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Ranchi, Pawan Thakur : सारंडा और कोल्हान के वो दुर्गम जंगल, जहां कभी गोलियों की गूंज और बारूद की महक हवाओं में घुली रहती थी, मंगलवार को एक अलग ही बदलाव की गवाही दे रहे थे। जिन रास्तों पर कभी सुरक्षाबलों के लिए बिछाए गए बारूदी सुरंगों का खौफ रहता था, उन्हीं रास्तों से निकलकर माओवादी संगठन के 16 खूंखार नक्सली पुलिस मुख्यालय पहुंचे। सालों से जंगलों में फरारी काट रहे इन नक्सलियों के चेहरे पर बंदूक का वह पुराना गुरूर गायब था, और उसकी जगह समाज की मुख्यधारा में लौटने की एक खामोश राहत दिख रही थी। ऑपरेशन ‘नवजीवन-II’ के तहत हुए इस सामूहिक आत्मसमर्पण ने यह साफ कर दिया है कि झारखंड के जंगलों में लंबे समय से चला आ रहा लाल आतंक का खूनी दौर अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।
डीजीपी और सीआरपीएफ आईजी ने साफ की अभियान की तस्वीर
इस बड़ी कामयाबी पर बात करते हुए झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्र ने बताया कि झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन और झारखंड जगुआर के संयुक्त अभियानों ने माओवादी संगठन को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया है। डीजीपी के मुताबिक, सुरक्षाबलों की ओर से लगातार बढ़ रहे दबाव, संगठन के भीतर गहराते असंतोष और राज्य सरकार की बेहतर आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति के कारण नक्सली अब हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिमी सिंहभूम और चाईबासा के इलाकों में अब नक्सली गतिविधियां अंतिम चरण में हैं।
झारखंड में ‘ऑपरेशन नवजीवन-II’ के तहत 16 नक्सलियों ने किया सरेंडर
15 लाख के इनामी समेत मिसिर बेसरा दस्ते के कई बड़े चेहरे मुख्यधारा में लौटे। 11 हथियार और 1562 गोलियां भी बरामद।
DGP तादाशा मिश्र क्या बोलीं… #Jharkhand #NaxalSurrender #NewsSamvad #LatestNews #JharkhandPolice pic.twitter.com/SYp2zGwl21— News Samvad (@newssamvaad) July 28, 2026
वहीं सीआरपीएफ के आईजी साकेत सिंह ने जानकारी दी कि संयुक्त अभियानों की वजह से माओवादी दस्तों का नेटवर्क बिखर चुका है। इसी कड़ी में झारखंड में सक्रिय रहे इसी दस्ते के आठ अन्य कमांडरों और सदस्यों ने छत्तीसगढ़ में भी पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है।
सारंडा के अभेद्य किले में सेंध, ढह गया शीर्ष नेतृत्व का भरोसा
सरेंडर करने वाले यह कोई साधारण कैडर नहीं थे, बल्कि माओवादी संगठन की रीढ़ माने जाने वाले जमीनी कमांडर थे। इनमें 15 लाख का इनामी रीजनल कमेटी सदस्य संतोष महतो उर्फ बासुदेव दा, 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर चंदन लोहरा और 5-5 लाख के इनामी सब जोनल कमांडर शामिल हैं। ये सभी माओवादी संगठन के शीर्ष नेता मिसिर बेसरा उर्फ सागर जी और असीम मंडल के बेहद करीबी और भरोसेमंद सिपहसालार माने जाते थे। कोल्हान और सारंडा के जिन इलाकों को माओवादी अपना सुरक्षित गढ़ समझते थे, सुरक्षाबलों की संयुक्त टीमों ने वहां ऐसा चक्रव्यूह रचा कि नक्सलियों का बचना नामुमकिन हो गया।
आत्मसमर्पण करने वाले 16 नक्सलियों की लिस्ट (झारखंड)
| क्रमांक | नाम | पद/रैंक | इनामी राशि |
|---|---|---|---|
| 1 | संतोष उर्फ बासुदेव दा उर्फ गांधी उर्फ दिलीप उर्फ संजय महतो उर्फ बासुकू उर्फ श्याम | रीजनल कमेटी सदस्य (RCM) | ₹15 लाख |
| 2 | संतोष मांझी उर्फ जगबंधु | जोनल कमेटी सदस्य (ZCM) | – |
| 3 | चंदन लोहरा | जोनल कमेटी सदस्य (ZCM) | ₹10 लाख |
| 4 | जयकांत मुंडा उर्फ गुंगा उर्फ बंगाली | जोनल कमेटी सदस्य (ZCM) | – |
| 5 | राजनाथ हांसदा उर्फ गुना हांसदा | सब जोनल कमेटी सदस्य (SZCM) | – |
| 6 | अनिल तुरी उर्फ उज्ज्वल | सब जोनल कमेटी सदस्य (SZCM) | ₹5 लाख |
| 7 | सुखलाल बिरजिया उर्फ अकेला | सब जोनल कमेटी सदस्य (SZCM) | ₹5 लाख |
| 8 | सुदेश होनहागा उर्फ सोनाराम होनहागा उर्फ सोना | एरिया कमेटी सदस्य (ACM) | ₹2 लाख |
