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Patna : बिहार में गंभीर अपराधों की जांच को अब फॉरेंसिक साइंस के जरिए और मजबूत बनाया जाएगा। सूबे में फॉरेंसिक लैब को हाईटेक करने, नए संसाधन जुटाने और जांच व्यवस्था को आधुनिक रंग-रूप देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इसी कड़ी में 26 सितंबर को बिहार के गृह विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार और गुजरात के पूर्व डीजीपी व सीबीआई के पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ. केशव कुमार के बीच एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में राज्य के मौजूदा फॉरेंसिक ढांचे की कमियों, जरूरी संसाधनों और भविष्य की जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की गई।
गुजरात और असम के मॉडल से सीखेगा बिहार
रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी डॉ. केशव कुमार ने असम और गुजरात में फॉरेंसिक जांच व्यवस्था को मजबूत बनाने में लंबा काम किया है। बैठक के दौरान उन्होंने अपने इन्हीं जमीनी अनुभवों को साझा किया। उन्होंने साफ कहा कि बिहार को भी एक ठोस फॉरेंसिक रोडमैप तैयार करने की जरूरत है, ताकि कोर्ट में मुकदमों को पुख्ता सबूतों के साथ साबित किया जा सके। चर्चा के दौरान लैब के आधुनिकीकरण, जरूरी स्टाफ की तैनाती, उच्च गुणवत्ता मानकों को लागू करने और वैज्ञानिक साक्ष्यों के सही इस्तेमाल पर जोर दिया गया।
अफसरों और कर्मचारियों को मिलेगी स्पेशल ट्रेनिंग
फॉरेंसिक जांच सिर्फ आधुनिक मशीनों से नहीं, बल्कि कुशल जानकारों से मजबूत होती है। बैठक में इस बात पर खास ध्यान दिया गया कि राज्य के फॉरेंसिक अधिकारियों और जांच में जुटे कर्मचारियों को आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग दी जाए। अपराध स्थल से सुराग जुटाने से लेकर लैब में उनकी सटीक जांच करने तक, हर स्तर पर क्षमता बढ़ाने की बात सामने आई। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था के पूरी तरह तैयार होने से न सिर्फ कानून-व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि जनस्वास्थ्य और संगीन अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़ितों को जल्द इंसाफ भी मिल सकेगा।
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