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New Delhi : विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को उनके नाम का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि गठबंधन के सभी दलों ने एकमत होकर उनके नाम पर सहमति जताई है। जस्टिस रेड्डी 21 अगस्त को नामांकन दाखिल करेंगे। इससे पहले दिल्ली में 10 राजाजी मार्ग पर विपक्षी दलों की बैठक हुई थी। बैठक के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि “बी. सुदर्शन रेड्डी भारत के सबसे प्रतिष्ठित और प्रगतिशील न्यायविदों में से एक हैं। वे हमेशा सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के समर्थक रहे हैं। उनका करियर बेहद लंबा और सम्मानित रहा है। उन्होंने गरीबों और वंचितों की आवाज उठाई और संविधान व मौलिक अधिकारों की रक्षा की।”
एनडीए की ओर से सीपी राधाकृष्णन हैं उम्मीदवार
इस चुनाव में जस्टिस रेड्डी का मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन से होगा। वे वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं और तमिलनाडु से आते हैं। आरएसएस से जुड़े रहे राधाकृष्णन भाजपा के एक अनुभवी नेता माने जाते हैं। उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने कहा कि वे सभी दलों से समर्थन की अपील करते हैं। वहीं विपक्ष के ऐलान के बाद तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) भी जस्टिस रेड्डी का समर्थन करेगी।
जस्टिस रेड्डी का जीवन और करियर
जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी का जन्म 8 जुलाई 1946 को आंध्र प्रदेश के रंगारेड्डी जिले के अकुला मायलाराम गांव में एक कृषक परिवार में हुआ था। उन्होंने हैदराबाद में पढ़ाई की और 1971 में उस्मानिया विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की। उसी साल उन्होंने वकालत शुरू की और वरिष्ठ अधिवक्ता के. प्रताप रेड्डी के चैंबर से जुड़े।
उन्होंने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट और नगर दीवानी न्यायालयों में कई महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी की। 1988 में वे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में सरकारी वकील नियुक्त हुए। वे राजस्व विभाग के प्रभारी भी रहे और बाद में केंद्र सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील भी बने।
जस्टिस रेड्डी शिक्षा क्षेत्र से भी जुड़े रहे। वे एवी एजुकेशन सोसाइटी के सचिव और संवाददाता रहे। 1993-94 में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष चुने गए। उसी समय वे उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद के कानूनी सलाहकार और स्थायी वकील भी नियुक्त हुए।
उनका न्यायिक करियर 2 मई 1995 से शुरू हुआ, जब वे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने। इसके बाद 2005 में उन्हें गौहाटी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। 2007 में वे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने और 2011 में सेवानिवृत्त हुए।
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