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Hazaribagh : हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के कुसुम्भा गांव में जो हुआ, उसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। यह कोई आम हत्या नहीं थी, यह एक ऐसी खौफनाक वारदात थी जिसमें अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और इंसानी लालच ने मिलकर एक मासूम बच्ची की जान ले ली। जिस मां ने बच्ची को जन्म दिया, वही मां उसे मौत के मुंह तक लेकर गई। और जिस महिला को गांव वाले ‘भगतिनी’ कहकर सम्मान देते थे, वही इस नरसंहार की सबसे बड़ी साजिशकर्ता निकली। यह घटना मंगला जुलूस की रात 24/25 मार्च 2026 की है। एक धार्मिक माहौल के बीच गांव में भक्ति का रंग था, ढोल-नगाड़े बज रहे थे, लोग पूजा-पाठ में डूबे थे। लेकिन उसी रात एक मासूम बच्ची की जिंदगी को तंत्र-मंत्र की आग में झोंक दिया गया।
मंगला जुलूस में निकली थी बच्ची, सुबह मिली लाश
कुसुम्भा गांव में मंगला जुलूस चल रहा था। गांव की गलियों में भीड़ थी, पूजा का उत्साह था। इसी भीड़ में रेशमी देवी अपनी तीनों संतान के साथ निकली थी। घर वालों को क्या पता था कि यह जुलूस एक बच्ची की जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। रात बीत गई। सुबह 25 मार्च को करीब 8:30 बजे विष्णुगढ़ थाना को सूचना मिली कि गांव के मिडिल स्कूल के पीछे मैदान में बांस की झाड़ी के पास एक बच्ची का शव पड़ा है। बच्ची वही थी जो रात में मंगला जुलूस से गायब हुई थी। जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो जो दृश्य सामने था, उसने अनुभवी पुलिसकर्मियों को भी झकझोर दिया। बच्ची का शव झाड़ियों में पड़ा था। शरीर पर चोट के निशान थे। सिर से खून बह चुका था। और सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि वारदात के पीछे सिर्फ हत्या नहीं, बल्कि दरिंदगी और तंत्र-मंत्र की कहानी छिपी थी।
मां ने खुद दर्ज कराया केस, पर कहानी में छिपा था सबसे बड़ा सच
बच्ची की मां रेशमी देवी ने विष्णुगढ़ थाना में लिखित आवेदन दिया। आरोप लगाया गया कि उनकी नाबालिग बेटी के साथ रेप कर हत्या कर दी गई है। आवेदन में धनेश्वर पासवान और अन्य अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। इसके बाद विष्णुगढ़ थाना कांड संख्या 42/26 दर्ज हुआ। धाराएं लगाई गईं, बीएनएस और पॉक्सो एक्ट के तहत केस बना। गांव में सनसनी फैल गई। हर कोई यही कह रहा था कि किसी बाहरी अपराधी ने बच्ची को निशाना बनाया होगा। लोग आक्रोशित थे, मातम पसरा था। लेकिन असली कहानी इससे कहीं ज्यादा खौफनाक थी।
पुलिस को शक हुआ, एसआईटी का गठन, तकनीकी जांच ने खोल दी पोल
मामला बेहद संवेदनशील था। एक नाबालिग बच्ची की हत्या और रेप का मामला था। पुलिस पर दबाव भी था और गांव में तनाव भी बढ़ रहा था। इसी बीच झारखंड के डीजीपी और हजारीबाग एसपी ने 26 मार्च को एसआईटी का गठन किया। एसआईटी का नेतृत्व आईपीएस अधिकारी नागरगोजे शुभम भाउसाहेब को सौंपा गया। एसआईटी ने सबसे पहले तकनीकी साक्ष्य जुटाए। कॉल डिटेल, लोकेशन, गांव में मौजूद संदिग्धों की गतिविधियां, हर चीज खंगाली गई।कुछ घंटों की जांच के बाद पुलिस को यह साफ लगने लगा कि कहानी में कुछ ऐसा है जो सामने नहीं आ रहा। क्योंकि जिस तरह शव मिला, वह सामान्य अपराध नहीं लग रहा था। पुलिस को शक हुआ कि हत्या किसी अनजान अपराधी ने नहीं, बल्कि किसी अपने ने की है।
