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Begusarai/Patna : बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि समाज के सबसे पिछड़े और गरीब तबके के बच्चों तक बेहतरीन और आधुनिक शिक्षा पहुंचाना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने माना कि स्कूलों की इमारतों और सुविधाओं के मामले में बिहार अभी दूसरे कई राज्यों से पीछे जरूर है, लेकिन बच्चों के लर्निंग आउटकम के मामले में राज्य ने बहुत शानदार प्रगति की है।
शिक्षा मंत्री रविवार को बेगूसराय के बरौनी में स्थित आईओसीएल स्टेडियम में एक बड़े कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम एक ही दिन में 551 ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ स्कूलों के उद्घाटन के मौके पर आयोजित किया गया था। उन्होंने बताया कि स्कूलों में किए जा रहे सुधारों, शिक्षकों की ट्रेनिंग और खास अभियानों की वजह से बच्चों के पढ़ने, लिखने और गणित को समझने की क्षमता में बड़ा सुधार आया है।
‘बिहार में रखी जा रही विकसित भारत की मजबूत नींव’
शिक्षा मंत्री ने कहा कि साल 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने का जो सपना प्रधानमंत्री ने देखा है, उसकी एक मजबूत नींव आज बिहार में रखी जा रही है। एक ही दिन में इतने सारे मॉडल स्कूलों की शुरुआत होना बिहार की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने इस कामयाबी का श्रेय सीएम सम्राट चौधरी को देते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शी सोच की वजह से ही आज राज्य के हर ब्लॉक में आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडल स्कूल तैयार हो पाए हैं। लगभग 990 करोड़ रुपये के खर्च से बने इन स्कूलों के जरिए गांवों और शहरों के बच्चों को पढ़ाई का एक बेहतरीन माहौल मिलेगा। आने वाले दिनों में सरकार के दूसरे स्कूलों को भी इसी तरह मॉडल स्कूल के रूप में बदला जाएगा।

चार लाख से ज्यादा बच्चों का हुआ दाखिला
इस मौके पर जानकारी दी गई कि इन नए मॉडल स्कूलों में अब तक चार लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं का एडमिशन हो चुका है। इन स्कूलों को बनाने का मकसद बच्चों के अंदर छिपी प्रतिभा को बाहर लाना और उनका पूरा विकास करना है। इन सभी स्कूलों में बच्चों को स्मार्ट क्लास, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेलकूद के मैदान और दूसरी आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। साथ ही, बच्चों को पढ़ाने के लिए हर विषय के एक्सपर्ट टीचर तैनात किए गए हैं, ताकि यहां से पढ़कर निकलने वाले बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर और सिविल सर्विसेज जैसे बड़े क्षेत्रों में जाकर राज्य का नाम रोशन कर सकें।
बिहार की गौरवशाली विरासत का जिक्र
अपने भाषण में शिक्षा मंत्री ने बिहार के इतिहास को याद करते हुए कहा कि यह राज्य हमेशा से ज्ञान और विज्ञान की धरती रहा है। नालंदा और तक्षशिला जैसे दुनिया के मशहूर विश्वविद्यालय हमारी पहचान रहे हैं। उन्होंने एक धार्मिक संदर्भ देते हुए कहा कि भगवान राम ने भले ही अयोध्या में जन्म लिया था, लेकिन उन्होंने शिक्षा और ज्ञान पाने के लिए बिहार के बक्सर को ही चुना था। आज बिहार अपनी उसी पुरानी और गौरवशाली परंपरा को दोबारा जिंदा कर रहा है।

राष्ट्रकवि दिनकर की धरती को नमन
कार्यक्रम की शुरुआत में मिथिलेश तिवारी ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली को याद किया। उन्होंने बेगूसराय को साहित्य, संस्कृति और बदलाव की धरती बताते हुए कहा कि इन स्कूलों की शुरुआत से मुख्यमंत्री ने इस पावन धरती का सम्मान और ज्यादा बढ़ा दिया है।
इस मुख्य कार्यक्रम से पहले शिक्षा मंत्री ने सीएम सम्राट चौधरी के साथ बेगूसराय के बीपी इंटर स्कूल का दौरा भी किया, जिसे सरस्वती विद्या निकेतन के रूप में अपग्रेड किया गया है। वहां दोनों नेताओं ने स्कूल की पढ़ाई-लिखाई, वहां दी जा रही आधुनिक सुविधाओं और पूरी व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया।

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