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Patna/Sitamarhi : सोचिए, जिन प्लास्टिक की थैलियों, बोतलों और रद्दी सामान को आप बेकार समझकर घर से बाहर फेंक देते हैं, अगर वही कचरा किसी दिन पार्क या चौराहे पर एक सुंदर, मजबूत और आरामदायक बेंच बनकर आपका स्वागत करे तो? पहली बार सुनने में यह किसी जादू जैसा लगता है, लेकिन बिहार के सीतामढ़ी जिले ने इस जादू को सच कर दिखाया है। कचरे को संभालकर उसे एक नया जीवन देने का यह अनोखा प्रयोग आज सिर्फ बिहार में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है। रविवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में सीतामढ़ी के इस कमाल का जिक्र किया, तो पूरे प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा हो गया।
कबाड़ से बना डाला आराम करने की जगह
बात बहुत सीधी है, प्लास्टिक कचरा आज हर शहर और गांव के लिए एक बड़ी सिरदर्दी बन चुका है। नालियां जाम होना, जमीनों का बंजर होना और प्रदूषण फैलना, यह सब इसी की देन है। लेकिन सीतामढ़ी के लोगों ने इस समस्या को ही एक मौके में बदल दिया। यहां फेंके गए प्लास्टिक कचरे को जमा करके, उसे प्रोसेस और रिसाइकिल कर एक बेहद मजबूत और टिकाऊ बेंच का रूप दिया गया। यह बेंच सिर्फ देखने में ही बढ़िया नहीं है, बल्कि इस पर बैठकर जो आराम मिलता है, वह बाजार की सामान्य बेंचों से कहीं बेहतर है। सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह से इको-फ्रेंडली है, यानी इससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।
‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड में पीएम मोदी ने इसी बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग ‘रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल’ को सिर्फ एक सरकारी नारा मान लेते हैं। लेकिन सीतामढ़ी की इस पहल ने दिखा दिया कि अगर इरादा पक्का हो, तो कबाड़ से भी कंचन बनाया जा सकता है। यह वेस्ट टू वेल्थ यानी कचरे से संपत्ति बनाने का सबसे जीवंत उदाहरण है।
सीएम सम्राट चौधरी ने पीएम का जताया आभार
रविवार की सुबह पटना के जक्कनपुर स्थित भगवान उत्सव हॉल में माहौल कुछ अलग ही था। मौका था प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ के लाइव प्रसारण का। राज्य के सीएम सम्राट चौधरी समेत कई लोग वहां टीवी स्क्रीन के सामने बैठे थे। जैसे ही पीएम मोदी ने सीतामढ़ी का नाम लिया और वहां की रिसाइकिल बेंच की तारीफ शुरू की, पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कार्यक्रम खत्म होने के तुरंत बाद सीएम सम्राट चौधरी ने अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जब भी बिहार के किसी गांव, शहर या वहां के लोगों के हुनर का जिक्र राष्ट्रीय मंच पर करते हैं, तो इससे हर बिहारवासी का हौसला कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि यह तारीफ इस बात का सबूत है कि पर्यावरण को बचाने की दौड़ में बिहार के लोग अब पीछे नहीं हैं, बल्कि वे दूसरों को रास्ता दिखा रहे हैं।
सीएम का ऐलान- अब एक जिले का प्रयोग बनेगा पूरे राज्य का अभियान
सीतामढ़ी की इस सफलता ने बिहार सरकार को भी एक नया रास्ता दिखाया है। सीएम सम्राट चौधरी ने साफ किया कि सीतामढ़ी का यह मॉडल अब सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकार इसे पूरे राज्य में लागू करने की योजना बना रही है। इसके तहत कचरे के सही इस्तेमाल और रिसाइकलिंग को बढ़ावा देने के लिए राज्यभर में एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि यह बात घर-घर तक पहुंच सके।
इतना ही नहीं, जब कचरे की रिसाइकलिंग बड़े पैमाने पर होगी, तो इससे न सिर्फ शहरों और गांवों में सफाई बनी रहेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर युवाओं को रोजगार के नए मौके भी मिलेंगे। सरकार की यही कोशिश है कि बिहार का हर जिला सीतामढ़ी की तर्ज पर कचरा प्रबंधन के नए और असरदार रास्ते तलाशे और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ के सपने को साकार करे।
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