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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : रामगढ़ के बरकाकाना थाना क्षेत्र के हेहल स्थित मां छिन्नमस्तिका सीमेंट एंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के पावर प्लांट में शनिवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। प्लांट में टर्बाइन के ओवरस्पीड होने के बाद अचानक जोरदार ब्लास्ट हो गया। हादसे में ड्यूटी पर तैनात तीन इंजीनियरों की मौत हो गई, जबकि एक इंजीनियर गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को बेहतर इलाज के लिए रांची भेजा गया है। घटना के बाद पूरे प्लांट में अफरा तफरी मच गई। हादसे में जान गंवाने वालों में धनबाद के संजीव केसरी, गढ़वा के नगर उंटारी के अभिषेक पांडेय, बोकारो के विनीत कुमार महतो शामिल हैं। वहीं हजारीबाग के तरुण रवानी बेतरह जख्मी हुए हैं। घटना की सूचना मिलते ही बरकाकाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी।
रात करीब साढ़े 11 बजे अचानक बढ़ गई टर्बाइन की स्पीड
बताया जा रहा है कि रात करीब 11:30 बजे चारों इंजीनियर टर्बाइन पर ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान टर्बाइन की स्पीड अचानक बढ़ने लगी। इंजीनियरों ने उसे नियंत्रित करने और बंद करने की कोशिश की, लेकिन टर्बाइन की रफ्तार कम होने के बजाय और बढ़ती चली गई। कुछ ही देर बाद तेज आवाज के साथ टर्बाइन में जोरदार ब्लास्ट हो गया।
ब्लास्ट के बाद प्लांट में अफरा तफरी मच गई। आसपास काम कर रहे कर्मचारी घटनास्थल की ओर दौड़े। वहां तीन इंजीनियरों की मौत हो चुकी थी, जबकि तरुण रवानी गंभीर हालत में मिले। उन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने के कारण उन्हें रांची भेज दिया गया।
प्रारंभिक तौर पर हादसे की वजह पावर प्लांट के सिस्टम पर अत्यधिक तापमान का असर और टर्बाइन का ओवरस्पीड होना बताया जा रहा है। कर्मचारियों के अनुसार, टर्बाइन को सुरक्षित रखने वाले प्रोटेक्शन सिस्टम के काम नहीं करने की बात भी सामने आ रही है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह जांच के बाद ही पूरी तरह साफ हो सकेगी।
कर्मचारियों ने कहा- कंट्रोल रूम का तापमान लगातार बढ़ रहा था
हादसे के बाद प्लांट के कर्मचारियों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि पावर प्लांट के कंट्रोल रूम में काफी समय से तापमान लगातार बढ़ रहा था। वहां लगा एसी खराब था और गर्मी के बीच कर्मचारियों को काम करना पड़ रहा था।
कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस समस्या की जानकारी प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को दी थी। तापमान की स्थिति बताने के लिए टेंपरेचर गन से लगातार रीडिंग ली जाती थी और इसकी जानकारी प्रबंधन को भेजी जाती थी। इसके बावजूद कंट्रोल रूम की कूलिंग व्यवस्था को ठीक नहीं कराया गया।
कर्मचारियों का कहना है कि अगर समय रहते एसी ठीक कर दिया जाता और तापमान को नियंत्रित करने की व्यवस्था की जाती तो हालात इतने खराब नहीं होते। उनका यह भी आरोप है कि प्लांट में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले भी चिंता जताई जाती रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
तीन मौतों के बाद मजदूरों का फूटा गुस्सा, मुख्य गेट जाम
हादसे के बाद प्लांट में काम करने वाले मजदूर और कर्मचारी आक्रोशित हो गए। बड़ी संख्या में कर्मचारी प्लांट के मुख्य गेट पर जमा हो गए और प्रदर्शन शुरू कर दिया। कर्मचारियों ने मृत इंजीनियरों के परिजनों को उचित मुआवजा देने और घायल इंजीनियर के बेहतर इलाज की मांग की।
मजदूरों का आरोप है कि प्लांट में काम के दौरान सुरक्षा मानकों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जाता। कुछ कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि आठ घंटे की ड्यूटी के बजाय 12 घंटे तक काम लिया जाता है। विरोध करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दिए जाने की बात भी कर्मचारियों ने कही है।
कर्मचारियों का कहना है कि तीन लोगों की जान चली गई है। ऐसे में सिर्फ मुआवजा देना ही काफी नहीं होगा, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अगर सुरक्षा में लापरवाही सामने आती है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।
पुलिस ने कहा- मामले की जांच की जा रही
बरकाकाना थाना प्रभारी उमाशंकर वर्मा ने बताया कि फैक्ट्री में काम करने के दौरान तीन कर्मियों की मौत हुई है, जबकि एक गंभीर रूप से घायल है। घायल को बेहतर इलाज के लिए रांची भेजा गया है। पुलिस मामले की जानकारी जुटा रही है और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।
फिलहाल हादसे के बाद प्लांट में तनाव का माहौल है। तीन परिवारों में मातम पसरा हुआ है, जबकि घायल इंजीनियर के परिवार के लोग उसके इलाज को लेकर चिंतित हैं। अब जांच के बाद ही यह साफ होगा कि टर्बाइन में ब्लास्ट किस वजह से हुआ और इसमें किसी तरह की तकनीकी या सुरक्षा संबंधी लापरवाही थी या नहीं।
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