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Assam (Gossaigaon) : असम की गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र में चुनावी माहौल अब पूरी तरह गरमा चुका है। गांव-गांव में चर्चा है कि इस बार चुनाव सिर्फ विधायक चुनने का नहीं, बल्कि अपने हक और पहचान को मजबूत करने का चुनाव है। इसी बीच JMM यानी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने गोसाईंगांव में एक बड़ी चुनावी जनसभा कर ताकत दिखाई। सभा जेएमएम प्रत्याशी फैड्रिक्शन हांसदा के समर्थन में रखी गई थी। सभा स्थल पर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और चाय बागान में काम करने वाले मजदूर बड़ी संख्या में पहुंचे। हर चेहरे पर एक उम्मीद थी कि शायद इस बार उनकी बात सुनी जाएगी।
सभा स्थल पर लोगों की भीड़, हर तरफ चर्चा सिर्फ अधिकार की
सभा में आने वाले लोगों की बातचीत एक ही दिशा में घूम रही थी। कोई कह रहा था कि मजदूरी बढ़नी चाहिए, तो कोई कह रहा था कि चाय बागान में काम करने वाले परिवारों की हालत बद से बदतर हो गई है। कई लोगों ने कहा कि वे सालों से मेहनत कर रहे हैं, लेकिन बदले में आज भी उन्हें वही पुरानी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। सभा में मौजूद आदिवासी समाज के लोगों का कहना था कि अब उन्हें अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ा होना होगा।

कल्पना सोरेन के आते ही माहौल हुआ जोशीला
जैसे ही गांडेय विधायक कल्पना सोरेन सभा स्थल पर पहुंचीं, भीड़ में उत्साह बढ़ गया। लोग नारे लगाने लगे और मंच के आसपास भीड़ जमा हो गई। कल्पना सोरेन ने मंच से लोगों का अभिवादन किया और फिर सीधे मुद्दे की बात की। उन्होंने कहा कि असम का यह चुनाव सामान्य चुनाव नहीं है। यह चुनाव असम की दिशा तय करेगा।
“यह चुनाव इतिहास बनाने का मौका है”
कल्पना सोरेन ने सभा में कहा कि असम की जनता अब बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव सिर्फ सरकार बनाने का नहीं, बल्कि इतिहास बनाने का चुनाव है। कल्पना सोरेन ने कहा, “असम विधानसभा चुनाव कोई सामान्य चुनाव नहीं है। यह इतिहास बनाने का चुनाव है। यहां की जनता बदलाव का मन बना चुकी है।” उन्होंने कहा कि असम में आदिवासी समाज को अब अपनी ताकत पहचाननी होगी और अपने हक की लड़ाई के लिए एकजुट होना होगा।

आदिवासियों के हितों की रक्षा का वादा
कल्पना सोरेन ने अपने भाषण में सबसे ज्यादा जोर आदिवासी समाज पर दिया। उन्होंने कहा कि असम में आदिवासी समुदाय की कई समस्याएं हैं, जिन पर अब तक गंभीरता से काम नहीं हुआ। कई इलाकों में लोगों को जमीन, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने साफ कहा कि अब जेएमएम असम के आदिवासियों के हितों की रक्षा करेगी और उनकी आवाज विधानसभा तक पहुंचाएगी।
चाय बागान मजदूरों की पीड़ा का जिक्र
सभा में जब कल्पना सोरेन ने चाय बागान मजदूरों की बात उठाई, तो वहां मौजूद मजदूरों की भीड़ में हलचल दिखी। उन्होंने कहा कि चाय बागान मजदूर दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन उन्हें आज भी उनका हक नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि मजदूरों की मजदूरी, इलाज, बच्चों की पढ़ाई और रहने की सुविधा जैसी समस्याओं को लेकर जेएमएम गंभीर है। कल्पना सोरेन ने कहा, “असम के चाय बागान में काम करने वाले मजदूरों को उनका हक-अधिकार दिलाने के लिए झामुमो प्रतिबद्ध है।” उन्होंने यह भी कहा कि जेएमएम आने वाले समय में भी मजदूरों के साथ खड़ी रहेगी।

“आपका एक वोट बहुत कीमती है”
कल्पना सोरेन ने लोगों को वोट की ताकत समझाते हुए कहा कि चुनाव के दिन दिया गया एक वोट पूरे समाज को मजबूती दे सकता है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अगर एकजुट होकर वोट देगा, तो कोई भी ताकत उनकी आवाज को दबा नहीं पाएगी। उन्होंने कहा, “आपका एक-एक वोट बहुमूल्य है। आपका वोट असम में रहने वाले आदिवासी समुदाय को मजबूती देगा।” सभा में मौजूद लोगों ने इस अपील पर तालियों के साथ समर्थन जताया।
जोबा माझी और सोमेश सोरेन ने भी की अपील
इस मौके पर जेएमएम की सांसद जोबा माझी और विधायक सोमेश चंद्र सोरेन भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने भी मंच से जनता को संबोधित किया। जोबा माझी ने कहा कि अगर आदिवासी समाज अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर वोट करेगा, तो निश्चित रूप से बदलाव आएगा। वहीं सोमेश चंद्र सोरेन ने कहा कि गोसाईंगांव क्षेत्र को अब ऐसा प्रतिनिधि चाहिए जो जनता की तकलीफ समझे और उनके लिए विधानसभा में लड़ सके।

प्रत्याशी फैड्रिक्शन हांसदा को जिताने की अपील
सभा में बार-बार जेएमएम प्रत्याशी फैड्रिक्शन हांसदा का नाम लिया गया। नेताओं ने कहा कि वे एक जमीन से जुड़े नेता हैं और जनता की समस्याओं को समझते हैं। लोगों से अपील की गई कि वे फैड्रिक्शन हांसदा को ज्यादा से ज्यादा वोट देकर विजयी बनाएं। सभा के दौरान कार्यकर्ताओं ने भी घर-घर जाकर प्रचार करने की बात कही।
जनता में उम्मीद, लेकिन सवाल भी
सभा में मौजूद कई लोगों के चेहरे पर उम्मीद साफ नजर आई, लेकिन साथ ही कई सवाल भी थे। लोगों का कहना था कि उन्हें वादे नहीं, काम चाहिए। चाय बागान मजदूरों ने कहा कि मजदूरी बढ़नी चाहिए और इलाज की सुविधा मिलनी चाहिए। वहीं युवाओं ने रोजगार और पढ़ाई की सुविधा को लेकर चिंता जताई। कुछ बुजुर्गों ने कहा कि वे वर्षों से चुनाव देख रहे हैं, लेकिन अब वे बदलाव को सच होते देखना चाहते हैं।
चुनावी सभा का संदेश साफ
गोसाईंगांव में हुई इस जनसभा का संदेश साफ था। जेएमएम ने आदिवासी समाज और चाय बागान मजदूरों के मुद्दे को केंद्र में रखकर जनता से समर्थन मांगा। कल्पना सोरेन ने अपने भाषण में यह साफ कर दिया कि जेएमएम असम में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है।
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