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Patna : कल तक जिस ग्रामीण बिहार की पहचान ‘प्रतिभाओं के पलायन’ से होती थी, आज वहीं के एक छोटे से गांव में उम्मीद की एक नई सुबह मुस्कुरा रही है। 10वीं पास करने के बाद जहां अमूमन बेटियां घर से दूर जाने के डर से पढ़ाई छोड़ देती थीं और होनहार बेटों के पैर कोटा या पटना की महंगी कोचिंग का खर्च न उठा पाने के कारण थम जाते थे, वहां अब बदलाव की बयार बहने लगी है। सीएम सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य सरकार की नई पहल ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ यानी आदर्श विद्यालय सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक वरदान बनकर आई है, जिनकी आंखों में बड़े सपने तो थे, लेकिन जेब में पैसे नहीं।
बिटिया को नहीं छोड़ना पड़ेगा अपना घर
सोचिए उस पिता की खुशी का ठिकाना क्या होगा, जिसे अब अपनी लाडली को आगे की पढ़ाई कराने के लिए खुद से दूर किसी अनजान शहर नहीं भेजना पड़ेगा। सरकार ने ‘सात निश्चय-3’ (2025–30) के तहत राज्य के सभी 534 प्रखंडों यानी ब्लॉक्स में एक-एक हाई स्कूल और जिला स्कूलों को मिलाकर कुल 544 स्कूलों को आधुनिक रूप दे दिया है। अब गांव के बच्चे अपने घर के पास ही 12वीं तक की ऐसी शिक्षा पा सकेंगे, जो बड़े शहरों के नामी कान्वेंट स्कूलों को टक्कर देगी। पहले से चल रहे 155 सरकारी स्कूलों को भी इसी के तहत अपग्रेड किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण इलाकों की लड़कियों के लिए आगे बढ़ना बेहद आसान हो जाएगा।
बिना फीस के होगी डॉक्टरी-इंजीनियरिंग की पढ़ाई
इस योजना का सबसे दमदार पहलू यह है कि यह अमीर और गरीब के बीच की उस खाई को पाटती है, जहां पैसे की कमी के कारण टैलेंट दम तोड़ देता था। अब इन मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाले आज के दौर के ‘सुदामा’ और ‘एकलव्य’ जैसे होनहार बच्चों को मेडिकल (NEET) और इंजीनियरिंग (JEE) की तैयारी के लिए माता-पिता पर कर्ज का बोझ नहीं डालना पड़ेगा। स्कूल के भीतर ही मुफ्त में हाई-क्लास कोचिंग दी जाएगी। बच्चों की प्रोग्रेस देखने के लिए हर हफ्ते टेस्ट होंगे और अगर कोई बच्चा किसी विषय में कमजोर रह जाता है, तो गुरुजी उसे अलग से रिमेडियल क्लास में दुलार और लगन से समझाएंगे।
सरकारी स्कूल में ‘स्मार्ट’ हुए बच्चे
इन स्कूलों में कदम रखते ही आपको एक बदला हुआ बिहार नजर आएगा। यहां की कक्षाएं अब वैसी नहीं रहीं जहां सिर्फ एक ब्लैकबोर्ड और चाक हुआ करता था। सीएम सम्राट चौधरी की सोच ने सरकारी स्कूलों को पूरी तरह हाईटेक बना दिया है। अब बच्चे किताबों के पन्नों के साथ-साथ स्मार्ट स्क्रीन पर 3D विजुअल्स के जरिए विज्ञान के मुश्किल सिद्धांतों को चुटकियों में समझ रहे हैं। इसके साथ ही, प्रैक्टिकल पढ़ाई के लिए चमचमाती साइंस लैब, कंप्यूटर सीखने के लिए आईसीटी लैब और ज्ञान का खजाना समेटे एक बड़ी लाइब्रेरी हर बच्चे को कुछ नया करने के लिए प्रेरित कर रही है। पारंपरिक किताबी ज्ञान के साथ-साथ बच्चों को कौशल विकास से भी जोड़ा जा रहा है, ताकि वो पढ़ाई पूरी करते ही अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
‘उन्नत शिक्षा’ से रोशन होगा ‘उज्ज्वल भविष्य’
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की आत्मा को समेटे इस कदम से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के हर उस बच्चे की उंगली थाम ली है, जो अभावों में जी रहा था। शिक्षा विभाग के इस प्रयास से अब राज्य का हर बच्चा यह गर्व से कह सकता है कि उसे आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। यह योजना सही मायनों में बिहार को देश का ‘शिक्षा मॉडल’ बनाने की ओर बढ़ाया गया एक ऐसा कदम है, जो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य रोशन करेगा।
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