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Ranchi : अदालतों में तारीख पर तारीख और सालों से लटके मामलों की वजह से आम लोग अक्सर परेशान रहते हैं। किसी का मुआवजा अटका होता है, किसी का बैंक विवाद, तो कोई पारिवारिक मामले में सालों से न्याय की राह देख रहा होता है। लेकिन शनिवार को रांची में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने लोगों को यह भरोसा दिलाया कि अगर सही मंच मिले तो न्याय जल्दी भी मिल सकता है। 09 मई को दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का वर्चुअल उद्घाटन हुआ। इस कार्यक्रम का नेतृत्व झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति और झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने किया। रांची न्यायमंडल से ऑनलाइन माध्यम से लोक अदालत की शुरुआत की गई, जिसमें जिलेभर से न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता, मध्यस्थ, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में लाभुक जुड़े रहे। यह आयोजन सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उन लोगों के लिए राहत की सांस थी, जो लंबे समय से अदालतों के चक्कर काट रहे थे।
दीप जलते ही शुरू हुआ न्याय का उत्सव
कार्यक्रम की शुरुआत मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। मंच पर बैठे न्यायिक अधिकारी, जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ पदाधिकारी इस बात के गवाह बने कि झारखंड में न्याय व्यवस्था को तेज करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। एंकरिंग की जिम्मेदारी न्यायिक दंडाधिकारी परिधि शर्मा और श्रृष्टि कुमारी ने संभाली। मंच पर मौजूद लोगों के चेहरों से साफ झलक रहा था कि यह लोक अदालत सामान्य आयोजन नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था को आम लोगों के करीब लाने की कोशिश है।
स्वागत भाषण में झलका भरोसा और उम्मीद
कार्यक्रम में स्वागत भाषण सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना ने दिया। उन्होंने कहा कि जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद के मार्गदर्शन में झारखंड में विधिक सेवा प्रणाली लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने साफ कहा कि अब न्याय सिर्फ कोर्ट की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि जागरूकता के जरिए गांव और मोहल्लों तक पहुंच रहा है। उनकी बातों से यह संदेश निकलकर आया कि अदालतें अब केवल फैसले सुनाने की जगह नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और समाधान निकालने का माध्यम भी बन रही हैं।

जस्टिस सुजीत नारायण बोले- लोक अदालत कार्यक्रम नहीं, उत्सव है
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि यह वर्ष की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत है और इसका उद्घाटन रांची न्यायमंडल से किया जा रहा है। उन्होंने कहा, लोक अदालत एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक उत्सव है। उनका कहना था कि अगर लोग जागरूक होंगे तो अधिक से अधिक विवाद अदालत के बाहर ही सुलझ जाएंगे। उन्होंने अधिवक्ताओं से भी आग्रह किया कि वे लोगों को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करें ताकि जरूरतमंदों को जल्द न्याय मिल सके।
अधिवक्ता और मध्यस्थ ही असली कड़ी
जस्टिस सुजीत नारायण ने अपने संबोधन में सबसे अहम बात कही। उन्होंने बताया कि लंबित मामलों के निस्तारण में अधिवक्ताओं और मध्यस्थों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत एक ऐसा मंच है जहां एक ही जगह पर विवाद का समाधान संभव है। इससे वादकारियों का समय बचता है, पैसा खर्च होने से बचता है और कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या कम होती है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज और देश के विकास के लिए जरूरी है कि न्याय व्यवस्था मजबूत हो और न्याय जल्द मिले।
पीएलवी की तारीफ, कहा- न्याय व्यवस्था की रीढ़ हैं
