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Patna : विश्व स्तनपान सप्ताह 2025 के अवसर पर बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग के तहत समेकित बाल विकास सेवाएं (ICDS) और यूनिसेफ के सहयोग से पटना में एक राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य स्तनपान को बढ़ावा देना, माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना और इस दिशा में बेहतर योजनाएं तैयार करना था। इस साल का मुख्य विषय रहा – “स्तनपान में निवेश, भविष्य में निवेश”। इसके ज़रिए यह संदेश दिया गया कि स्तनपान न सिर्फ बच्चे बल्कि माँ और पूरे समाज के लिए ज़रूरी है।
चिंताजनक हैं बिहार के आंकड़े
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के मुताबिक, बिहार में सिर्फ 31.1% बच्चों को जन्म के पहले घंटे में स्तनपान मिल पाता है, जबकि 59% बच्चों को छह महीने तक केवल माँ का दूध दिया जाता है। इस स्थिति में सुधार के लिए जागरूकता, समर्थन और माताओं के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना जरूरी बताया गया।
अधिकारियों ने दिए अहम संदेश
कार्यशाला की मुख्य अतिथि समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी (IAS) ने कहा कि स्तनपान एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन इसे सही तरीके से अपनाना भी ज़रूरी है। उन्होंने कहा, “माताओं को छह महीने नहीं, बल्कि दो साल तक परिवार और समाज से सहयोग मिलना चाहिए। माँ के बलिदान को समझना और सम्मान देना हम सबकी जिम्मेदारी है।” उन्होंने यह भी कहा कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को मातृत्व लाभ मिलना चाहिए और इस दिशा में ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। साथ ही CDPOs को निर्देश दिया कि स्तनपान से जुड़ी जानकारी को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाया जाए।
ICDS के निदेशक अमित पांडे, IAS ने कहा कि बच्चों के पोषण को सुधारने के लिए सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारियों से आह्वान किया कि वे आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तक सही जानकारी पहुंचाएं।
यूनिसेफ ने गिनाई उपलब्धियां
यूनिसेफ बिहार प्रमुख मार्गरेट ग्वाडा ने बताया कि राज्य में IYCF (Infant and Young Child Feeding) केंद्रों की संख्या 2020-21 में 44 थी, जो अब बढ़कर 423 हो गई है। साथ ही 305 सरकारी अस्पतालों में स्तनपान के लिए विशेष कोने बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि कामकाजी महिलाओं को सहयोग देना और स्तनपान को सामाजिक मान्यता देना बेहद जरूरी है।
कार्यशाला में हुईं कई गतिविधियां
कार्यशाला में मेंटीमीटर क्विज़, फील्ड अनुभवों पर आधारित वीडियो और पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं। इन चर्चाओं में डॉक्टरों, विशेषज्ञों और विभिन्न संगठनों ने हिस्सा लिया। इसमें स्तनपान से जुड़े मिथक, सामाजिक व व्यवहारिक चुनौतियों और समाधान पर चर्चा की गई।
कार्यशाला के दूसरे सत्र में SGPA (Sustainable Growth and Performance Accountability) फ्रेमवर्क के तहत योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन पर चर्चा हुई।
सभी ने लिया संकल्प
कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि राज्य के हर बच्चे को जीवन की अच्छी शुरुआत देने और स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए सभी विभाग मिलकर लगातार काम करेंगे।
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