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Ranchi : कोयला खदानों से निकलने वाला पानी अब लोगों की प्यास बुझाएगा। CCL के पिपरवार क्षेत्र के बचरा में तैयार किया गया ‘कोल नीर प्लांट’ बुधवार को शुरू हो गया। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने दिल्ली से इसका वर्चुअल उद्घाटन किया। इस प्लांट की खास बात यह है कि इसका पूरा संचालन महिलाओं के हाथों में होगा। सीसीएल ने स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को प्लांट चलाने की ट्रेनिंग भी दे दी है।
प्लांट में खदानों से निकलने वाले पानी को आधुनिक तकनीक से शुद्ध कर बोतल और जार में भरा जाएगा। रोजाना 25 किलोलीटर पानी शुद्ध करने की क्षमता वाले इस प्लांट से आसपास के इलाकों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता बढ़ेगी। साथ ही स्थानीय महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भर बनने का मौका भी मिलेगा।
खदान का पानी अब बनेगा लोगों के काम का
उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि ‘कोल नीर’ खदानों के पानी के बेहतर इस्तेमाल का अच्छा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि खदानों से निकलने वाले पानी को बेकार जाने देने के बजाय उसका शोधन कर लोगों के हित में इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर जल’ के संकल्प से भी जुड़ी है। खदानों के पानी का इस्तेमाल जनकल्याण, विकास और रोजगार के लिए किया जा सकता है। माइन क्लोजर के तहत खनन क्षेत्रों को दोबारा उपयोगी बनाने पर भी काम हो रहा है।
एक मिनट में 40 बोतल तक भरने की क्षमता
बचरा में स्थापित इस अत्याधुनिक प्लांट की रोजाना पानी शुद्ध करने की क्षमता 25 किलोलीटर है। यहां 500 मिलीलीटर और 1 लीटर की बोतलों में पानी भरा जाएगा। प्लांट में एक मिनट में 40 बोतल तक भरने की क्षमता है। इसके अलावा 20 लीटर के जार भरने की सुविधा भी उपलब्ध है। यानी आने वाले समय में पिपरवार और आसपास के क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की जरूरत को पूरा करने में यह प्लांट अहम भूमिका निभा सकता है।
महिलाएं संभालेंगी प्लांट, रोजगार का मिलेगा मौका
इस प्लांट को पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित किया जाएगा। सीसीएल की ओर से स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्यों को इसके संचालन और कामकाज का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस पहल से स्थानीय महिलाओं को सिर्फ रोजगार ही नहीं मिलेगा, बल्कि वे प्लांट के संचालन से जुड़कर अपनी आय का साधन भी बना सकेंगी। खनन क्षेत्र में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

‘वेस्ट टू वेल्थ’ की सोच पर जोर
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विकास के साथ संसाधनों का संरक्षण भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए नई सोच और बेहतर तकनीक के साथ उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल करना होगा। उन्होंने कहा कि पानी जैसे प्राकृतिक संसाधनों की बर्बादी रोकना जरूरी है। खदानों से निकलने वाले पानी का उपयोग कर सीसीएल ने इस दिशा में एक नई पहल की है।
सरकारी योजनाएं अब लोगों की जिंदगी बदलेंगी : मंत्री
कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि ‘कोल नीर’ के जरिए आम लोगों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं अब सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं हैं। इनका उद्देश्य लोगों के जीवन में बदलाव लाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी है। कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि ‘कोल नीर’ के जरिए माइन वॉटर का टिकाऊ और बेहतर इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे जल संरक्षण, रोजगार और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा मिलेगा।
माइन क्लोजर पर ‘आरोह’ रिपोर्ट जारी
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने ‘आरोह द राइजिंग’ नाम से माइन क्लोजर पर तैयार वार्षिक रिपोर्ट का लोकार्पण किया। सीसीएल की ओर से माइन क्लोजर से जुड़ा मॉडल भी प्रदर्शित किया गया, जिसका उद्घाटन केंद्रीय मंत्री ने किया। मंत्री ने कहा कि खनन के बाद जमीन को दोबारा उपयोगी बनाना जरूरी है। ऐसे क्षेत्रों में इको पार्क और दूसरी पर्यावरण हितैषी परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं।

सीसीएल के अधिकारी, श्रमिक प्रतिनिधि और ग्रामीण रहे मौजूद
पिपरवार में आयोजित कार्यक्रम में सीसीएल के निदेशक वित्त पवन कुमार मिश्रा, निदेशक मानव संसाधन हर्ष नाथ मिश्र, निदेशक तकनीकी एवं संचालन चंद्रशेखर तिवारी, निदेशक योजना एवं परियोजना अनूप हंजूरा और पिपरवार क्षेत्र के महाप्रबंधक सुजीत कुमार मौजूद रहे।
इसके अलावा सीसीएल के अधिकारी और कर्मचारी, विभिन्न श्रमिक संघों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
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