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Patna : बिहार के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य में आगामी रबी 2026-27 के मौसम से PMFBY यानी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को दोबारा शुरू किया जा रहा है। किसान आगामी 15 नवंबर से 15 जनवरी 2027 तक अपनी फसलों के बीमा के लिए आवेदन कर सकेंगे। सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने सोमवार को विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर फसल बीमा योजना और सब्जी प्रसंस्करण संघ (वेजफेड) के कामकाज की गहन समीक्षा की। मंत्री ने साफ निर्देश दिया कि सारी तैयारियां समय पर पूरी हों और मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया इतनी आसान और पारदर्शी रहे कि किसानों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
बीमा कंपनियों के चयन का टेंडर केंद्र को भेजा
समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि राज्य कैबिनेट के फैसले के बाद योजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके लिए 21 जुलाई को राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया गया था, जिसकी पहली बैठक में ही फसलों के चयन, क्षतिपूर्ति के स्तर, क्लस्टर और तकनीक के इस्तेमाल जैसे अहम फैसले ले लिए गए हैं। बीमा कंपनियों के चयन से जुड़ा निविदा प्रस्ताव केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है। मंत्री ने अधिकारियों को दो टूक कहा कि योजना का असली मकसद किसानों को समय पर आर्थिक सुरक्षा देना है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रखंड स्तर पर बन रहे 68 प्याज गोदाम, 10 तैयार
बैठक में ‘हर थाली में बिहारी तरकारी’ मुहिम के तहत वेजफेड के प्रोजेक्ट्स का ब्योरा भी रखा गया। अधिकारियों ने बताया कि प्रखंड स्तर पर बनने वाली 114 प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियों की आधारभूत संरचनाओं में से 25 का काम पूरा हो चुका है, जबकि 82 पर निर्माण चल रहा है। केवल एक जगह को छोड़कर बाकी सभी 113 जगहों पर जमीन मिल चुकी है। इसके अलावा हरी सब्जियों और प्याज को सड़ने से बचाने के लिए 68 प्रखंड स्तरीय प्याज भंडारण गोदामों की मंजूरी दी गई थी। इनमें से 10 गोदाम बनकर तैयार हैं, 50 पर काम चल रहा है और बाकी 8 के लिए जमीन तलाशने का काम जारी है।
केवल लक्ष्य न गिनें, किसानों की जेब तक पहुंचे मुनाफा
मंत्री राम कृपाल यादव ने निर्माण कार्यों की धीमी रफ्तार पर नाखुशी जताते हुए कहा कि सरकारी फाइलों में लक्ष्य पूरा दिखाना काफी नहीं है। जब तक किसान को अपनी उपज का सही दाम, बेहतर बाजार और सुरक्षित गोदाम नहीं मिलेगा, तब तक इन ढांचों का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने खेत से लेकर बाजार तक की पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया ताकि सब्जी उत्पादकों की सहकारी समितियां अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। बैठक में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह, अपर निबंधक विकास कुमार बरियार और मनोज कुमार सिंह समेत कई वरीय अधिकारी मौजूद रहे।
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