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Home » क्रॉसवर्ड के महासंग्राम में बेटियों का ‘नाइस’ दाव’, राष्ट्रीय पटल पर बिहार का भी बजा डंका
बिहार

क्रॉसवर्ड के महासंग्राम में बेटियों का ‘नाइस’ दाव’, राष्ट्रीय पटल पर बिहार का भी बजा डंका

August 3, 2026No Comments4 Mins Read
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आद्या सिंह - बायें और तिशा तनेजा - दायें
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Patna : देशभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के दिमागी सूरमाओं के बीच आयोजित बिहार फाउंडेशन नेशनल इंटर कॉलेज क्रॉसवर्ड एक्सपीडिशन, यानी ‘नाइस 2026’ के पहले चरण के नतीजे सामने आ चुके हैं। दिमाग की कसरत, शब्दों की बाजीगरी और एक-एक सुराग पर टिकी निगाहों के बीच इस बौद्धिक महासंग्राम में बेटियों ने ऐसा परचम लहराया कि पूरा देश देखता रह गया। राष्ट्रीय स्तर पर पहले और दूसरे स्थान पर छात्राओं का कब्जा रहा। एक्सट्रा-सी और क्रॉसवर्ड फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा बिहार फाउंडेशन और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से आयोजित इस प्रतियोगिता ने यह साबित कर दिया है कि हाजिरजवाबी, तार्किक सोच और शब्दों पर पकड़ के मामले में हमारी बेटियां किसी से पीछे नहीं हैं। राष्ट्रीय पटल पर नई दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज की आद्या सिंह ने पहला स्थान हासिल कर देशभर में टॉप किया, जबकि आईआईटी मद्रास की तिशा तनेजा ने दूसरा और आईआईटी दिल्ली के अर्नव वी. राजू ने तीसरा स्थान हासिल किया।

पूर्वोत्तर से लेकर पटना तक… राष्ट्रीय पटल पर बिहार की बुद्धिमता का डंका

इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में बिहार की प्रतिभाओं ने भी अपना ज़बरदस्त लोहा मनवाया और पूरे देश में बिहार का डंका बजा दिया। जोनल स्तर की कड़ी टक्कर के बीच पूर्वी क्षेत्र में बिहार की बेटी शिवानी कुमारी ने पहला स्थान हासिल कर राज्य का मान राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा दिया। गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज वैशाली की छात्रा शिवानी की यह कामयाबी दर्शाती है कि राज्य के छोटे शहरों और सरकारी संस्थानों से निकलकर भी युवा राष्ट्रीय मंचों पर अपनी धाक जमा रहे हैं। वहीं बिहार के भीतर राज्य स्तरीय मुकाबले में पटना के IGIMS मेडिकल कॉलेज के छात्र सोहम सार्थक सिन्हा ने बाजी मारते हुए पहला स्थान पाया और नंबर वन बने। शिवानी और सोहम के इस शानदार प्रदर्शन ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि बौद्धिक प्रतियोगिताओं और दिमागी खेल के मैदान में बिहार के मेधावी छात्र-छात्राएं किसी से कम नहीं हैं और वे हर मंच पर अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

देश के हर कोने में दिखा दिमागी जंग का रोमांच

जोनल और राज्य स्तरीय मुकाबलों का दायरा देश के हर कोने तक फैला नजर आया। दक्षिणी क्षेत्र में आईआईटी मद्रास के निकिलेश गुडलूर कृष्णाराम, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में आईआईटी गुवाहाटी के श्रावण डे, उत्तरी क्षेत्र में आईआईटी दिल्ली के दिव्यम जैन और पश्चिमी क्षेत्र में मध्य प्रदेश के गवर्नमेंट कॉलेज जौरा की अंजू सेंगर ने बाजी मारी। इनके अलावा उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, असम, कर्नाटक, दिल्ली, तेलंगाना और हरियाणा समेत तमाम राज्यों से उम्दा प्रतिभाएं सामने आईं।

भावी डॉक्टरों से लेकर इंजीनियरों तक…  बदला क्रॉसवर्ड का अंदाज

इस प्रतियोगिता का सबसे खूबसूरत पहलू यह रहा कि इसमें सिर्फ किसी एक विषय या क्षेत्र के छात्र शामिल नहीं थे। डॉक्टर बनने की तैयारी कर रहे सोहम से लेकर इंजीनियरिंग, लॉ, मैनेजमेंट, विज्ञान और मानविकी जैसे विविध विषयों के छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया। इसने यह साफ कर दिया कि क्रॉसवर्ड अब सिर्फ अखबार के पन्नों पर वक्त बिताने का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह युवाओं की विश्लेषणात्मक क्षमता, तार्किक सोच और समस्या सुलझाने की योग्यता को धार देने वाला एक प्रभावी शैक्षणिक माध्यम बन चुका है।

अगले दौर की तैयारी और NICE का बढ़ता कद

आयोजकों ने सभी विजेताओं की सराहना करते हुए कहा कि हर साल प्रतियोगिता में प्रतिभागियों का स्तर और उनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। युवाओं के बीच क्रॉसवर्ड की बढ़ती लोकप्रियता यह बताती है कि यह मंच उन्हें भाषाई दक्षता और रचनात्मक समझ विकसित करने का बेहतरीन अवसर दे रहा है। पहले चरण के इन उत्साहजनक परिणामों के बाद अब प्रतिभागियों की निगाहें अगले रविवारों को होने वाले ‘सी’ और ‘ई’ राउंड्स पर टिकी हैं। बिहार फाउंडेशन के नाम से जुड़ी यह प्रतिष्ठित इंटर कॉलेज कम्पटीशन आज देशभर के युवाओं के लिए अपनी प्रतिभा साबित करने का सबसे बड़ा मंच बन चुकी है, जहां बिहार की माटी के लाल और लाडलियां भी पूरे स्वाभिमान के साथ अपनी बौद्धिक क्षमता का परचम लहरा रहे हैं।

इसे भी पढ़ें : एरिक और रूपर्ट बने ‘क्रॉसकिंग’, अमेरिका से कनाडा तक चमका ‘बिहार’… जानें क्यों

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