जस्टिस सुजीत नारायण ने पीएलवी (पैरा लीगल वॉलंटियर) की भूमिका को भी सराहा। उन्होंने कहा कि पीएलवी न्याय प्रणाली की रीढ़ हैं, क्योंकि वे गांव-गांव जाकर लोगों को कानूनी जानकारी देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जागरूकता कार्यक्रम, सेमिनार और प्रचार-प्रसार को लगातार बढ़ाया जाना चाहिए ताकि गरीब और जरूरतमंद वर्ग तक न्याय की पहुंच आसान हो।
पारिवारिक विवादों में तेजी लाने की जरूरत
अपने संबोधन में जस्टिस सुजीत नारायण ने पारिवारिक मामलों में डिस्ट्रेस वारंट की लंबित संख्या को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में समझौता और बातचीत से समाधान जल्दी निकल सकता है। उनका जोर इस बात पर था कि पारिवारिक विवाद जितना जल्दी सुलझेंगे, उतना ही समाज में शांति बनी रहेगी।
सिविल कोर्ट में नई सुविधाओं की शुरुआत
इस लोक अदालत के साथ रांची व्यवहार न्यायालय में कई नई सुविधाओं का उद्घाटन भी किया गया। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 ने दीदी कैफे, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण, वलनेरेबल विटनेस डिपोजिशन सेंटर, प्रोटेक्टेड विटनेस रूम और क्यूआर कोड आधारित एप्लिकेशन सिस्टम का उद्घाटन किया। यह सुविधाएं कोर्ट आने वाले आम लोगों के लिए मददगार साबित होंगी। खासकर गवाहों की सुरक्षा और सुविधा के लिए बनाए गए सेंटर को अहम कदम माना जा रहा है।
नुक्कड़ नाटक से सामाजिक संदेश
कार्यक्रम के दौरान समाज को संदेश देने के लिए डायन-बिसाही जैसी कुप्रथा के खिलाफ नुक्कड़ नाटक भी किया गया। रंग दर्पण नाटक मंच के कलाकारों ने अपने अभिनय के जरिए यह दिखाया कि किस तरह अंधविश्वास और झूठी मान्यताएं कई बार निर्दोष लोगों की जिंदगी बर्बाद कर देती हैं। कोर्ट परिसर में यह नाटक लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
60 बेंच, पूरी तैयारी के साथ आयोजन
धन्यवाद ज्ञापन में न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 ने बताया कि लोक अदालत को सफल बनाने के लिए पहले से पूरी तैयारी की गई थी। उन्होंने कहा कि वादकारियों को नोटिस भेजने से लेकर बैंक और बीमा कंपनियों के साथ समन्वय तक, हर स्तर पर काम किया गया ताकि ज्यादा से ज्यादा मामलों का निपटारा हो सके। लोक अदालत में न्यायिक दंडाधिकारियों के लिए 40 बेंच और कार्यपालक दंडाधिकारियों के लिए 20 बेंच, कुल 60 बेंच बनाई गईं।
जब चेक मिला तो आंखें भर आईं
लोक अदालत का सबसे भावुक दृश्य तब सामने आया जब मुआवजा राशि के चेक लाभुकों को दिए गए। मोटर वाहन दुर्घटना मामलों में 36 पीड़ितों के बीच 20,06,40,672 रुपये की राशि वितरित की गई। इस दौरान गीता सिंह को 13,2,18,496 रुपये का चेक मिला। माना जा रहा है कि यह रकम उनके लिए केवल पैसा नहीं, बल्कि उस दर्द का सहारा है जो हादसे के बाद जिंदगी में आया था। कई लाभुकों के चेहरे पर राहत साफ दिख रही थी। कुछ लोगों के लिए यह रकम इलाज का साधन थी, तो कुछ के लिए परिवार चलाने का भरोसा।
पीड़ित मुआवजा योजना से 24 लोगों को मदद
झारखंड पीड़ित मुआवजा (संशोधन) योजना 2019 के तहत भी सहायता राशि बांटी गई। इस योजना के तहत 24 पीड़ितों को कुल 82,80,000 रुपये दिए गए। यह राशि उन पीड़ितों के लिए सहारा बनी, जो किसी अपराध या हादसे के कारण आर्थिक संकट में फंस गए थे।
हजारों मामलों का निस्तारण, 136 करोड़ से ज्यादा का सेटलमेंट
लोक अदालत की सबसे बड़ी उपलब्धि इसके आंकड़े बने। आज के आयोजन में कुल 47397 लंबित मामले और 832365 प्री-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण किया गया। इस दौरान कुल 1,36,99,52,446.21 रुपये का सेटलमेंट हुआ। यह आंकड़ा बताता है कि लोक अदालत ने हजारों परिवारों को राहत दी और अदालतों पर बोझ कम करने में बड़ी भूमिका निभाई।
स्टॉलों का निरीक्षण, व्यवस्थाओं की जांच
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद ने व्यवहार न्यायालय परिसर में लगे स्टॉलों का निरीक्षण भी किया। उन्होंने वहां मौजूद सुविधाओं को देखा और संबंधित अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
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