पूछताछ में टूटी भगतिनी, उगल दी पूरी कहानी
एसआईटी ने गांव के कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। भीम राम नाम के व्यक्ति पर शक गहराया। साथ ही गांव की शांति देवी उर्फ भगतिनी पर भी पुलिस की नजर गई। गांव में भगतिनी का नाम तंत्र-मंत्र और पूजा-पाठ के लिए मशहूर था। लोग उसे देवी का रूप मानते थे। कई परिवार अपने घरेलू विवाद, बीमारी और मानसिक परेशानियों का इलाज उसी के पास जाकर कराते थे। पुलिस ने जब भगतिनी से पूछताछ की, तो पहले वह टालती रही। लेकिन जैसे-जैसे तकनीकी साक्ष्य सामने रखे गए, उसका चेहरा उतरने लगा। आखिरकार वह टूट गई और उसने जो कबूल किया, उसने पुलिस को भी सन्न कर दिया।
बेटा बीमार था, मां अंधविश्वास में फंस गई
पूछताछ में पता चला कि रेशमी देवी का बेटा सुधीर कुमार सिंह लंबे समय से शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान था। मां उसे लेकर कई जगह घूमी, इलाज कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। फिर वह गांव की भगतिनी के पास पहुंची। भगतिनी ने उसे तंत्र-मंत्र का डर दिखाया। कहा कि तुम्हारे घर पर बुरी शक्ति का साया है। तुम्हारा बेटा ठीक नहीं होगा, जब तक बलि नहीं दी जाएगी। और फिर भगतिनी ने वह बात कही, जिसने मां के अंदर की ममता को खत्म कर दिया।
भगतिनी ने कहा, “अगर बेटा ठीक कराना है तो किसी कुंवारी लड़की की बलि देनी होगी।” इतना ही नहीं, भगतिनी ने यह भी कहा कि तुम्हारी छोटी बेटी पर माता सवार रहती है, उसका बलिदान देना सबसे अच्छा रहेगा। रेशमी देवी अंधविश्वास के मकड़जाल में पूरी तरह फंस चुकी थी। बेटे की बीमारी ने उसे इतना कमजोर कर दिया था कि वह अपनी ही बेटी को बलि देने के लिए तैयार हो गई।
मंगला जुलूस की रात, भगतिनी के घर पहुंची मां और बेटी
24 मार्च 2026 की रात अष्टमी थी। मंगला जुलूस चल रहा था। गांव में भक्ति का माहौल था। इसी मौके को भगतिनी ने बलि के लिए चुना था। शाम करीब 7 बजे रेशमी देवी अपने बच्चों के साथ जुलूस में निकली। फिर वह अपनी छोटी बेटी को लेकर भगतिनी के घर पहुंची। भगतिनी ने कहा कि पूजा रात 9 बजे के बाद होगी। उसने मां को यह भी समझाया कि बलि के समय बच्ची को पकड़ने के लिए एक आदमी चाहिए होगा। इसके बाद मां वापस गई और गांव के भीम राम को साथ लेकर आई।
251 रुपये की पूजा, मां ने दिए सिर्फ 20, फिर भी शुरू हो गया तंत्र
रात करीब 9:30 बजे रेशमी देवी भीम राम के साथ बच्ची को लेकर भगतिनी के घर पहुंची। पूजा के लिए 251 रुपये तय थे, लेकिन मां ने सिर्फ 20 रुपये दिए। फिर भी भगतिनी ने पूजा शुरू कर दी। घर में स्थित मनसा मंदिर में बच्ची को बैठाया गया। उसके माथे पर सिंदूर लगाया गया, आंखों में काजल लगाया गया, और प्रसाद के नाम पर इलायचीदाना खिलाया गया। बच्ची को लगा कि यह कोई साधारण पूजा है। उसे क्या पता था कि उसकी मौत का इंतजाम हो चुका है।
बांसवाड़ी में ले जाई गई बच्ची, प्लास्टिक बिछाया गया, फिर शुरू हुआ मौत का खेल
