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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : लोहे की खनक, बड़ी-बड़ी भट्टियों की गर्माहट और भारी मशीनों की लगातार गूंज। रामगढ़ स्थित बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड के प्लांट में रोज की तरह ही हलचल थी। मजदूर और इंजीनियर अपने-अपने काम में जुटे थे, लेकिन अचानक सायरन की जगह कुछ अलग आवाजें सुनाई देने लगीं। लोग रुके, देखा तो सामने यमराज का भेष धरे एक कलाकार खड़ा था। चेहरे पर वही पुराना खौफनाक अंदाज, लेकिन जुबान पर एक बेहद सीधा और गहरा सवाल था कि जब घर पर तुम्हारा कोई इंतजार कर रहा है, तो काम करते वक्त यह लापरवाही क्यों? बस, इसी मोड़ से शुरू हुआ वह सुरक्षा अभियान, जिसने प्लांट के हर कामगार के दिल को छू लिया।
सेफ्टी फर्स्ट, घर भी जाना है: जब नुक्कड़ नाटक ने झकझोर दिया
कंपनी परिसर में सजे इस मंच का मकसद कोई मनोरंजन करना नहीं, बल्कि जिंदगी की कीमत याद दिलाना था। ‘सेफ्टी फर्स्ट, घर भी जाना है’ थीम पर कलाकारों ने जब नाटक शुरू किया, तो प्लांट का माहौल पूरी तरह बदल गया। रोजमर्रा की वही बातें मंच पर जीवंत हो उठीं, जिन्हें अक्सर मजदूर अनदेखा कर देते हैं। कभी बिना ग्लव्स के चलती मशीन को छूना, तो कभी जल्दबाजी के चक्कर में हेलमेट किनारे रख देना। नाटक में दिखाया गया कि कैसे चंद सेकंड की बेपरवाही किसी की पूरी जिंदगी छीन लेती है और पीछे छूट जाता है रोता-बिलखता परिवार। जब यमराज के किरदार ने कहा कि तुम्हारी एक गलती से मेरा काम आसान हो जाता है, तो सामने खड़े दर्जनों कर्मचारियों के चेहरे पर एक अजीब सी खामोशी छा गई। यह खामोशी डर की नहीं, बल्कि अपनी भूल के अहसास की थी।
कसम खुद की हिफाजत की, ख्याल साथी का भी रखना होगा
नाटक के बाद माहौल काफी भावुक था, जिसे एक नई ऊर्जा में बदलने के लिए शपथ समारोह हुआ। सभी कर्मचारियों ने एक साथ हाथ आगे बढ़ाकर यह वादा किया कि वे प्लांट में कभी भी नियमों से समझौता नहीं करेंगे। इस शपथ में सिर्फ खुद को सुरक्षित रखने की बात नहीं थी, बल्कि अपने बगल में पसीना बहा रहे साथी की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी शामिल थी। मजदूरों ने एक स्वर में कहा कि शाम को सुरक्षित घर पहुंचना ही उनकी सबसे बड़ी कमाई है, और इसके लिए वे हर हाल में सुरक्षा के तय तौर-तरीकों का पालन करेंगे।

क्लासरूम में खुला राज: चलती मशीनें गलतियां माफ नहीं करतीं
जज्बातों की बात जब खत्म हुई, तो बात आई तकनीकी समझ की। कर्मचारियों को क्लासरूम में ले जाया गया, ताकि वे अपने काम के खतरों को वैज्ञानिक तरीके से समझ सकें। ट्रेनर्स ने चलती हुई भारी मशीनों के बीच काम करने के तौर-तरीके समझाए। उन्होंने बताया कि कोई भी काम शुरू करने से पहले उस जगह के खतरे को भांपना क्यों जरूरी होता है। सुरक्षा उपकरण पहनना कोई बोझ नहीं बल्कि सुरक्षा कवच है, यह बात उदाहरण देकर समझाई गई। कर्मचारियों को यह साफ हिदायत दी गई कि शॉर्टकट हमेशा नुकसानदेह होता है, इसलिए काम चाहे जो भी हो, निर्धारित प्रक्रिया के हिसाब से ही होना चाहिए।

दिन ढलते-ढलते प्लांट में मशीनों की आवाज तो वही थी, लेकिन वहां काम कर रहे लोगों की सोच बदल चुकी थी। अब उनके लिए सुरक्षा महज दीवार पर टंगा कोई बोर्ड नहीं, बल्कि अपने घर के दरवाजे पर शाम को मुस्कुराते हुए दस्तक देने का पक्का जरिया बन चुकी थी।
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