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Patna : बिहार में गुरुवार की शाम आम दिनों जैसी नहीं होने वाली है। जैसे ही घड़ी में शाम के 7 बजेंगे और सायरन की तेज आवाज गूंजेगी, वैसे ही पटना समेत 6 जिलों में 15 मिनट के लिए अंधेरा छा जाएगा। घरों की लाइटें बंद होंगी, दुकानों की रोशनी बुझ जाएगी और ऑफिसों में भी अंधेरा कर दिया जाएगा। यह नजारा किसी फिल्मी आपातकाल जैसा लग सकता है, लेकिन यह एक तयशुदा मॉकड्रिल है। पटना के अलावा पूर्णिया, बेगूसराय, कटिहार, किशनगंज और अररिया में यह ब्लैकआउट होगा। प्रशासन इसे नागरिक सुरक्षा तैयारियों की बड़ी परीक्षा मान रहा है।
2 मिनट का सायरन, फिर पूरे शहर में ब्लैकआउट
प्रशासन के मुताबिक, सिविल डिफेंस का सायरन करीब 2 मिनट तक बजेगा। इस सायरन को हवाई हमले की चेतावनी के संकेत की तरह इस्तेमाल किया जाएगा। जैसे ही सायरन बजेगा, 15 मिनट का ब्लैकआउट शुरू हो जाएगा। इस दौरान लोगों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी रोशनी नहीं जलानी है। मोबाइल की फ्लैशलाइट, टॉर्च, इनवर्टर की रोशनी, यहां तक कि अपार्टमेंट के जनरेटर तक नहीं चलाने हैं।
सड़कों पर दिखेगी तेज हलचल, कई एजेंसियां होंगी एक्टिव
ब्लैकआउट के दौरान शहरों में अचानक हलचल बढ़ सकती है। पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें एक साथ राहत और बचाव का अभ्यास करेंगी। चौक-चौराहों पर लगे साउंड सिस्टम, पुलिस थानों और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के सायरन भी बज सकते हैं। ट्रैफिक पुलिस भी सड़कों पर सक्रिय रहेगी ताकि व्यवस्था बनी रहे।
पटना में इन जगहों पर बनेगा काल्पनिक संकट का माहौल
राजधानी पटना में कई अहम जगहों को मॉकड्रिल के लिए चुना गया है। इनमें पटना समाहरणालय, बिस्कोमान भवन, बांकीपुर बस स्टैंड और आईजीआईएमएस शामिल हैं। इन जगहों पर काल्पनिक हवाई हमले जैसी स्थिति बनाकर राहत और बचाव अभियान चलाया जाएगा। अधिकारी मौके पर रहकर पूरी कवायद की निगरानी करेंगे।
अस्पतालों को खास निर्देश, इलाज नहीं रुकेगा
हालांकि ब्लैकआउट का असर जरूरी सेवाओं पर नहीं पड़ेगा। अस्पतालों में इलाज पहले की तरह चलता रहेगा। लेकिन यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अस्पतालों की रोशनी बाहर दिखाई न दे। इसके लिए खिड़कियों पर पर्दे लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
डीएम की अपील, घबराएं नहीं, सहयोग करें
पटना डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने लोगों से अपील की है कि इसे गंभीरता से लें और सहयोग करें। उनका कहना है कि आम लोगों की भागीदारी के बिना ऐसा अभ्यास सफल नहीं हो सकता। बुधवार को इसकी तैयारी को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विस्तृत समीक्षा भी की गई। अधिकारियों को बताया गया कि सायरन बजने से लेकर राहत अभियान तक किस एजेंसी को क्या जिम्मेदारी निभानी है।
क्यों हो रहा है यह अभ्यास
सरकार का कहना है कि यह किसी खतरे का संकेत नहीं है। इसका मकसद सिर्फ यह जांचना है कि अगर कभी कोई आपात स्थिति आती है तो प्रशासन, राहत एजेंसियां और आम लोग कितनी तेजी और समझदारी से प्रतिक्रिया देते हैं।
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