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Home » “ग्राम सभाओं को मिलेगा उनका अधिकार”, पेसा पर मंत्री दीपिका ने दिया भरोसा
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“ग्राम सभाओं को मिलेगा उनका अधिकार”, पेसा पर मंत्री दीपिका ने दिया भरोसा

June 13, 2026No Comments4 Mins Read
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Ranchi : “पेसा नियमावली का मकसद सिर्फ कानून बनाना नहीं, बल्कि गांवों को मजबूत बनाना है। ग्राम सभाओं को उनके संवैधानिक अधिकार मिलें, स्थानीय संसाधनों के फैसलों में उनकी भागीदारी बढ़े और आदिवासी समाज की परंपराएं सुरक्षित रहें, यही हमारी प्राथमिकता है।” ये कहना है ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह का। मंत्री ने यह बातें शनिवार को सरायकेला-खरसावां के ग्राम प्रधान महासभा के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दरम्यान कही। इस दौरान पेसा नियमावली को लेकर ग्राम प्रधानों ने अपनी बात रखी, सवाल पूछे और कुछ मांगें भी सामने रखीं। मंत्री ने उनकी बातों को ध्यान से सुना और भरोसा दिलाया कि सरकार हर न्यायसंगत सुझाव और मांग पर गंभीरता से विचार करेगी।

पेसा को लेकर सरकार का संदेश साफ

झारखंड में पेसा नियमावली लागू होने के बाद गांवों में इसकी चर्चा लगातार बढ़ रही है। कई जगह लोग इसे ग्राम स्वशासन को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ इलाकों में इसके प्रावधानों को लेकर भ्रम और आशंकाएं भी सामने आ रही हैं। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह का कहना है कि पेसा का मकसद किसी नई व्यवस्था को थोपना नहीं, बल्कि उन परंपराओं और अधिकारों को कानूनी मजबूती देना है, जो वर्षों से आदिवासी समाज की पहचान रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाएं सिर्फ एक प्रशासनिक इकाई नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र हैं। ऐसे में उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक अधिकार और भागीदारी मिलना जरूरी है।

ग्राम प्रधानों ने रखा अपना पक्ष

मुलाकात के दौरान ग्राम प्रधान महासभा के प्रतिनिधियों ने सरकार द्वारा पेसा नियमावली लागू किए जाने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि यह लंबे समय से की जा रही मांगों में शामिल था। हालांकि प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि नियमावली को लेकर कई तरह की गलतफहमियां फैल रही हैं। गांवों में अलग-अलग बातें कही जा रही हैं, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि विभागीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों तक सही जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि पेसा के वास्तविक उद्देश्य को लेकर किसी तरह की गलतफहमी न रहे।

ग्राम प्रधानों के चयन पर भी हुई चर्चा

बैठक में ग्राम प्रधानों के चयन से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। प्रतिनिधियों ने कहा कि कई जगह इस विषय को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। ऐसे में सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद पैदा न हो। ग्राम प्रधानों ने अपनी मांगों और शंकाओं को विस्तार से मंत्री के सामने रखा और उम्मीद जताई कि सरकार उनकी बातों पर सकारात्मक पहल करेगी।

“झारखंड की पहचान उसकी संस्कृति और परंपराओं से”

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि झारखंड की असली ताकत उसकी आदिवासी संस्कृति, सामाजिक परंपराएं और ग्राम स्वशासन की व्यवस्था है। राज्य सरकार चाहती है कि विकास की हर योजना इन मूल्यों को साथ लेकर आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल विकास योजनाएं चलाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि आदिवासी समाज अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों और अधिकारों के साथ सम्मानपूर्वक आगे बढ़े। मंत्री के मुताबिक पेसा नियमावली इसी सोच का हिस्सा है, जो गांवों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक सशक्त बनाने का रास्ता तैयार करती है।

उम्मीदों के साथ खत्म हुई बैठक

इस चर्चा में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत हुई। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने अपनी बात खुलकर रखी और मंत्री ने भी उन्हें सकारात्मक आश्वासन दिया। बैठक के बाद यह संदेश साफ दिखा कि सरकार पेसा नियमावली को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे गांवों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने की कोशिश कर रही है। अब ग्रामीण इलाकों की नजर इस बात पर रहेगी कि पेसा को लेकर उठे सवालों और सुझावों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

इस अवसर पर श्यामल पांडे, अरूप सिंह, वासुदेव महतो, लक्ष्मण गोप, महादेव सिंह, पद्मलोचन गोप, प्रेमचंद महतो, ज्ञानचंद महतो, कार्तिक चंद्र महतो, रामापति महतो, बी. गोराई, प्रभात रंजन महतो समेत ग्राम प्रधान महासभा के कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।

इसे भी पढ़ें : कोयले की काली सुरंग निगल गई चार जिंदगी… जानें कैसे

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