| 9 | एतवारी मांझी उर्फ सोनोत उर्फ संत उर्फ शनिचरवा | एरिया कमेटी सदस्य (ACM) | – |
| 10 | देवान मुर्मू उर्फ शनिचर | एरिया कमेटी सदस्य (ACM) | – |
| 11 | सुमित्रा सुरिन | एरिया कमेटी सदस्य (ACM) | – |
| 12 | चंपा मांझियाइन उर्फ गुड़िया (संथाल) | कैडर सदस्य | – |
| 13 | रिसिव | एरिया कमेटी सदस्य (ACM) | – |
| 14 | सालेमी मुंडा उर्फ पारुल | एरिया कमेटी सदस्य (ACM) | – |
| 15 | मुन्नी सुरिन उर्फ मुरीन सुरिन | कैडर सदस्य | – |
| 16 | सीता मुंडा | कैडर सदस्य | – |
छत्तीसगढ़ में 8 नक्सलियों ने किया सरेंडर, झारखंड में थे एक्टिव
| क्रमांक | नाम | पद/रैंक | जिला |
|---|---|---|---|
| 1 | अश्विन उर्फ लच्छू कोरसा | जोनल कमेटी सदस्य (ZCM) | बीजापुर, छत्तीसगढ़ |
| 2 | सोहन पुनेम | एरिया कमेटी सदस्य (ACM) | बीजापुर, छत्तीसगढ़ |
| 3 | रीता उर्फ मंगली कुंजाम | एरिया कमेटी सदस्य (ACM) | बीजापुर, छत्तीसगढ़ |
| 4 | अनुषा कुंजाम | एरिया कमेटी सदस्य (ACM) | सुकमा, छत्तीसगढ़ |
| 5 | रजनी मुडकेम | एरिया कमेटी सदस्य (ACM) | बीजापुर, छत्तीसगढ़ |
| 6 | राहत मांडवी | सदस्य | नारायणपुर, छत्तीसगढ़ |
| 7 | सुबनी (पति – अश्विन) | सदस्य | बीजापुर, छत्तीसगढ़ |
| 8 | जेलानी (पति – सोहन) | सदस्य | बीजापुर, छत्तीसगढ़ |
जंगल के कठिन जीवन से तंग आकर छोड़ा हिंसा का रास्ता
सालों तक बंदूक के दम पर अपनी समानांतर सरकार चलाने का दावा करने वाले इन नक्सलियों का अचानक हृदय परिवर्तन नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे जंगलों की कड़वी सच्चाई है। सुरक्षाबलों के नए कैंपों के बनने से नक्सलियों के छिपने और राशन-पानी जुटाने के ठिकाने खत्म हो गए। इसके साथ ही संगठन के भीतर शीर्ष नेताओं की मनमानी, निचले कैडरों का शोषण और लगातार बढ़ता अविश्वास उन्हें अंदर से तोड़ रहा था। एक तरफ जंगलों में हर पल मंडराता मौत का खतरा था, तो दूसरी तरफ राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का खुला दरवाजा। बेहतर जीवन, अपने परिवार के पास लौटने की चाह और बच्चों के भविष्य की चिंता ने इन्हें हथियार डालने पर मजबूर कर दिया।
मेज पर सजे एके-47 और गोलियों के ढेर से बयां हुई सरेंडर की कहानी
मंगलवार को जब यह 16 नक्सली पुलिस अधिकारियों के सामने आए, तो उन्होंने सिर्फ अपनी मौजूदगी दर्ज नहीं कराई, बल्कि अपने साथ उन घातक हथियारों को भी जमा करा दिया जो सालों से बेगुनाहों और सुरक्षाबलों का खून बहा रहे थे। पुलिस के सामने 2 एके-47, 6 इंसास, 1 एम-16, 1 एचके-33 और 1 यूएस कार्बाइन समेत कुल 11 अत्याधुनिक राइफलें रखी गईं। इसके साथ ही 38 मैगजीन और 1562 जिंदा गोलियां भी सौंपी गईं। इन हथियारों का पुलिस के कब्जे में आना माओवादियों की मारक क्षमता पर बहुत बड़ा प्रहार है। हथियार सौंपने वालों में 11 पुरुषों के साथ 5 महिला नक्सली भी शामिल हैं, जो जंगलों की अमानवीय जिंदगी से तंग आकर मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला कर चुकी थीं।
साल 2026 में बिखरता माओवादी नेटवर्क, अब खातमे की ओर कदम
यह सरेंडर केवल एक दिन की सफलता नहीं है, बल्कि साल 2026 में सुरक्षाबलों द्वारा लगातार चलाए गए आक्रामक अभियानों का सीधा परिणाम है। इस साल अब तक 93 नक्सलियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है, 45 नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर चुके हैं और मुठभेड़ों में 22 खूंखार नक्सली मारे गए हैं। मई के महीने में 27 नक्सलियों का एक साथ सरेंडर होना और फिर शीर्ष कमांडरों के खिलाफ हुई बड़ी कार्रवाइयों ने माओवादी ढांचे की कमर पूरी तरह तोड़ दी है। पुलिस प्रशासन ने बचे हुए नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हिंसा और भय का रास्ता छोड़कर सरकार की योजना का लाभ उठाएं और समाज में सम्मानजनक जीवन की शुरुआत करें।
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