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Home » बंदूक का गुरूर खत्म, हाथों में मुख्यधारा की पतवार… झारखंड में 16 खूंखार नक्सलियों ने डाला हथियार
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बंदूक का गुरूर खत्म, हाथों में मुख्यधारा की पतवार… झारखंड में 16 खूंखार नक्सलियों ने डाला हथियार

July 28, 2026No Comments6 Mins Read
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झारखंड
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अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :

Ranchi, Pawan Thakur : सारंडा और कोल्हान के वो दुर्गम जंगल, जहां कभी गोलियों की गूंज और बारूद की महक हवाओं में घुली रहती थी, मंगलवार को एक अलग ही बदलाव की गवाही दे रहे थे। जिन रास्तों पर कभी सुरक्षाबलों के लिए बिछाए गए बारूदी सुरंगों का खौफ रहता था, उन्हीं रास्तों से निकलकर माओवादी संगठन के 16 खूंखार नक्सली पुलिस मुख्यालय पहुंचे। सालों से जंगलों में फरारी काट रहे इन नक्सलियों के चेहरे पर बंदूक का वह पुराना गुरूर गायब था, और उसकी जगह समाज की मुख्यधारा में लौटने की एक खामोश राहत दिख रही थी। ऑपरेशन ‘नवजीवन-II’ के तहत हुए इस सामूहिक आत्मसमर्पण ने यह साफ कर दिया है कि झारखंड के जंगलों में लंबे समय से चला आ रहा लाल आतंक का खूनी दौर अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

डीजीपी और सीआरपीएफ आईजी ने साफ की अभियान की तस्वीर

इस बड़ी कामयाबी पर बात करते हुए झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्र ने बताया कि झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन और झारखंड जगुआर के संयुक्त अभियानों ने माओवादी संगठन को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया है। डीजीपी के मुताबिक, सुरक्षाबलों की ओर से लगातार बढ़ रहे दबाव, संगठन के भीतर गहराते असंतोष और राज्य सरकार की बेहतर आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति के कारण नक्सली अब हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिमी सिंहभूम और चाईबासा के इलाकों में अब नक्सली गतिविधियां अंतिम चरण में हैं।

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झारखंड में ‘ऑपरेशन नवजीवन-II’ के तहत 16 नक्सलियों ने किया सरेंडर
15 लाख के इनामी समेत मिसिर बेसरा दस्ते के कई बड़े चेहरे मुख्यधारा में लौटे। 11 हथियार और 1562 गोलियां भी बरामद।
DGP तादाशा मिश्र क्या बोलीं… #Jharkhand #NaxalSurrender #NewsSamvad #LatestNews #JharkhandPolice pic.twitter.com/SYp2zGwl21

— News Samvad (@newssamvaad) July 28, 2026

वहीं सीआरपीएफ के आईजी साकेत सिंह ने जानकारी दी कि संयुक्त अभियानों की वजह से माओवादी दस्तों का नेटवर्क बिखर चुका है। इसी कड़ी में झारखंड में सक्रिय रहे इसी दस्ते के आठ अन्य कमांडरों और सदस्यों ने छत्तीसगढ़ में भी पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है।

सारंडा के अभेद्य किले में सेंध, ढह गया शीर्ष नेतृत्व का भरोसा

सरेंडर करने वाले यह कोई साधारण कैडर नहीं थे, बल्कि माओवादी संगठन की रीढ़ माने जाने वाले जमीनी कमांडर थे। इनमें 15 लाख का इनामी रीजनल कमेटी सदस्य संतोष महतो उर्फ बासुदेव दा, 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर चंदन लोहरा और 5-5 लाख के इनामी सब जोनल कमांडर शामिल हैं। ये सभी माओवादी संगठन के शीर्ष नेता मिसिर बेसरा उर्फ सागर जी और असीम मंडल के बेहद करीबी और भरोसेमंद सिपहसालार माने जाते थे। कोल्हान और सारंडा के जिन इलाकों को माओवादी अपना सुरक्षित गढ़ समझते थे, सुरक्षाबलों की संयुक्त टीमों ने वहां ऐसा चक्रव्यूह रचा कि नक्सलियों का बचना नामुमकिन हो गया।

आत्मसमर्पण करने वाले 16 नक्सलियों की लिस्ट (झारखंड)

क्रमांकनामपद/रैंकइनामी राशि
1संतोष उर्फ बासुदेव दा उर्फ गांधी उर्फ दिलीप उर्फ संजय महतो उर्फ बासुकू उर्फ श्यामरीजनल कमेटी सदस्य (RCM)₹15 लाख
2संतोष मांझी उर्फ जगबंधुजोनल कमेटी सदस्य (ZCM)–
3चंदन लोहराजोनल कमेटी सदस्य (ZCM)₹10 लाख
4जयकांत मुंडा उर्फ गुंगा उर्फ बंगालीजोनल कमेटी सदस्य (ZCM)–
5राजनाथ हांसदा उर्फ गुना हांसदासब जोनल कमेटी सदस्य (SZCM)–
6अनिल तुरी उर्फ उज्ज्वलसब जोनल कमेटी सदस्य (SZCM)₹5 लाख
7सुखलाल बिरजिया उर्फ अकेलासब जोनल कमेटी सदस्य (SZCM)₹5 लाख
8सुदेश होनहागा उर्फ सोनाराम होनहागा उर्फ सोनाएरिया कमेटी सदस्य (ACM)₹2 लाख
9एतवारी मांझी उर्फ सोनोत उर्फ संत उर्फ शनिचरवाएरिया कमेटी सदस्य (ACM)–
10देवान मुर्मू उर्फ शनिचरएरिया कमेटी सदस्य (ACM)–
11सुमित्रा सुरिनएरिया कमेटी सदस्य (ACM)–
12चंपा मांझियाइन उर्फ गुड़िया (संथाल)कैडर सदस्य–
13रिसिवएरिया कमेटी सदस्य (ACM)–
14सालेमी मुंडा उर्फ पारुलएरिया कमेटी सदस्य (ACM)–
15मुन्नी सुरिन उर्फ मुरीन सुरिनकैडर सदस्य–
16सीता मुंडाकैडर सदस्य–

