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Home » सात किलोमीटर तक खाट से कंधे पर ले गए मरीज, नहीं आया 108 एम्बुलेंस
झारखंड

सात किलोमीटर तक खाट से कंधे पर ले गए मरीज, नहीं आया 108 एम्बुलेंस

August 25, 2019No Comments4 Mins Read
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बोकारो। एक तरफ सरकार के आलाकमान से लेकर नेता तक राज्य में विकास के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। वहीं बोकारो जिले के नक्सल प्रभावित गोमिया प्रखंड में जो वस्तुस्थिति है, वह जमीनी हकीकत को स्पष्ट बयां कर रही है। आखिरी पंक्ति तक विकास और योजनाओं का लाभ पहुंचाने के दावे की पोल गोमिया के सुदूरवर्ती गांवों में हर दिन खुल रही है। खासकर स्वास्थ्य सेवाओं का कितना बुरा हाल है, इसकी एक तस्वीर रविवार को दिखने को मिली। गोमिया प्रखंड के सुदूरवर्ती गांव सिमराबेड़ा में एक महिला मरीज को चारपाई पर इलाज के लिए ले जाने का मामला प्रकाश में आया है। पहले चारपाई पर रस्सी बांधी गई और बांस की बल्ली के सहारे परिजनों सहित गांव वाले पीड़िता के इलाज के लिए शहरी क्षेत्र की ओंर दौड़े। आरोप है कि महिला के रिश्तेदारों ने 108 एंबुलेंस सर्विस पर कॉल किया थी, जिसमें कॉल सेंटर ऑपरेटर ने बताया कि मोबाइल बंद नहीं रखें। आधे घंटे में एम्बुलेंस गंतव्य लोकेशन पर उपलब्ध होगा, लेकिन तीन घंटे के बाद भी गाड़ी नहीं आई। महिला का पति खेती गृहस्थी का काम करता है। एंबुलेंस का इंतजार और पीड़िता की हालत और खराब होती देख तिसकोपी गांव के एक प्राईवेट वाहन को पैसे देकर अस्पताल पहुंचाने कहा, जिससे महिला को फिर हजारीबाग सदर अस्पताल ले जाया गया।

क्या कहते हैं पीड़िता के रिश्तेदार और गांव वाले
सिमराबेड़ा में पीड़ित महिला के रिश्तेदारों और आस-पास के लोगों ने बताया कि शनिवार की देर रात छोटेलाल किस्कू की पत्नी छोटकी देवी (36) की तबीयत अचानक ख़राब हो गयी। उसने अपने भाई नरेश किस्कू, महेश किस्कू, सुखदेव किस्कू, भतीजा सुरेश किस्कू, अनिल किस्कू पड़ोसी मनोज कुमार महतो, महेंद्र महतो, चमेली देवी को इस बारे में जानकारी दी और सुबह होने का इंतजार करने लगे। हालत और खराब होने पर कुछ रास्ता न दिखा तो उनलोगों ने अहले सुबह साढ़े तीन बजे छोटकी देवी को चारपाई पर ही झुमरा ले जाने का फैसला किया। चूंकि झुमरा से वाहनों का आवागमन संभव है। जब वे वहां पैदल सात किलोमीटर की दूरी तय कर सुबह 9 बजे पहुंचे तो झारखंड सरकार के 108 एम्बुलेंस सर्विस को फोन किया। विभाग ने आधे घंटे तक इंतजार करने को कहा, लेकिन ढाई तीन घंटे से ज्यादा का वक्त गुजर जाने के बाद भी एम्बुलेंस वाहन नहीं आया। पीड़िता की परिस्थिति भांपते हुए भाड़े की गाड़ी से उसे हजारीबाग सदर भेजा गया है।
फेल हो रहा झुमरा एक्शन प्लान
ग्रामीणों ने बताया कि सारी समस्या पथ निर्माण एवं वन विभाग में आपसी तालमेल की कमी और एनओसी नहीं मिलने की वजह से है। परिणामस्वरूप सड़कों की योजना और प्रारूप तैयार है, परंतु सड़कें नहीं बन पा रही है। अगर सड़क तैयार हो जाती तो आज पीड़ितों को चारपाई पर पैदल लेकर चलने की नौबत नहीं आती। वहीं एक कारण यह भी बताया गया कि झुमरा एक्शन प्लान के तहत झुमरा के निकटवर्ती सात पंचायतों का विकास किया जाना है। प्रशासन ने जिन सात पंचायतों का जिक्र किया है, उसमें सिमराबेड़ा गांव भी शामिल है, परंतु एक्शन प्लान की घोषणा के वर्षों गुजर गए, पर अब भी बुनियादी सुविधाओं (पेयजल व सड़क) से ग्रामीण वंचित हैं।
चारपाई को एम्बुलेन्स बनाना पुरानी लाचारी
ज्ञात हो कि रस्सी, चारपाई, कंधे और बल्ली की से खाट को एम्बुलेन्स बनाने की यह कहानी गोमिया के लिए कोई नई नहीं है। इससे पूर्व भी झुमरा पहाड़ के अमन, बलथरवा, सुवरकटवा, सिमराबेड़ा की ऐसी कई घटनाएं देखने को मिली है। परंतु, प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करने के बजाय महज खानापूर्ति करने में लगा है। सड़क और संसाधन के अभाव में गोमिया प्रखंड में कई एेसे गांव हैं, जहां आज भी लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। अब भी समय है सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाये। तभी केन्द्र सरकार के सबका साथ, सबका विकास का नारा सही मायने में चरितार्थ हो सकेगा।

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