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Home » गढ़वा के युवाओं की आंखों में जागा संवैधानिक सपनों का उजाला
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गढ़वा के युवाओं की आंखों में जागा संवैधानिक सपनों का उजाला

November 26, 2025No Comments4 Mins Read
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गढ़वा
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Garhwa (Nityanand Dubey) :  बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय के विधि विभाग में बुधवार को कुछ अलग ही माहौल था। छात्र जल्दी-जल्दी कदम बढ़ा रहे थे, जैसे उन्हें पता हो कि आज सिर्फ कार्यक्रम नहीं, अनुभव मिलने वाला है। 76वें संविधान दिवस पर आयोजित इस संगोष्ठी ने कई युवा दिलों में भविष्य की एक नई तस्वीर उकेर दी।

जब दीप जला, तो उम्मीद भी लौ जली

गुरुपद संभव सभागार में जब कुलाधिपति दिनेश प्रसाद सिंह, कुलपति प्रोफेसर एम. के. सिंह और विभागाध्यक्ष किरण वर्मा ने मुख्य अतिथियों के साथ मिलकर दीप जलाया, तो माहौल में एक गंभीरता फैल गई। कई छात्रों के चेहरे चमक उठे जैसे उन्हें पहली बार महसूस हुआ हो कि वे एक ऐसी शिक्षा का हिस्सा हैं, जिसका रिश्ता सीधे देश के भविष्य से है।

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गढ़वा की बेटी ने कहा… “मैं तुम लोगों के लिए हूं”

मुख्य वक्ता और DLSA सचिव निभा रंजना लकड़ा के आने पर सभागार में उत्साह और बढ़ गया। उनकी बातों में सरकारी अधिकारी का औपचारिक स्वर नहीं, बल्कि गढ़वा की धरती से निकली एक ऐसी बेटी की गर्मजोशी थी, जो अपने ही जिले के युवाओं को आगे बढ़ते देख खुश थी। उन्होंने मुस्कुराकर कहा, “गढ़वा भले पिछड़ा कहलाए, लेकिन यहां के बच्चों की सोच किसी से कम नहीं। मैं चाहती हूं कि आपका महाविद्यालय सीधे राष्ट्रीय और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े। जितना हो सकेगा, मैं आपकी मदद करूंगी।” उनका यह कहना कई छात्रों के लिए सिर्फ घोषणा नहीं, बल्कि भरोसा था।

जब कानून इतिहास से निकलकर आज में आया

लीगल ऐड डिफेंस काउंसिल नित्यानंद दुबे ने अपनी बात ऐसे शुरू की जैसे कहानी सुना रहे हों। उन्होंने बताया कि कैसे पुरानी सभ्यताओं में नियम बने, कैसे समाज बदलता गया, और कैसे कानून सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी में आकार लेता है। उनकी बातों के दौरान कई छात्र नोट्स लेने लगे। कुछ सिर हिलाकर सहमति जताते रहे। ऐसा लग रहा था कि कानून के विकास की यह यात्रा उनके अपने सपनों की यात्रा बन गई।

“सशक्त नागरिक बनो, सिर्फ डिग्रीधारी नहीं”

कुलाधिपति दिनेश प्रसाद सिंह का संबोधन सभागार की गंभीरता को और गहरा कर गया। उन्होंने कहा, “डिग्री तो हर कोई ले लेता है, लेकिन संविधान की समझ और समाज के प्रति जिम्मेदारी ही आपको सशक्त नागरिक बनाती है।” उनकी यह बात कई युवाओं के मन में सीधी उतरती हुई महसूस हुई।

कुलपति की बातों में था आभार और उम्मीद

कुलपति प्रो. एम. के. सिंह ने संविधान निर्माताओं को याद करते हुए कहा कि हम आज जो सीख रहे हैं, वह लाखों संघर्षों और सपनों का परिणाम है। उन्होंने छात्रों को देखते हुए कहा, “आप ही कल के भारत की पहचान होंगे। संविधान सिर्फ दस्तावेज नहीं, आपके जीवन की दिशा है।”

जब पूरी सभा एक स्वर में बोल उठी

DLSA सचिव निभा रंजना लकड़ा के नेतृत्व में जब सभी ने संविधान की प्रस्तावना पढ़ी, तो पूरा सभागार एक स्वर में गूंज उठा।
कुछ छात्रों ने पहली बार इतने बड़े समूह में प्रस्तावना पढ़ी थी। किसी ने बाद में कहा, “लग रहा था जैसे हम देश के लिए कुछ महत्वपूर्ण कर रहे हैं।” उस एक मिनट ने कई युवाओं को उनकी भूमिका का एहसास करा दिया।

कहीं दृढ़ता, कहीं सपने, कहीं जिम्मेदारी

मंच संचालन अभिषेक, विवेक और चांदनी ने सहजता से संभाला। शिक्षकों, विभागाध्यक्षों, प्राचार्य और अधिकारियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और गरिमापूर्ण बनाया। इस पूरे आयोजन के दौरान छात्रों के चेहरों पर एक बात साफ दिख रही थी, वे अब सिर्फ कानून नहीं पढ़ेंगे, बल्कि समझेंगे भी कि यह देश के हर व्यक्ति की जिंदगी से कैसे जुड़ा है।

कोर्ट और पंचायत भवन में भी गूंजा प्रस्तावना का स्वर

जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज प्रसाद के निर्देश पर व्यवहार न्यायालय, गढ़वा कारा और पंचायत भवन चिरौंजिया में भी संविधान की प्रस्तावना पढ़ी गई। यह सिर्फ रस्म नहीं थी, बल्कि लोगों को याद दिलाने का तरीका था कि देश के मूल्यों का आधार अब भी मजबूत है।

इसे भी पढ़ें : हाथियों के झुंड में मचाया तांडव, कई घरों को किया तहस-नहस

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