अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
New Delhi : मोदी कैबिनेट की बैठक में आम लोगों, किसानों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। सरकार ने रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी में बढ़ोतरी करके किसानों को सीधी राहत दी है, तो वहीं देश में बिजली ढांचे को मजबूत करने के लिए ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तीसरे चरण को भी मंजूरी दे दी है। बैठक के बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फैसलों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि इन कदमों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश का रास्ता साफ होगा।
गेहूं और दलहन-तिलहन की एमएसपी में बढ़ोतरी
कैबिनेट ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए गेहूं के समर्थन मूल्य में 25 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया है। इस बढ़ोतरी के बाद अब गेहूं का भाव 2,585 रुपये से बढ़कर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। सरकार के मुताबिक गेहूं की प्रति क्विंटल उत्पादन लागत 1,264 रुपये आती है, जिसके मुकाबले नया समर्थन मूल्य किसानों को बेहतर मुनाफा देगा। गेहूं के साथ-साथ पांच अन्य रबी फसलों के दामों में भी सुधार किया गया है। जौ के दाम 136 रुपये बढ़ाकर 2,286 रुपये, चने के दाम 83 रुपये बढ़ाकर 5,958 रुपये और मसूर का भाव 390 रुपये बढ़ाकर 7,390 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इसके अलावा सरसों के समर्थन मूल्य में 413 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 6,613 रुपये और कुसुम में 675 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 7,215 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है।
किसानों की जेब में पहुंचेंगे 90 हजार करोड़ से ज्यादा
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आगामी रबी सत्र में लगभग 324 लाख टन उपज की सरकारी खरीद का अनुमान है। इस खरीद के जरिए किसानों के खातों में कुल 90,962 करोड़ रुपये का भुगतान पहुंचेगा। फसलों की नई दरें तय करते समय कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों, मौसम के बदलते मिजाज, अल-नीनो के प्रभाव और बाजार के रुझानों को ध्यान में रखा गया है। चालू फसल वर्ष के दौरान सरकार ने देश भर में 12.1 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जिसकी बुवाई अक्टूबर से शुरू होकर कटाई अप्रैल के महीने में की जाती है।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तीसरे चरण पर मुहर
कैबिनेट का दूसरा बड़ा फैसला देश के नवीकरणीय ऊर्जा ढांचे को लेकर रहा। सरकार ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना के तीसरे चरण को हरी झंडी दिखा दी है, जिस पर 1,86,405 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य मकसद राज्यों के भीतर बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क को इतना मजबूत बनाना है कि 135 गीगावाट तक की स्वच्छ ऊर्जा को सीधे ग्रिड और उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुंचाया जा सके। इसे वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे राज्यों में तैयार होने वाली सौर और पवन ऊर्जा बिना किसी रुकावट के मुख्य बिजली ग्रिड से जुड़ सकेगी।
इसे भी पढ़ें : मार्कशीट संभालकर रखने की झंझट खत्म, बिहार बोर्ड के दस्तावेज अब डिजिलॉकर पर



