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Ranchi : जापुत 132/33 केवी ग्रिड, खूंटी में कार्यरत आउटसोर्स कर्मी स्वर्गीय जगन्नाथ मुंडा के निधन के बाद उनके परिवार पर रोजी-रोटी का गहरा संकट आ गया है। इस संकट को लेकर झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ मुखर हो गया है। संघ के केंद्रीय अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने संचरण जोन-1 के महाप्रबंधक अनिल कुमार भारतीयंम से मुलाकात की और मृतक के आश्रितों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। इस बैठक में उप महाप्रबंधक राजीव कुमार भी मौजूद थे। प्रतिनिधिमंडल ने साफ कहा कि पीड़ित परिवार की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जगन्नाथ मुंडा का 13 अगस्त को इलाज के दौरान निधन हो गया था।
परिवार की मर्जी के बिना दूसरी बहाली मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ
महाप्रबंधक से बातचीत के दौरान अजय राय ने कहा कि किसी भी कर्मी की मौत सिर्फ एक नौकरी का खत्म होना नहीं होती, बल्कि पूरे परिवार के सामने भरण-पोषण की बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है। ऐसे कठिन समय में बिजली विभाग और आउटसोर्स एजेंसी का यह बुनियादी फर्ज बनता है कि वह पीड़ित परिवार के संपर्क में रहे और उनकी मदद करे। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि बेहद दुख की बात है कि मृतक जगन्नाथ मुंडा के परिजनों से बात करने की जरूरत तक नहीं समझी गई। पीड़ित परिवार की सहमति और जानकारी के बिना किसी बाहरी व्यक्ति को काम पर रख लेना पूरी तरह से गलत और मानवीय संवेदनाओं की खुली अनदेखी है।
आश्रित को काम देने और ईपीएफ क्लीयरेंस की उठाई मांग
संघ ने मांग रखी है कि स्वर्गीय जगन्नाथ मुंडा की जगह उनके परिवार की सहमति से उनके भांजे बॉबी बेदिया या बहन प्रियंका हास्सा को काम पर रखा जाए। इसके अलावा मृतक के ईपीएफ की अटकी रकम भी तुरंत परिजनों को दिलाई जाए। संघ ने अधिकारियों से यह भी कहा कि भविष्य के लिए एक साफ नियम बनना चाहिए, जिसके तहत किसी भी दैनिक वेतनभोगी या आउटसोर्स कर्मी की मौत होने पर उसके परिवार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिए बिना किसी दूसरे व्यक्ति को उस पद पर न रखा जाए। आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिए ऐसा नियम तय होना जरूरी है, ताकि कर्मचारियों के बकाया वेतन, ईपीएफ और आश्रितों के अधिकारों का निपटारा समय पर हो सके।
जरूरत पड़ी तो सरकार तक जाएगी लड़ाई
अजय राय ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि संघ श्रमिकों के अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अगर मृतक कर्मी के परिवार के साथ न्याय नहीं हुआ तो संघ चुप नहीं बैठेगा। विभाग से लेकर सरकार के सक्षम स्तर तक इस मुद्दे को उठाया जाएगा और हक दिलाने के लिए लोकतांत्रिक और कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा। उन्होंने महाप्रबंधक से इस मामले में तुरंत दखल देने और पीड़ित परिवार को राहत पहुंचाने के लिए सकारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया।
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