुनिया तक पहुंच रही महिलाओं की पहचान

अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि झारखंड में जेएसएलपीएस से जुड़कर 32 लाख से ज्यादा महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई कहानी गढ़ रही हैं। ये महिलाएं अब सिर्फ स्वयं सहायता समूहों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्पादन, विपणन और उद्यमिता के क्षेत्र में भी मजबूत कदम बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले तक यह कल्पना करना भी मुश्किल था कि गांव की महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पाद विदेशों के बाजारों में बिकेंगे। लेकिन आज यही हकीकत बन चुकी है। पिछले साल झारखंड के उत्पाद दुबई पहुंचे थे और इस साल लंदन तक अपनी पहचान बना चुके हैं। यह उपलब्धि सिर्फ व्यापार की सफलता नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और मेहनत का परिणाम है।

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आम के बागानों ने बदली हजारों परिवारों की जिंदगी

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बिरसा हरित ग्राम योजना का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य के कई इलाकों में लगाए गए आम के बागान अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बन रहे हैं। जिन खेतों में कभी सीमित खेती होती थी, वहां आज फल उत्पादन से परिवारों की आमदनी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड का आम अब सिर्फ स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है। देश के दूसरे राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी इसकी मांग बढ़ रही है। इस पूरे बदलाव में महिलाओं की भूमिका बेहद अहम रही है।

मेहनत तो है, लेकिन बाजार तक पहुंच अभी भी चुनौती

मंत्री ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या हमेशा बाजार तक पहुंच की रही है। कई महिलाएं बेहतरीन उत्पाद तैयार करती हैं, लेकिन सही ग्राहक और उचित कीमत नहीं मिलने से उनका उत्साह कम हो जाता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए सरकार लगातार महिलाओं को बाजार से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर महिलाओं को सही मंच और अवसर मिले तो वे खुद सफल उद्यमी बन सकती हैं और दूसरों को भी रोजगार दे सकती हैं।

व्यापार की बात हो तो मारवाड़ी समाज का नाम सबसे आगे

दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि उद्योग, व्यापार और उद्यमिता की चर्चा हो और मारवाड़ी समाज का जिक्र न हो, ऐसा संभव ही नहीं है। अपनी मेहनत, दूरदृष्टि और सामाजिक योगदान के कारण इस समाज ने देशभर में अलग पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि मारवाड़ी सहायक समिति से जुड़ी महिलाओं द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि महिलाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देने वाला मंच है। यहां से निकलने वाले विचार और अनुभव कई महिलाओं के लिए नई राह खोल सकते हैं।

खेती को कारोबार बनाने की जरूरत

मंत्री ने साफ कहा कि केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहकर अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत नहीं किया जा सकता। समय की मांग है कि खेती को व्यवसाय के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना होगा। फल, सब्जी और अन्य कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण पर ध्यान देना होगा ताकि किसानों को बेहतर लाभ मिल सके। वैल्यू एडिशन से उत्पादों की कीमत बढ़ेगी और किसानों की आय में भी इजाफा होगा।

गांवों में कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट की जरूरत

दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि हर साल बड़ी मात्रा में कृषि उत्पाद खराब हो जाते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण भंडारण और प्रसंस्करण की पर्याप्त व्यवस्था का अभाव है। उन्होंने कहा कि गांवों में कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित किए जाने चाहिए। इससे किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचनी नहीं पड़ेगी। साथ ही ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।

झारखंड का रेशम दुनिया में और चमक सकता है

मंत्री ने झारखंड के सिल्क उद्योग का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य का रेशम पहले से ही अपनी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। लेकिन अगर इसमें बेहतर डिजाइन, फिनिशिंग और एम्ब्रॉयडरी को जोड़ा जाए तो इसकी मांग और बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि रेशम उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ महिलाओं के लिए रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकता है।

115 साल की सेवा, आज भी समाज के साथ

मारवाड़ी सहायक समिति के 115 वर्षों के सफर की सराहना करते हुए मंत्री ने कहा कि किसी संस्था का इतने लंबे समय तक समाज सेवा और जनहित के कार्यों में सक्रिय बने रहना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे संगठन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करते हैं।

कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं के उत्साह, उनके अनुभव और आत्मनिर्भर बनने की कहानियों ने यह साफ संदेश दिया कि झारखंड की बेटियां अब सिर्फ सपने नहीं देख रहीं, बल्कि उन्हें सच भी कर रही हैं। और शायद यही “अपनों की उड़ान” का सबसे बड़ा संदेश भी है।

इसे भी पढ़ें : “ग्राम सभाओं को मिलेगा उनका अधिकार”, पेसा पर मंत्री दीपिका ने दिया भरोसा

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