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Home » परीक्षा के दौरान भी स्कूलों में नहीं होगी छुट्टी, सीएम सम्राट ने बनाया तगड़ा प्लान
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परीक्षा के दौरान भी स्कूलों में नहीं होगी छुट्टी, सीएम सम्राट ने बनाया तगड़ा प्लान

September 19, 2026No Comments5 Mins Read
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Patna : परीक्षा की तारीख आते ही किसी जिले का माहौल कैसा होता है, यह बिहार का हर छात्र और शिक्षक अच्छी तरह जानता है। एडमिट कार्ड हाथ में आते ही पहला सवाल दिमाग में घूमता है कि सेंटर कहां पड़ा है? पता चलता है कि शहर से कोसों दूर किसी संकरी गली के स्कूल में, जहां पंखे की घरघराहट के बीच रोल नंबर खोजना भी एक परीक्षा बन जाता है। दूसरी तरफ, स्कूल के बच्चों की मजबूरी यह होती है कि अगले एक हफ्ते तक उनकी कक्षाएं बंद रहेंगी क्योंकि वहां प्रतियोगी परीक्षा का केंद्र बन गया है। सालों से चली आ रही इस दोहरी परेशानी का अब स्थायी समाधान होने जा रहा है।

राज्य सरकार ने तय किया है कि अब परीक्षा कराने के लिए सरकारी स्कूलों पर निर्भरता खत्म की जाएगी। सीएम सम्राट चौधरी के निर्देश पर बिहार के 29 जिलों में 29 हाईटेक परीक्षा भवन और वज्रगृह बनाए जा रहे हैं। इस पूरी परियोजना पर 330 करोड़ 7 लाख रुपये खर्च होंगे। सक्षम प्राधिकार से तकनीकी और प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है, यानी कागजी काम पूरा हो गया है और अब जमीन पर ईंट-गिट्टी जोड़ने का काम तेजी से शुरू होने वाला है।

चार मंजिला इमारत और एक साथ 4,000 कुर्सियां

योजना के मुताबिक, राज्य के 27 जिलों में 29 चुनिंदा जगहों पर चार मंजिला यानी जी प्लस थ्री इमारतें खड़ी की जाएंगी। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह के मुताबिक, हर एक भवन के लिए लगभग एक से डेढ़ एकड़ जमीन की पहचान भी कर ली गई है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एस. एम. के नेतृत्व में यह ढांचा तैयार हो रहा है।

इन भवनों का आकार ऐसा होगा कि एक ही वक्त में 4,000 परीक्षार्थी आराम से बैठकर अपना पर्चा लिख सकेंगे। अब तक बीपीएससी, बीएसएससी, तकनीकी सेवा आयोग या पुलिस भर्ती की परीक्षाएं आती थीं, तो पूरा प्रशासनिक तंत्र स्कूलों के कमरों की गिनती में जुट जाता था। नए भवन बन जाने से यह झंझट खत्म होगा। साथ ही, यह इमारतें जिला मुख्यालय के प्रमुख संस्थानों के करीब बनेंगी, जिससे सुदूर गांवों से बस या ट्रेन पकड़कर आने वाले युवाओं को ऑटो वालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और वे समय पर केंद्र पहुंच सकेंगे।

राजधानी के बापू परीक्षा परिसर की तरह हाईटेक सुरक्षा

अगर आपने पटना के कुम्हरार में बना बापू परीक्षा परिसर देखा है, तो आप समझ सकते हैं कि जिलों में बनने वाले ये भवन कैसे दिखेंगे। साल 2023 में शुरू हुए पांच मंजिला बापू परिसर में एक साथ 16,600 से अधिक छात्र ऑफलाइन और 3,500 छात्र ऑनलाइन परीक्षा दे सकते हैं। ठीक उसी तर्ज पर जिला स्तर के भवनों को भी आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा।

इन इमारतों में 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी रहेगी और हर गतिविधि की रिकॉर्डिंग होगी। इसके साथ ही आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण और आपदा प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम रहेंगे। परीक्षा खत्म होते ही उत्तरपुस्तिकाओं को इधर-उधर ले जाने का जोखिम नहीं रहेगा। कॉपियों की बारकोडिंग, स्कैनिंग, सुरक्षित रख-रखाव और मूल्यांकन का पूरा काम इसी एक परिसर के भीतर शांति से निबटाया जा सकेगा।

न पर्चे लीक होने का डर, न ताले लगने की नौबत

इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे अहम कड़ी है इन भवनों के साथ बनने वाला मजबूत वज्रगृह। परीक्षा की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि प्रश्नपत्र और उत्तरपुस्तिकाएं सुरक्षित रहें। नए भवनों में ऐसा सुरक्षित कमरा तैयार किया जाएगा, जहां गोपनीय सामग्री पूरी सुरक्षा में रखी जा सकेगी। इतना ही नहीं, जब चुनाव का मौसम आएगा, तब भी ईवीएम और चुनाव से जुड़े संवेदनशील दस्तावेजों को रखने के लिए इन्हीं वज्रगृहों का इस्तेमाल हो सकेगा।

इसका सबसे बड़ा फायदा प्राथमिक और मिडिल स्कूलों के बच्चों को मिलेगा। पहले चुनाव या परीक्षा आते ही महीनों तक स्कूलों में अर्धसैनिक बलों का डेरा जम जाता था या शिक्षक व्यवस्था संभालने में लग जाते थे। अब चुनावी और परीक्षा से जुड़े काम इन नए केंद्रों में सिमट जाएंगे, जिससे स्कूलों में नियमित पढ़ाई बिना किसी रुकावट के चलती रहेगी।

परीक्षा नहीं होगी तो क्या भवन खाली रहेंगे?

सवाल यह भी उठता है कि जब कोई परीक्षा नहीं होगी, तब इतनी बड़ी चार मंजिला इमारतों का क्या होगा? सरकार ने इसका भी व्यावहारिक हल निकाला है। जिस स्कूल या कॉलेज परिसर में यह भवन बनेगा, उसके संचालन और देखरेख का जिम्मा भी उसी संस्थान के पास रहेगा।

साल के जिन महीनों में प्रतियोगी परीक्षाएं नहीं होंगी, उन दिनों संबंधित स्कूल या कॉलेज इन भवनों के बड़े हॉलों में अपनी आंतरिक परीक्षाएं करा सकेंगे। इसके अलावा विज्ञान प्रदर्शनी, खेलकूद से जुड़े इंडोर आयोजन, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं या शिक्षकों के बड़े सम्मेलन भी यहां आसानी से आयोजित किए जा सकेंगे। राज्य के 9 प्रमंडलीय मुख्यालयों में ऐसे केंद्र पहले से काम कर रहे हैं, जहां न सिर्फ परीक्षाएं होती हैं बल्कि छात्रों को मुफ्त कोचिंग भी दी जा रही है। अब बाकी 29 जिलों में भी जब यह काम पूरा हो जाएगा, तो बिहार की परीक्षा प्रणाली पूरी तरह आत्मनिर्भर और आधुनिक नजर आएगी।

इसे भी पढ़ें : स्कूल, अस्पताल और पंचायत भवन… अब हर गांव का होगा कायाकल्प, सीएम सम्राट ने तय की डेडलाइन

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