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Patna : अब अगर कोई बच्चा यह कहे कि वह सरकारी स्कूल में पढ़ता है, इसलिए उसे अच्छी पढ़ाई या महंगी कोचिंग नहीं मिल पाती, तो शायद यह शिकायत ज्यादा दिन नहीं रहेगी। बिहार सरकार ने शिक्षा की तस्वीर बदलने की दिशा में एक ऐसा कदम उठाया है, जो आने वाले वर्षों में लाखों छात्रों की जिंदगी बदल सकता है। सरकारी स्कूलों में अब सिर्फ ब्लैकबोर्ड और चॉक से पढ़ाई नहीं होगी। क्लासरूम में बड़ी डिजिटल स्क्रीन होंगी, लाइव पढ़ाने वाले विशेषज्ञ शिक्षक होंगे और डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देखने वाले छात्रों को NEET और JEE जैसी परीक्षाओं की तैयारी भी मुफ्त में कराई जाएगी।
गुरुवार को पटना के राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय, शास्त्रीनगर से सीएम सम्राट चौधरी ने ‘बिहार स्कूल लाइव क्लासेज’ की शुरुआत करते हुए इस नई व्यवस्था का शुभारंभ किया। इसी के साथ बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ऑनलाइन कोचिंग क्लास और मेडिकल तथा इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की मुफ्त तैयारी कार्यक्रम भी शुरू हो गया।

अब शहर और गांव की पढ़ाई के बीच कम होगा फासला
आज भी बिहार के हजारों गांवों में ऐसे छात्र हैं, जिनके परिवार महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते। कई मेधावी छात्र सिर्फ इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि उन्हें अच्छे शिक्षक या बेहतर संसाधन नहीं मिल पाते। नई व्यवस्था इसी दूरी को कम करने की कोशिश है। अब विशेषज्ञ शिक्षक एक जगह से पढ़ाएंगे और उनकी क्लास एक साथ कई स्कूलों में लाइव दिखाई जाएगी। यानी जिस गुणवत्ता की पढ़ाई पटना में होगी, उसी तरह की पढ़ाई दूरदराज के सरकारी स्कूलों तक भी पहुंचेगी।
सीएम ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि इस व्यवस्था को सिर्फ कुछ स्कूलों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि पूरे बिहार के हाई स्कूलों तक पहुंचाया जाए।
10 मॉडल स्कूलों से हुई शुरुआत, आगे पूरे बिहार तक पहुंचेगी योजना
फिलहाल पटना के 10 चयनित मॉडल स्कूलों को इस डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा गया है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बिहार स्कूल लाइव क्लास रूम के लोगो का भी लोकार्पण किया। पटना के डीएम कुंदन कुमार ने प्रस्तुतीकरण के जरिए बताया कि पूरी लाइव क्लास प्रणाली कैसे काम करेगी। इसके बाद छात्राओं ने डिजिटल माध्यम से अपनी पहली लाइव क्लास भी अटेंड की।

अब क्लासरूम में होगी स्मार्ट स्क्रीन, पढ़ाई बनेगी आसान
राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में दो अत्याधुनिक स्मार्ट क्लासरूम तैयार किए गए हैं। यहां इंटरएक्टिव पैनल लगाए गए हैं, जिनकी मदद से शिक्षक और छात्र एक-दूसरे से सीधे संवाद कर सकेंगे। पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। वीडियो, एनिमेशन, डिजिटल प्रेजेंटेशन और लाइव सवाल-जवाब के जरिए पढ़ाई ज्यादा रोचक और आसान होगी।
सीएम सम्राट चौधरी ने स्कूल की बायोलॉजी लैब, फिजिक्स लैब, आईसीटी लैब, स्पोर्ट्स रूम और म्यूजिक रूम का भी निरीक्षण किया। उन्होंने छात्राओं से बातचीत की और कहा कि मन लगाकर पढ़ें, क्योंकि यही मेहनत उन्हें आगे ले जाएगी।
अब सरकारी स्कूलों में भी होगी NEET और JEE की तैयारी
इस पूरी पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी भी मुफ्त में कराई जाएगी। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ऑनलाइन कोचिंग क्लास के जरिए छात्रों को अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन मिलेगा। इससे उन परिवारों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी, जो लाखों रुपये खर्च कर निजी कोचिंग नहीं करा सकते।
AI, कोडिंग और STEM की पढ़ाई भी होगी
दुनिया तेजी से बदल रही है और अब सिर्फ पारंपरिक पढ़ाई काफी नहीं मानी जाती। इसी को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने सात स्वयंसेवी संस्थानों के साथ समझौता किया है। इन संस्थानों की मदद से छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, कोडिंग, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग, डिजाइन थिंकिंग, STEM शिक्षा, गणित, विज्ञान, शिक्षक प्रशिक्षण और AI आधारित मूल्यांकन जैसी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। सबसे खास बात यह है कि छात्रों को इन सभी सुविधाओं के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा।
मेधावी छात्रों और हॉकी खिलाड़ियों का बढ़ाया हौसला
कार्यक्रम में प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। उन्हें उत्कृष्टता प्रमाण पत्र दिए गए। वहीं, हॉकी में शानदार प्रदर्शन करने वाली राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं को भी सम्मानित किया गया और उन्हें हॉकी किट वितरित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा और खेल दोनों साथ-साथ चलेंगे, तभी बच्चों का संपूर्ण विकास संभव होगा।
सीएम बोले- हर बच्चे तक पहुंचेगी अच्छी शिक्षा
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार चाहती है कि बिहार का कोई भी छात्र सिर्फ संसाधनों की कमी की वजह से पीछे न रह जाए। स्मार्ट क्लास, लाइव लर्निंग और डिजिटल शिक्षा के जरिए हर विद्यार्थी को बेहतर भविष्य की तैयारी का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बिहार की शिक्षा व्यवस्था तकनीक के सहारे नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी और यहां के छात्र राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बनाएंगे।
बदल सकती है सरकारी स्कूलों की तस्वीर
यह पहल सिर्फ कुछ स्मार्ट क्लासरूम बनाने तक सीमित नहीं है। अगर योजना तय समय पर पूरे राज्य में लागू होती है, तो गांव के सरकारी स्कूल में बैठा छात्र भी वही पढ़ाई कर सकेगा, जो बड़े शहरों के चुनिंदा स्कूलों में होती है। शायद यही वजह है कि इस पहल को बिहार की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में इसका असर सिर्फ परीक्षा परिणामों में नहीं, बल्कि लाखों बच्चों के सपनों और उनके भविष्य में भी दिखाई दे सकता है।
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