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News Samvad : सात समंदर पार किसी अनजान मुल्क के थिएटर में जब बत्तियां बुझती हैं और पर्दे पर अपने देश की कोई कहानी तैरने लगती है, तो वहां बैठे चंद भारतीयों की धड़कनें तेज हो जाती हैं। कुछ ऐसा ही माहौल था ट्यूनीशिया के जेर्बा द्वीप पर, जहां सजी थी दुनिया भर के युवाओं और महिला फिल्मकारों की महफिल। मौका था ‘जेर्बा इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ विमेन एंड यूथ सिनेमा’ के 12वें संस्करण का। 24 से 27 अक्टूबर तक चले इस मेले में जब भारत की शॉर्ट फिल्म ‘तोयज (व्हाइट लोटस)’ के आखिरी दृश्य के साथ पर्दे पर अंधेरा छाया, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। फिल्म ने न केवल दर्शकों के दिलों को छुआ, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर तीसरा पुरस्कार जीतकर यह साबित कर दिया कि अच्छी कहानी को किसी भाषा के सहारे की जरूरत नहीं होती।
सधे हुए निर्देशन और जज्बात का कमाल
इस फिल्म की बागडोर युवा निर्देशक अभिजीत श्रीवास्तव के हाथों में थी। ‘तोयज’ की सबसे बड़ी ताकत उसकी सादगी और इंसानी जज्बातों की वो बारीक समझ रही, जो सीधे दिल में उतर जाती है। किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर जब अलग अलग संस्कृतियों के लोग जूरी में बैठते हैं, तो उनकी कसौटी पर खरा उतरना आसान नहीं होता। लेकिन इस फिल्म के कैमरे का काम, किरदारों का ठहराव और तकनीक की सधी हुई पकड़ ने हर किसी को बांध लिया। जब आधिकारिक तौर पर इसके तीसरे स्थान पर आने का ऐलान हुआ, तो वहां मौजूद भारतीय खेमे के चेहरे खुशी से खिल उठे। ट्यूनीशिया में भारतीय दूतावास ने भी अपनी खुशी नहीं छिपाई और सोशल मीडिया पर निर्देशक अभिजीत और उनकी पूरी टीम को शाबाशी देते हुए इसे पूरे देश के लिए गर्व का पल बताया।

अरब और पश्चिमी मुल्कों के बीच कड़ा मुकाबला
यह जीत इसलिए भी बहुत खास मानी जा रही है क्योंकि मुकाबला कोई आसान नहीं था। चार दिनों तक चले इस सिनेमाई जलसे में अमेरिका और फ्रांस जैसे सिनेमा के पुराने दिग्गजों से लेकर मिस्र, सीरिया, मोरक्को, लेबनान, अल्जीरिया, क्रोएशिया, कतर, बहरीन और फिलिस्तीन तक के फिल्मकार अपनी बेहतरीन रचनाएं लेकर पहुंचे थे। कुल 38 देशों की 68 चुनिंदा फिल्मों की स्क्रीनिंग के बीच हर दिन नई सोच और नई शैली देखने को मिल रही थी। इतने सारे मुल्कों की गंभीर और संवेदनशील फिल्मों के बीच भारत की एक स्वतंत्र शॉर्ट फिल्म का जूरी की डायरी में अपनी जगह पक्की करना दिखाता है कि हमारे युवा फिल्ममेकर्स अब वैश्विक फलक पर अपनी पहचान बहुत मजबूती से दर्ज करा रहे हैं।
सिनेमा के जरिए जुड़ते दो अलग किनारे
इस बार के महोत्सव में भारत को ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’ का दर्जा दिया गया था, जो अपने आप में एक बड़ा कूटनीतिक और सांस्कृतिक सम्मान है। ट्यूनीशिया जैसे उत्तरी अफ्रीकी देश में भारतीय फिल्मों को लेकर हमेशा से एक खास दिलचस्पी रही है, लेकिन अक्सर वह बड़े बजट की मसाला फिल्मों तक सीमित दिखती थी। ‘तोयज’ जैसी फिल्मों की स्क्रीनिंग और उसकी जीत ने वहां के दर्शकों को भारतीय समाज के उस नए और संवेदनशील चेहरे से रूबरू कराया है, जो जिंदगी की कड़वी मीठी सच्चाइयों को बेहद कलात्मक ढंग से पेश करता है। कला के जानकारों का मानना है कि इस आयोजन ने दोनों देशों के बीच सिर्फ बातचीत का दायरा नहीं बढ़ाया, बल्कि आने वाले दिनों में दोनों मुल्कों के निर्देशकों और लेखकों के मिलकर काम करने की एक नई जमीन भी तैयार कर दी है।
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