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Patna : बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक पोस्ट साझा किया है। उन्होंने लिखा कि 2005 से पहले बिहार में बिजली का हाल बेहद खराब था — पटना में मुश्किल से कुछ घंटे बिजली मिलती थी और गांवों में तो अंधेरा ही अंधेरा था।
“तारों पर कपड़े सुखते थे”
नीतीश कुमार ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि उस समय लोग बिजली आने पर दौड़कर मोटर चलाते थे क्योंकि भरोसा नहीं होता था कि बिजली दोबारा कब आएगी। उन्होंने कहा कि खंभों और तारों का इस्तेमाल लोग कपड़े सुखाने के लिए करते थे।
2005 के बाद हुआ बड़ा बदलाव
नीतीश कुमार ने बताया कि 24 नवंबर 2005 को सरकार बनने के बाद उन्होंने बिजली व्यवस्था सुधारने का संकल्प लिया। उन्होंने 2012 में गांधी मैदान से घोषणा की थी कि अगर बिजली व्यवस्था नहीं सुधरी तो वह वोट मांगने नहीं आएंगे। इसी संकल्प के साथ सरकार ने विद्युत बोर्ड को पुनर्गठित कर पांच नई कंपनियां बनाई और गांव-गांव बिजली पहुंचाई।
हर घर बिजली और सौर ऊर्जा
नीतीश कुमार ने कहा कि 2018 तक हर इच्छुक घर में बिजली पहुंचाई गई। आज राज्य में 8,000 मेगावाट से अधिक बिजली सप्लाई हो रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में भी 24 घंटे बिजली उपलब्ध है। कृषि के लिए सस्ती बिजली दी जा रही है और अब सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की योजना पर काम चल रहा है।
125 यूनिट तक फ्री बिजली
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली दे रही है। उन्होंने कहा कि बिहार अब बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो गया है और “लालटेन युग” अब इतिहास बन चुका है।
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