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Patna : किसी अपने को खोने का दर्द शायद शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। ऐसे वक्त में परिवार के सामने कई भावनाएं होती हैं। लेकिन अगर उसी मुश्किल घड़ी में लिया गया एक फैसला किसी दूसरे परिवार के घर फिर से खुशियां लौटा दे तो इससे बड़ी इंसानियत की मिसाल क्या होगी। अंगदान कुछ ऐसा ही मौका देता है। बिहार में अब अंगदान को लेकर लोगों की सोच बदलने और उन्हें इसके लिए आगे लाने की तैयारी शुरू हो गई है। सीएम सम्राट चौधरी ने रविवार को पटना में आयोजित अंगदान दिवस के कार्यक्रम में कहा कि राज्य में अंगदान के प्रति बड़े स्तर पर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। कोशिश यह होगी कि लोगों को सिर्फ अंगदान के बारे में जानकारी ही न हो, बल्कि वे पहले से इसके लिए संकल्प भी लें। दधीचि देहदान समिति, बिहार की ओर से बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स परिसर में आयोजित चतुर्थ राष्ट्रीय अंगदान दिवस एवं द्वादश अंतर्राष्ट्रीय अंगदान दिवस के संयुक्त कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह की शुरुआत की। कार्यक्रम में अंगदाताओं के परिजन, चिकित्सक, जनप्रतिनिधि और दधीचि समिति से जुड़े लोग बड़ी संख्या में मौजूद थे।

जब किसी की जिंदगी बचाने का मौका मिले तो पीछे क्यों हटें?
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि मृत्यु के बाद किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में खुशहाली लाने से ज्यादा सुखद और मानवीय अनुभव किसी परिवार के लिए नहीं हो सकता। अंगदान सिर्फ शरीर का कोई हिस्सा किसी जरूरतमंद को देना नहीं है, बल्कि यह किसी को जिंदगी की एक नई उम्मीद देने जैसा है। उन्होंने कहा कि समाज में अंगदान के बारे में लोगों को जानकारी जरूर है, लेकिन जानकारी होने और इसके लिए आगे आने में अभी भी बड़ा अंतर है। खासकर मृत्यु के समय परिवार भावुक होता है। उस समय अचानक अंगदान का फैसला लेना आसान नहीं होता। इसलिए लोगों के बीच पहले से ऐसा माहौल बनाना जरूरी है, जिसमें वे अंगदान के महत्व को समझें और परिवार के साथ इस बारे में पहले ही बातचीत कर सकें।
मुख्यमंत्री ने किडनी और नेत्रदान का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की किडनी जरूरतमंद को नया जीवन दे सकती है और नेत्रदान से किसी ऐसे व्यक्ति की जिंदगी में रोशनी आ सकती है, जो दुनिया देखने का इंतजार कर रहा है। यही वजह है कि सरकार अब अंगदान की बात को अस्पतालों और स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़कर आम लोगों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है।

जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज तक लोगों को समझाएगी दधीचि समिति
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में दधीचि देहदान समिति को सहयोगी के रूप में जोड़ने की पहल की जाएगी। जिला अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों में समिति के सदस्यों की मदद से लोगों को अंगदान के बारे में जागरूक किया जाएगा। इसका मकसद यह है कि अंगदान की बात केवल किसी बड़े कार्यक्रम या अभियान तक सीमित न रहे। जब कोई व्यक्ति इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे, उसके परिजन वहां हों या स्वास्थ्यकर्मी लोगों के संपर्क में आएं, तो उन्हें अंगदान के महत्व के बारे में भी जानकारी मिल सके।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर अंगदान के क्षेत्र में किसी कानून में बदलाव की जरूरत महसूस होती है तो सरकार समिति के साथ बैठकर इस पर आवश्यक पहल करेगी। निजी अस्पतालों में भी अंगदान के प्रति जागरूकता अभियान चलाने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम हो रहा है। ऐसे में दधीचि देहदान समिति का अभियान सरकार के लिए सहयोग भर नहीं है। यह पूरे समाज और मानवता की सेवा का अभियान है। सरकार चाहती है कि इस काम का ज्यादा से ज्यादा फायदा जरूरतमंद लोगों को मिले।

सुशील मोदी की याद आई, अंगदान के लिए काम करने वालों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने दधीचि देहदान समिति से जुड़े पूर्व उपमुख्यमंत्री स्वर्गीय सुशील मोदी को भी याद किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सुशील मोदी के मार्गदर्शन में अंगदान के क्षेत्र में काम किया गया। इस क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। समारोह में असम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने बिहार पहुंचने पर उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लक्ष्मण आचार्य का बिहार से विशेष जुड़ाव है और उनका राज्य में आना बिहार के लिए गौरव की बात है। मुख्यमंत्री ने उनसे लगातार बिहार आते रहने और राज्य के विकास में अपना सहयोग देते रहने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में अंगदान से जुड़ी एक वीडियो फिल्म भी दिखाई गई। इसमें स्वर्गीय सुशील मोदी और दधीचि देहदान समिति के सदस्यों की ओर से किए जा रहे कार्यों को दिखाया गया। अंगदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले महाधिवक्ता एसडी संजय, विधायक संजीव चौरसिया, महापौर सीता साहू और आईजीआईएमएस के उपनिदेशक डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा समेत अन्य लोगों को मुख्यमंत्री ने मोमेंटो देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने अंगदान पर आधारित पत्रिका ‘दधीचि दर्पण’ का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम से पहले उन्होंने नेत्रदाताओं और देहदाताओं को सामूहिक रूप से पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

समारोह में पूर्व राज्यपाल और दधीचि देहदान समिति के अध्यक्ष गंगा प्रसाद, भाजपा के संगठन महामंत्री भीखूभाई दलसानिया, समिति के वरीय उपाध्यक्ष डॉ. सुभाष प्रसाद, पद्मश्री निलेश मांडलेवाला, समिति के महासचिव पद्मश्री बिमल जैन, प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. अनिल गुप्ता, विधायक श्याम रजक, विधायक संजय गुप्ता समेत कई जनप्रतिनिधि और चिकित्सक मौजूद रहे।
बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारी, दधीचि समिति के सदस्य और अंगदाताओं के परिजन भी बड़ी संख्या में कार्यक्रम में पहुंचे। समारोह का संदेश साफ था कि अंगदान की बात सिर्फ अस्पतालों या सरकारी अभियानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे घर-घर तक पहुंचाना होगा, ताकि जिंदगी की आखिरी घड़ी में लिया गया एक फैसला किसी दूसरे इंसान के लिए नई सुबह बन सके। मुख्यमंत्री ने भी इसी सोच के साथ कहा कि सामाजिक सुधार, मानवता की सेवा और अंगदान के प्रति जनजागरण के लिए बिहार में व्यापक अभियान चलाया जाएगा। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प में अंगदान और नेत्रदान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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