भगतिनी ने कहा कि असली पूजा बांसवाड़ी में होगी, जहां वह “भूत बांधती” है। तीनों बच्ची को लेकर बांसवाड़ी पहुंचे। वहां पहले से एक बोरा था, जिसके अंदर का सफेद प्लास्टिक जमीन पर बिछाया गया। बच्ची को उसी पर लिटा दिया गया। भगतिनी के हाथ में बांस का कॉलिंग स्टिक था। वह बच्ची के शरीर के चारों ओर उसे घुमाते हुए बड़बड़ाने लगी। फिर भगतिनी ने कहा, “मुझ पर देवास आ गया है, मुझे कुंवारी लड़की का खून चाहिए।” और इसके बाद जो हुआ, वह इंसानियत के नाम पर धब्बा है।
भीम राम ने घोंटा गला, मां ने पकड़े पैर
भगतिनी के इशारे पर भीम राम बच्ची के ऊपर झुका और उसका गला घोंटने लगा। बच्ची तड़पने लगी, छटपटाने लगी। लेकिन उसकी मां ने उसे बचाने के बजाय उसके दोनों पैर पकड़ लिए। कुछ ही मिनटों में मासूम की सांसें थम गईं। बच्ची की आंखें खुली रह गईं। शरीर सुन्न हो गया। और मां, भगतिनी और भीम राम वहीं खड़े रहे।
पत्थर से सिर फोड़ा, खून से पूजा, मंदिर में छिड़का खून
जब तीनों को लगा कि बच्ची मर चुकी है, तब भगतिनी ने तंत्र क्रिया को और भयावह रूप दे दिया। पुलिस के अनुसार भगतिनी ने बच्ची के गुप्तांग में कॉलिंग स्टिक जबरदस्ती प्रवेश कराया। फिर भीम राम ने पत्थर उठाकर बच्ची के सिर पर वार किया। सिर फट गया। चेहरा खून से भर गया। खून बहता रहा। भगतिनी ने उसी खून को हाथों में लेकर बच्ची के शरीर पर पुताई की। फिर खून को अंजुली में भरकर मनसा मंदिर के पूजा स्थल पर छिड़क दिया। यह किसी फिल्म की कहानी नहीं थी, यह हजारीबाग के एक गांव की सच्चाई थी।
मां ने बाद में खुद को बचाने के लिए बनाया दुष्कर्म का केस
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि हत्या के बाद रेशमी देवी ने खुद को बचाने के लिए दुष्कर्म और हत्या की कहानी गढ़ी। उसने आवेदन देकर केस दर्ज कराया ताकि शक किसी बाहरी अपराधी पर जाए। लेकिन तकनीकी जांच और एसआईटी की पूछताछ ने उसकी चालाकी को बेनकाब कर दिया।
पुलिस ने तीनों को दबोचा, गांव में दहशत
एसआईटी टीम ने कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपी
- भीम राम (उम्र करीब 45 वर्ष)
- रेशमी देवी (उम्र करीब 35 वर्ष), मृत बच्ची की मां
- शांति देवी उर्फ भगतिनी (उम्र करीब 55 वर्ष)
तीनों कुसुम्भा गांव के ही रहने वाले हैं। गिरफ्तारी के बाद गांव में सन्नाटा है। लोग भरोसा नहीं कर पा रहे कि जिस मां को लोग रोते हुए देख रहे थे, वही मां इस हत्याकांड की सबसे बड़ी आरोपी निकली।
एसआईटी और छापामारी टीम ने निभाई अहम भूमिका
इस पूरे मामले के खुलासे में एसआईटी टीम के साथ विष्णुगढ़ एसडीपीओ बैद्यनाथ प्रसाद, डीएसपी अनुभव भारद्वाज, डीएसपी प्रशांत कुमार, महिला थाना प्रभारी विन्ध्यवासिनी कुमारी सिन्हा समेत कई थाना प्रभारी और तकनीकी शाखा की टीम शामिल रही।
यह हत्या नहीं, अंधविश्वास की सबसे खतरनाक तस्वीर है
यह मामला सिर्फ हत्या नहीं है। यह बताता है कि आज भी समाज में अंधविश्वास किस हद तक लोगों को अंधा कर सकता है। एक मां ने अपने बेटे की बीमारी के डर में अपनी ही बेटी को मौत के हवाले कर दिया। और एक तथाकथित भगतिनी ने तंत्र-मंत्र के नाम पर गांव के लोगों को बरगलाकर इंसानियत को कुचल दिया।
पुलिस की जांच जारी, और भी कड़ियां खंगाली जा रही
पुलिस का कहना है कि फिलहाल तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में आगे भी जांच चल रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं इस तरह की गतिविधियां पहले भी तो नहीं हुई थीं।
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