छत्तीसगढ़ में 8 नक्सलियों ने किया सरेंडर, झारखंड में थे एक्टिव

क्रमांकनामपद/रैंकजिला
1अश्विन उर्फ लच्छू कोरसाजोनल कमेटी सदस्य (ZCM)बीजापुर, छत्तीसगढ़
2सोहन पुनेमएरिया कमेटी सदस्य (ACM)बीजापुर, छत्तीसगढ़
3रीता उर्फ मंगली कुंजामएरिया कमेटी सदस्य (ACM)बीजापुर, छत्तीसगढ़
4अनुषा कुंजामएरिया कमेटी सदस्य (ACM)सुकमा, छत्तीसगढ़
5रजनी मुडकेमएरिया कमेटी सदस्य (ACM)बीजापुर, छत्तीसगढ़
6राहत मांडवीसदस्यनारायणपुर, छत्तीसगढ़
7सुबनी (पति – अश्विन)सदस्यबीजापुर, छत्तीसगढ़
8जेलानी (पति – सोहन)सदस्यबीजापुर, छत्तीसगढ़

जंगल के कठिन जीवन से तंग आकर छोड़ा हिंसा का रास्ता

सालों तक बंदूक के दम पर अपनी समानांतर सरकार चलाने का दावा करने वाले इन नक्सलियों का अचानक हृदय परिवर्तन नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे जंगलों की कड़वी सच्चाई है। सुरक्षाबलों के नए कैंपों के बनने से नक्सलियों के छिपने और राशन-पानी जुटाने के ठिकाने खत्म हो गए। इसके साथ ही संगठन के भीतर शीर्ष नेताओं की मनमानी, निचले कैडरों का शोषण और लगातार बढ़ता अविश्वास उन्हें अंदर से तोड़ रहा था। एक तरफ जंगलों में हर पल मंडराता मौत का खतरा था, तो दूसरी तरफ राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का खुला दरवाजा। बेहतर जीवन, अपने परिवार के पास लौटने की चाह और बच्चों के भविष्य की चिंता ने इन्हें हथियार डालने पर मजबूर कर दिया।

मेज पर सजे एके-47 और गोलियों के ढेर से बयां हुई सरेंडर की कहानी

मंगलवार को जब यह 16 नक्सली पुलिस अधिकारियों के सामने आए, तो उन्होंने सिर्फ अपनी मौजूदगी दर्ज नहीं कराई, बल्कि अपने साथ उन घातक हथियारों को भी जमा करा दिया जो सालों से बेगुनाहों और सुरक्षाबलों का खून बहा रहे थे। पुलिस के सामने 2 एके-47, 6 इंसास, 1 एम-16, 1 एचके-33 और 1 यूएस कार्बाइन समेत कुल 11 अत्याधुनिक राइफलें रखी गईं। इसके साथ ही 38 मैगजीन और 1562 जिंदा गोलियां भी सौंपी गईं। इन हथियारों का पुलिस के कब्जे में आना माओवादियों की मारक क्षमता पर बहुत बड़ा प्रहार है। हथियार सौंपने वालों में 11 पुरुषों के साथ 5 महिला नक्सली भी शामिल हैं, जो जंगलों की अमानवीय जिंदगी से तंग आकर मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला कर चुकी थीं।

साल 2026 में बिखरता माओवादी नेटवर्क, अब खातमे की ओर कदम

यह सरेंडर केवल एक दिन की सफलता नहीं है, बल्कि साल 2026 में सुरक्षाबलों द्वारा लगातार चलाए गए आक्रामक अभियानों का सीधा परिणाम है। इस साल अब तक 93 नक्सलियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है, 45 नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर चुके हैं और मुठभेड़ों में 22 खूंखार नक्सली मारे गए हैं। मई के महीने में 27 नक्सलियों का एक साथ सरेंडर होना और फिर शीर्ष कमांडरों के खिलाफ हुई बड़ी कार्रवाइयों ने माओवादी ढांचे की कमर पूरी तरह तोड़ दी है। पुलिस प्रशासन ने बचे हुए नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हिंसा और भय का रास्ता छोड़कर सरकार की योजना का लाभ उठाएं और समाज में सम्मानजनक जीवन की शुरुआत करें।

इसे भी पढ़ें : 8 रोज में 12 को डसा, अब शिकंजे में आया खतरनाक स्पेक्टैकल कोबरा

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