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Home » जंगली हाथियों ने ली चार बच्चों के बाप की जान, तीन घर किए तहस-नहस
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जंगली हाथियों ने ली चार बच्चों के बाप की जान, तीन घर किए तहस-नहस

July 22, 2026No Comments4 Mins Read
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Chaibasa : जंगली हाथियों ने बीती रात जगन्नाथपुर प्रखंड के चार गांवों में जमकर उत्पात मचाया। बुढ़ाकमान, मुगादिघिया, तेंतोड़ीपोसी और लुतुसाई गांव में हाथियों के झुंड ने पूरी रात तबाही मचाई। इस दौरान बुढ़ाकमान गांव में 35 साल के चंद्रमोहन सिंकू की जान चली गई। हाथी ने उन्हें सूंड में लपेटकर जमीन पर पटक-पटककर मार डाला। चंद्रमोहन चार बच्चों के पिता थे।

इसके बाद हाथियों का झुंड एक के बाद एक गांवों में पहुंचता रहा। तीन ग्रामीणों के घरों को तहस-नहस कर दिया। खेतों में लगी फसलों और बागवानी को रौंद डाला। एक किसान के घर में रखा करीब तीन क्विंटल धान भी हाथी खा गए। पूरी रात ग्रामीण मशाल, टॉर्च और पटाखों के सहारे हाथियों को गांव से भगाने की कोशिश करते रहे, लेकिन दहशत के बीच किसी की आंख नहीं लगी।

रात करीब 1 बजे चंद्रमोहन पर टूट पड़ा हाथी

सबसे दर्दनाक घटना जिला परिषद भाग-1 के सदस्य मानसिंह तिरिया के गांव बुढ़ाकमान में हुई। बताया गया कि मंगलवार रात करीब एक बजे चंद्रमोहन सिंकू का सामना जंगली हाथी से हो गया। हाथी ने उन्हें अपनी सूंड में लपेट लिया और कई बार जमीन पर पटक दिया।

हमले में चंद्रमोहन गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही जिला परिषद सदस्य मानसिंह तिरिया मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से चंद्रमोहन को तत्काल जगन्नाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

चंद्रमोहन की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। चार बच्चों के पिता की मौत से पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।

बुढ़ाकमान से निकले, तीन गांवों में पहुंचकर मचाई तबाही

बुढ़ाकमान गांव में घटना के बाद हाथियों का झुंड मुगादिघिया, तेंतोड़ीपोसी और लुतुसाई गांव की ओर बढ़ गया। यहां भी हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया। तीन ग्रामीणों के घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। हाथियों ने खेतों में लगी फसलों को रौंद डाला। बागवानी को भी भारी नुकसान पहुंचाया। एक किसान के घर में रखा करीब तीन क्विंटल धान हाथी खा गए। घर में रखे अन्य सामान को भी नुकसान पहुंचा।

मशाल, टॉर्च और पटाखे लेकर रातभर जुटे रहे ग्रामीण

हाथियों के गांव में घुसने के बाद ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने घरों से बाहर निकले और हाथियों को भगाने के लिए मशाल और टॉर्च का सहारा लिया। कई ग्रामीणों ने पटाखे फोड़कर हाथियों को दूर भगाने की कोशिश की। लेकिन हाथियों का झुंड लगातार गांवों के आसपास घूमता रहा। ग्रामीण पूरी रात जागते रहे। लोगों को डर था कि हाथी किसी और घर को भी निशाना बना सकते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। आए दिन हाथी गांवों में घुसकर फसल और घरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अब लोगों की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है।

वन विभाग ने पत्नी को दी 1 लाख रुपए की तत्काल सहायता

घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और नुकसान का आकलन शुरू किया। विभाग की ओर से मृतक चंद्रमोहन सिंकू की पत्नी जेमा सिंकू को तत्काल 1 लाख रुपए की अग्रिम सहायता राशि दी गई। यह राशि जगन्नाथपुर स्वास्थ्य केंद्र परिसर में दी गई। इस दौरान जिला परिषद सदस्य मानसिंह तिरिया भी मौजूद थे।

ग्रामीणों की मांग, मुआवजे के साथ हाथियों से स्थायी राहत मिले

ग्रामीणों ने मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। इसके साथ ही हाथियों द्वारा क्षतिग्रस्त किए गए घरों और बर्बाद हुई फसलों का सही आकलन कर मुआवजा देने की मांग की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि हर बार हाथी आते हैं, फसल और घरों को नुकसान पहुंचाते हैं और लोगों की जान खतरे में पड़ जाती है। ऐसे में सिर्फ मुआवजा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। वन विभाग को हाथियों के गांवों में आने से रोकने और ग्रामीणों की जान बचाने के लिए स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए।

इसे भी पढ़ें : रांची के कोकर में जमीन कारोबारी रमेश ठाकुर की ह’त्या, घर में घुस कर मा’र डाला

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