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Home » घर का बजट बिगाड़ने की तैयारी, साबुन-बिस्कुट से राशन तक होगा महंगा
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घर का बजट बिगाड़ने की तैयारी, साबुन-बिस्कुट से राशन तक होगा महंगा

May 11, 2026No Comments4 Mins Read
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New Delhi : रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले सामान खरीदने वाली आम जनता को जल्द महंगाई का एक और झटका लग सकता है। साबुन, डिटर्जेंट, बिस्कुट, पैकेट बंद खाद्य पदार्थ, पेय पदार्थ और ब्यूटी प्रोडक्ट जैसी चीजें आने वाले दिनों में महंगी हो सकती हैं। दरअसल, फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स यानी एफएमसीजी कंपनियां एक बार फिर कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं। यह बढ़ोतरी एक साथ नहीं बल्कि धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से की जा सकती है।

कंपनियों ने पहले ही बढ़ा दिए हैं 3 से 5 फीसदी दाम

कंपनियों के अधिकारियों ने हालिया तिमाही नतीजों के दौरान संकेत दिए हैं कि वे पहले ही कई उत्पादों के दाम 3 से 5 फीसदी तक बढ़ा चुके हैं। कंपनियों का कहना है कि लागत का दबाव लगातार बना हुआ है और अगर यह स्थिति जारी रही तो आने वाले समय में और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।

कच्चा तेल, पैकेजिंग और ईंधन लागत बनी बड़ी वजह

महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह कच्चे तेल से जुड़ी लागत में तेजी बताई जा रही है। इसके अलावा पैकेजिंग सामग्री जैसे प्लास्टिक, पेपर और अन्य कच्चे माल के दाम भी बढ़े हैं। कंपनियों के मुताबिक ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ गया है, जिससे उत्पादन लागत भी ऊपर चली गई है।

ईरान संघर्ष से सप्लाई चेन पर असर, लागत और बढ़ी

कंपनियों ने यह भी कहा कि ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है। इसका असर कच्चे माल की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ा है। साथ ही, डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी ने भी आयात आधारित कच्चे माल को और महंगा कर दिया है। इसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों, घरेलू सामान और कॉस्मेटिक उत्पादों पर पड़ रहा है।

दाम बढ़ाने के साथ वजन घटाने की भी तैयारी

कंपनियां सिर्फ कीमतें बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि एक और तरीका अपना रही हैं। कई पैकेट बंद उत्पादों में मात्रा घटाई जा रही है। यानी ग्राहक को कीमत वही लगेगी, लेकिन पैकेट में सामान कम मिलेगा। इसके अलावा कंपनियां छूट और प्रचार खर्चों में कटौती भी कर रही हैं ताकि मुनाफा बना रहे।

छोटे पैक बचाने की कोशिश, ताकि बिक्री न गिरे

कंपनियां यह भी समझती हैं कि अगर एकदम से छोटे पैक महंगे हुए तो ग्राहक सीधे असर महसूस करेगा। इसलिए 5, 10 और 15 रुपये वाले छोटे पैक को बाजार में बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, बड़े पैक वाले उत्पादों की कीमतें बढ़ने की संभावना ज्यादा बताई जा रही है।

कंपनियों के बयान, क्या कहा बड़े अधिकारियों ने

हिंदुस्तान यूनिलीवर

कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी निरंजन गुप्ता ने कहा कि कंपनी पर 8 से 10 फीसदी तक महंगाई का दबाव है।
उन्होंने बताया कि कंपनी ने पहले ही 2 से 5 फीसदी तक कीमतें बढ़ाई हैं और जरूरत पड़ने पर आगे भी दाम बढ़ सकते हैं।

डाबर इंडिया

डाबर इंडिया के वैश्विक सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा कि कंपनी चालू वित्त वर्ष में करीब 10 फीसदी महंगाई का सामना कर रही है।
उन्होंने बताया कि डाबर अलग-अलग श्रेणियों में 4 फीसदी तक कीमतें बढ़ा चुकी है और लागत नियंत्रण के उपाय कर रही है।

ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज

ब्रिटानिया के सीईओ रक्षित हरगेव ने कहा कि ईंधन और पैकेजिंग लागत में करीब 20 फीसदी वृद्धि हुई है। उन्होंने संकेत दिया कि कंपनी कीमतें बढ़ाने और पैकेट का वजन घटाने दोनों विकल्पों पर विचार कर रही है। खासतौर पर बड़े पैक महंगे हो सकते हैं।

नेस्ले इंडिया

नेस्ले इंडिया के चेयरमैन और एमडी मनीष तिवारी ने कहा कि मौजूदा समय काफी अस्थिर है। उन्होंने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि अगले दो महीने में हालात कैसे होंगे, इसलिए कंपनी को हर तरह से तैयार रहना होगा।

आम जनता पर सीधा असर तय

अगर एफएमसीजी कंपनियां दाम बढ़ाती हैं तो इसका सीधा असर घर के बजट पर पड़ेगा। साबुन, डिटर्जेंट, बिस्कुट, चाय-कॉफी, तेल, मसाले, शैम्पू, टूथपेस्ट जैसी चीजें हर घर की जरूरत हैं। ऐसे में इन उत्पादों की कीमतों में थोड़ी सी बढ़ोतरी भी महीने भर के खर्च को बढ़ा सकती है।

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