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Pakur (Jaydev Kumar) : झारखंड के पाकुड़ ज़िले के महेशपुर प्रखंड के मानिकपुर पंचायत का गांव ढुलीबांध। गांव के चारों ओर उमड़ी भीड़, ढोल-मांदर की थाप और हवा में गूंजते नारों के बीच जब दो सजे-धजे भैसे अखाड़े में उतरे तो रोमांच अपने चरम पर था। यह सिर्फ़ एक खेल नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति की जीवंत तस्वीर थी।
परंपरा जो पीढ़ियों से जीवित है
भैसा लड़ाई यहां केवल मनोरंजन का साधन नहीं है। यह पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है, जो ग्रामीणों की सामूहिकता और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव को मजबूत करती है। ढुलीबॉंध का यह आयोजन हर साल ग्रामीणों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं होता।
नेताओं का हुआ पारंपरिक स्वागत
इस आयोजन में झामुमो जिला सचिव माईकिल मुर्मू, जिला सह सचिव लाल मुहम्मद अंसारी और प्रखंड अध्यक्ष अब्दुल वदूद जैसे नेता मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उनका स्वागत आदिवासी रीति-रिवाज के साथ किया गया। पंखों से बने मुकुट, पारंपरिक गमछा और फूलों से सजी थाली इस स्वागत की गरिमा को और बढ़ा रही थी।
जब भिड़े ताकतवर भैंसे तो झलका सांस्कृतिक धरोहर का अनोखा नजारा… देखें वीडियो
पाकुड़ ज़िले के महेशपुर प्रखंड के मानिकपुर पंचायत के गांव ढुलीबांध में भैसा लड़ाई pic.twitter.com/e7LTzIBsIJ
— News Samvad (@newssamvaad) September 17, 2025
“यह हमारी संस्कृति की पहचान है”
अपने संबोधन में प्रखंड अध्यक्ष अब्दुल वदूद ने कहा – “भैसा लड़ाई केवल ताक़त का खेल नहीं है, यह हमारी संस्कृति और सामूहिक एकजुटता का प्रतीक है।” उन्होंने मौके पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन सरकार की योजनाओं की जानकारी भी दी, जिसमें सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, फसल राहत योजना, पेंशन योजना, छात्रवृत्ति और स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल थीं।
रोमांच और उत्साह का संगम
भैसा लड़ाई के दौरान हर बार जब दो भैंसे आमने-सामने आते, तो दर्शकों की सांसें थम जातीं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस रोमांचक मुकाबले में डूबा हुआ था। प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिससे ग्रामीणों का उत्साह और बढ़ गया।
ये रहे मौजूद
इस मौके पर प्रखंड उपाध्यक्ष एनामुल हक, मैनुद्दीन अंसारी, नसीम अहमद, जग्गू कोड़ा, टाईगर शेख, निरोज मड़ैया, मिलन सोरेन समेत कई स्थानीय नेता और क्लब सदस्य मौजूद रहे।
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