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Home » बचपन की कीमत एक लाख रुपये… छह साल बाद कैद से बाहर आई झारखंड की बेटी
झारखंड

बचपन की कीमत एक लाख रुपये… छह साल बाद कैद से बाहर आई झारखंड की बेटी

August 3, 2026No Comments4 Mins Read
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New Delhi / Ranchi : छह साल… किसी बच्चे के लिए यह उम्र स्कूल, खेल, सपनों और परिवार के साथ बीतने का समय होती है। लेकिन झारखंड के चाईबासा की एक किशोरी के हिस्से में बचपन नहीं, बल्कि डर, मजबूरी और शोषण आया। जिस उम्र में उसे किताबें थामनी चाहिए थीं, उस उम्र में उसे घरों में काम करने के लिए धकेल दिया गया। फिर एक शहर से दूसरे शहर भेजा गया और आखिर में उसकी जिंदगी की कीमत सिर्फ एक लाख रुपये लगा दी गई। उसकी मर्जी के बिना शादी करा दी गई। अब छह साल बाद दिल्ली में हुए एक संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन ने उसे उस अंधेरे से बाहर निकाला है, जहां उसकी पहचान तक बदल दी गई थी। चाईबासा पुलिस, दिल्ली पुलिस, मिशन मुक्ति फाउंडेशन और रेस्क्यू टीम के संयुक्त अभियान में किशोरी को सुरक्षित मुक्त कराया गया। अब उसकी काउंसलिंग चल रही है और जांच एजेंसियां उस पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जिसने उसके बचपन को कैद कर लिया था।

घर से निकली तो लौटने का रास्ता ही छिन गया

पीड़िता ने काउंसलिंग के दौरान जो बताया, वह किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि मानव तस्करी की कड़वी हकीकत है। उसने बताया कि जब उसे झारखंड से ले जाया गया, तब वह नाबालिग थी। उसे बेहतर जिंदगी और काम का झांसा देकर दिल्ली लाया गया। यहां अलग-अलग घरों में घरेलू काम कराया गया। उसके बाद उसे मुंबई भेज दिया गया। यहीं से उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। आरोप है कि उसे एक लाख रुपये में एक अज्ञात पंजाबी व्यक्ति को बेच दिया गया और उसकी मर्जी के बिना शादी करा दी गई। इसके बाद वर्षों तक वह मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना सहती रही। परिवार से संपर्क टूट गया और उसे यह तक नहीं पता था कि कभी अपने घर लौट भी पाएगी या नहीं।

पहचान भी बदल दी, ताकि सच सामने न आ सके

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने केवल उसकी जिंदगी ही नहीं छीनी, बल्कि उसकी पहचान भी बदलने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक पीड़िता के आधार कार्ड में जन्मतिथि बदलकर उसे बालिग दिखाया गया। इससे मानव तस्करी, बाल श्रम और जबरन विवाह जैसे अपराधों को छिपाने की कोशिश की गई। यही दस्तावेज आगे चलकर उसके शोषण का सबसे बड़ा हथियार बन गए। अब पुलिस इस फर्जीवाड़े की भी विस्तार से जांच कर रही है कि आखिर किस तरह सरकारी दस्तावेज में बदलाव किया गया और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।

दिल्ली की प्लेसमेंट एजेंसी पर शक, कई नाम जांच के घेरे में

मामले की जांच पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुदड़ी थाना में मानव तस्करी, धोखाधड़ी और अन्य संबंधित धाराओं के तहत की जा रही है। जांच के दौरान प्रतिमा गुप्ता, हेमंत गुप्ता, विशाल गुप्ता, मनीष भारती और मीना देवी के नाम सामने आए हैं। इनमें प्रतिमा गुप्ता गुमला की रहने वाली बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार दिल्ली के रोहिणी स्थित राम विहार इलाके से संचालित एक प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए किशोरी को अलग-अलग जगहों पर भेजा गया। एजेंसी के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि इस नेटवर्क के जरिए कितनी अन्य लड़कियों को भी इसी तरह फंसाया गया।

अब सिर्फ एक लड़की नहीं, पूरे नेटवर्क पर है पुलिस की नजर

इस रेस्क्यू अभियान में झारखंड भवन के स्थानिक आयुक्त अरवा राजकमल की अहम भूमिका रही। उनके समन्वय से झारखंड और दिल्ली की एजेंसियों ने मिलकर कार्रवाई की और किशोरी को सुरक्षित बाहर निकाला। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक पीड़िता तक सीमित नहीं दिख रहा। शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि इसके पीछे संगठित मानव तस्करी का बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। पुलिस अब इस पूरे गिरोह की कड़ियां जोड़ रही है और उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई और अहम खुलासे होंगे।

फिलहाल किशोरी को कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श और पुनर्वास की प्रक्रिया से जोड़ा गया है। छह साल बाद वह अपने घर लौटने की राह पर है। उसके चेहरे पर लौटती मुस्कान इस बात की उम्मीद जगाती है कि मानव तस्करी के खिलाफ लगातार कार्रवाई से न जाने कितनी और बेटियों को ऐसी कैद से आजादी मिल सकती है।

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