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New Delhi : करीब तीन साल तक देश की राजनीति, खेल जगत और अदालतों में चर्चा का केंद्र रहे महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में आखिरकार फैसला आ गया। दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष और गोंडा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह तथा पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को सभी आरोपों से बरी कर दिया। फैसला आते ही कोर्ट परिसर में मौजूद समर्थकों के चेहरों पर खुशी साफ दिखी। कई लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई तो कुछ ने नारे लगाकर फैसले का स्वागत किया। अदालत से बाहर निकलते ही बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि कोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी किया है। उन्होंने कहा कि शुरू से उनका भरोसा न्यायपालिका पर था और अब अदालत ने साफ कर दिया कि उनके खिलाफ साजिश रची गई थी। उन्होंने कहा कि सच को सामने आने में वक्त जरूर लगा, लेकिन आखिरकार न्याय मिला। फैसले से पहले जब वह अदालत पहुंचे थे तो मीडिया ने उनसे कई सवाल पूछे। इस पर उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि जो भी होगा, अदालत तय करेगी। मेरे हाथ में कुछ नहीं है। मैं वही सुनूंगा जो कोर्ट कहेगा।
1133 दिन तक चली कानूनी लड़ाई, 127 बार हुई सुनवाई
यह मामला करीब 1133 दिनों तक अदालत में चला। इस दौरान 127 सुनवाई हुईं। बृजभूषण शरण सिंह 20 जुलाई 2023 से जमानत पर थे। फैसले वाले दिन उनका पूरा परिवार दिल्ली में मौजूद था। कोर्ट का फैसला आने के बाद समर्थकों ने अदालत परिसर के बाहर खुशी जताई। बृजभूषण के बेटे करण भूषण ने कहा कि परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन था। उन्होंने कहा कि जब आरोप लगे थे, तब किसी ने यह नहीं सोचा कि एक परिवार पर क्या गुजरती है। एक मां, बहन और बच्चों को किस तरह की सामाजिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आज सच्चाई और न्याय दोनों की जीत हुई है। उन्होंने अदालत और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों का आभार भी जताया। करण भूषण से यह सवाल भी पूछा गया कि आरोपों के बाद बृजभूषण शरण सिंह को लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला था और उस समय उनकी नाराजगी की भी चर्चा रही थी। इस पर उन्होंने कहा कि परिवार ने पूरे समय धैर्य रखा और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखा।
2023 में शुरू हुआ था विवाद, छह महिला पहलवानों ने लगाए थे आरोप
यह मामला जनवरी 2023 में उस समय सामने आया, जब देश की कई नामी महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए। शिकायत करने वाली पहलवानों का कहना था कि वर्ष 2016 से 2022 के बीच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, प्रशिक्षण शिविरों, भारतीय कुश्ती महासंघ के कार्यालय और दूसरे स्थानों पर उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। इन आरोपों के बाद जंतर-मंतर पर लंबे समय तक पहलवानों का आंदोलन चला। इस मुद्दे ने पूरे देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया था। जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने जून 2023 में करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की। छह महिला पहलवानों की शिकायतों के आधार पर बृजभूषण शरण सिंह पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। इनमें यौन उत्पीड़न, महिला की गरिमा भंग करने के उद्देश्य से बल प्रयोग और आपराधिक धमकी जैसे आरोप शामिल थे। वहीं, विनोद तोमर पर आपराधिक धमकी का आरोप लगाया गया था। करीब तीन साल तक चली सुनवाई और बहस के बाद अब राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया है। इस फैसले के साथ देश के सबसे चर्चित खेल और कानूनी विवादों में से एक मामले में फिलहाल अदालत का फैसला सामने आ गया है।
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